मोकामा में बाहुबलियों की जंग: अनंत बनाम सूरजभान, किस पर भारी पड़ेगा मोकामा का जनादेश?

बी के झा

NSK

पटना / नई दिल्ली, 16 अक्टूबर

बिहार विधानसभा चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आ रहे हैं, वैसे-वैसे मोकामा की सीट एक बार फिर सुर्खियों के केंद्र में है।

राजनीति के इस रणभूमि में इस बार दो बाहुबली आमने-सामने हैं — एक ओर हैं अनंत सिंह उर्फ छोटे सरकार, तो दूसरी तरफ मैदान में उतरने की तैयारी कर रहे हैं पूर्व सांसद सूरजभान सिंह। सूरजभान ने बुधवार को तेजस्वी यादव की मौजूदगी में राजद की सदस्यता ग्रहण की, जिससे मोकामा का सियासी समीकरण पूरी तरह बदल गया है।

सूरजभान सिंह का लालू परिवार में प्रवेश, आरजेडी का बढ़ा दांव पूर्व सांसद और बाहुबली छवि वाले सूरजभान सिंह अब राजद का हिस्सा बन गए हैं। सूत्रों के मुताबिक, तेजस्वी यादव ने भूमिहार समाज में पैठ मजबूत करने के लिए यह बड़ा कदम उठाया है। माना जा रहा है कि राजद मोकामा सीट से सूरजभान की पत्नी वीणा देवी को टिकट दे सकती है। वीणा देवी पहले से ही आरजेडी में सक्रिय हैं और गुरुवार को उनके नामांकन की पूरी संभावना जताई जा रही है।राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा जोरों पर है कि तेजस्वी यादव ने न सिर्फ एक मजबूत उम्मीदवार तैयार किया है, बल्कि भूमिहार वोट बैंक को भी साधने की सोची-समझी रणनीति बनाई है।

मोकामा: दबंगों का गढ़, जहां इतिहास खुद दोहराता है मोकामा विधानसभा क्षेत्र हमेशा से बाहुबलियों का गढ़ माना जाता रहा है। यहां की राजनीति में अनंत सिंह का वर्चस्व लंबे समय से कायम है।

2020 में वे आरजेडी के टिकट पर चुनाव जीते थे, लेकिन एक आपराधिक मामले में सजा मिलने के बाद सीट खाली हो गई। इसके बाद उनकी पत्नी नीलम देवी ने 2022 के उपचुनाव में जीत दर्ज कर परचम लहराया था।इस बार समीकरण बिल्कुल नए हैं। जेडीयू ने अनंत सिंह को फिर से टिकट देकर मैदान में उतारा है, जबकि आरजेडी के पाले में अब सूरजभान सिंह और उनकी पत्नी हैं। यानी, मोकामा में इस बार “बाहुबली बनाम बाहुबली” का दिलचस्प मुकाबला तय है।

तेजस्वी का ‘भूमिहार कार्ड’, क्या फलेगा?राजद सुप्रीमो तेजस्वी यादव पिछले कुछ महीनों से एक नई सामाजिक समीकरण साधने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। हाल ही में बेगूसराय से बोगो सिंह और खगड़िया से जेडीयू विधायक डॉ. संजीव कुमार को भी आरजेडी में शामिल किया गया।

सूत्रों की मानें तो इस बार आरजेडी लगभग 10 सीटों पर भूमिहार उम्मीदवार उतार सकती है — ताकि “गंगा-सोन पट्टी” की राजनीति में जातीय समीकरण बदला जा सके।भूमिहार समाज की बिहार में लगभग 2.86% आबादी है, जबकि ब्राह्मणों की हिस्सेदारी 3.65% के करीब है। ऐसे में तेजस्वी यादव की यह चाल भूमिहार वोटरों के बीच पैठ बनाने की कोशिश के रूप में देखी जा रही है।

मोकामा की जनता किस पर करेगी भरोसा?स्थानीय मतदाता इस बार पूरी तरह चुप हैं। जब हमारे संवाददाता ने एक स्थानीय नागरिक से पूछा कि अनंत सिंह और सूरजभान सिंह में से उनकी पहली पसंद कौन है, तो उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा —14 नवंबर को सबको पता चल जाएगा कि मोकामा किसके साथ है।

राजनीतिक विश्लेषकों के बीच भी मतभेद हैं। कुछ का मानना है कि अनंत सिंह के पास मोकामा की मजबूत जमीनी पकड़ है, जबकि अन्य का कहना है कि सूरजभान सिंह का अनुभव और तेजस्वी यादव का समर्थन उन्हें बढ़त दिला सकता है।

निष्कर्ष:

मोकामा बना चुनावी रणभूमि बिहार की राजनीति में जहां जातीय समीकरण और बाहुबली छवि अब भी वोट की दिशा तय करते हैं, वहीं मोकामा का यह मुकाबला पूरे प्रदेश की नजरों में है।

अनंत सिंह और सूरजभान सिंह — दोनों ही अपने-अपने प्रभाव और जनता के बीच गहरी पैठ रखते हैं। अब देखना है कि तेजस्वी यादव का नया दांव राज करेगा या छोटे सरकार की पुरानी पकड़ फिर एक बार जीत का सेहरा पहनाएगी।

14 नवंबर को मतगणना के बाद ही तय होगा कि मोकामा की राजनीति का बादशाह कौन होगा।

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