बी के झा
NSK

पटना/ नई दिल्ली, 16 अक्टूबर
बिहार की राजनीति एक बार फिर ‘पारिवारिक समीकरणों’ और ‘राजनीतिक रणनीति’ के दिलचस्प संगम पर खड़ी है। राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने मंगलवार को बड़ा दांव खेलते हुए अपने बड़े बेटे तेज प्रताप यादव की साली डॉ. करिश्मा राय को सारण जिले की परसा विधानसभा सीट से पार्टी का टिकट दे दिया।यह फैसला न सिर्फ राजनीतिक रूप से चौंकाने वाला है, बल्कि भावनात्मक और पारिवारिक रूप से भी बेहद दिलचस्प है, क्योंकि परसा सीट ही वह जगह है जहां तेज प्रताप की पत्नी ऐश्वर्या राय के पिता चंद्रिका राय कभी विधायक हुआ करते थे।
राजनीति में रिश्तों का उलझा गणित दरअसल, लालू प्रसाद यादव ने यह टिकट उस वक्त दिया है जब तेज प्रताप और ऐश्वर्या राय का तलाक का मामला अभी भी अदालत में लंबित है। दोनों परिवारों के बीच संबंध लंबे समय से तनावपूर्ण हैं।ऐसे में लालू का करिश्मा राय पर भरोसा जताना, इसे ‘राजनीतिक चतुराई’ और ‘पारिवारिक रणनीति’ दोनों के रूप में देखा जा रहा है।करिश्मा राय, पेशे से डेंटिस्ट और पूर्व मुख्यमंत्री दरोगा प्रसाद राय की पोती हैं।
वे चंद्रिका राय के बड़े भाई विधानचंद्र राय की पुत्री हैं — यानी ऐश्वर्या राय की बड़ी बहन।
जेडीयू ने बदला समीकरण, RJD ने किया पलटवारदिलचस्प बात यह है कि इस बार जेडीयू ने चंद्रिका राय को टिकट नहीं दिया। पार्टी ने हाल ही में राजद से आए छोटेलाल राय को परसा से प्रत्याशी बनाया है।छोटेलाल राय वही हैं जिन्होंने 2020 के चुनाव में चंद्रिका राय को 17,000 वोटों के अंतर से हराया था।अब हालात यह हैं कि जहां जेडीयू ने चंद्रिका राय को किनारे कर दिया, वहीं लालू ने उसी परिवार की दूसरी पीढ़ी की सदस्य करिश्मा राय को सियासी मैदान में उतार दिया — मानो राजनीतिक ‘रिवेंज’ का नया अध्याय शुरू हो गया हो।
करिश्मा राय बोलीं – “लालच नहीं, लालू परिवार के स्नेह से जुड़ी हूं”राजद में शामिल होते ही करिश्मा राय ने कहा था,मैं किसी लालच में राजनीति में नहीं आई हूं। लालू परिवार से हमारा रिश्ता पुराना है। मेरे पिता और लालू यादव कॉलेज के दिनों से मित्र हैं। तेजस्वी और तेज प्रताप जैसे नेताओं के साथ मिलकर बिहार को नई दिशा देना चाहती हूं।तेजस्वी यादव ने भी करिश्मा को पार्टी में शामिल कराते हुए कहा था कि “राजद में अब युवाओं और शिक्षित चेहरों को आगे लाया जाएगा। करिश्मा इसका प्रतीक हैं।”
तेज प्रताप–ऐश्वर्या विवाद की प्रताप यादव और ऐश्वर्या राय की शादी 2018 में बड़ी धूमधाम से हुई थी।लेकिन कुछ ही महीनों बाद यह रिश्ता टूटने की कगार पर पहुंच गया।तेज प्रताप ने कोर्ट में तलाक की अर्जी दी, जबकि ऐश्वर्या ने राबड़ी देवी और तेज प्रताप के परिवार पर उत्पीड़न के आरोप लगाए।इसके बाद चंद्रिका राय ने राजद से नाता तोड़कर जेडीयू का दामन थाम लिया।अब जब उनकी ही भतीजी (और बेटी की बहन) को लालू ने टिकट दे दिया, तो यह सियासी और पारिवारिक समीकरणों दोनों में नई जंग की शुरुआत का संकेत है।
‘परसा’ बनेगा इस बार बिहार चुनाव का सबसे दिलचस्प रणक्षेत्र प्रसाद विधानसभा सीट अब सिर्फ एक चुनावी मैदान नहीं रह गई है — यह राजनीतिक प्रतिशोध, पारिवारिक असंतोष और सियासी प्रतीकवाद का केंद्र बन चुकी है।यहां की लड़ाई अब केवल राजद बनाम जेडीयू नहीं, बल्कि लालू परिवार बनाम राय परिवार का रूप ले चुकी है।विश्लेषकों का कहना है कि यह चुनाव “पारिवारिक रिश्तों की राजनीति बनाम वैचारिक निष्ठा” की परीक्षा साबित होगा।
निष्कर्ष
लालू प्रसाद यादव ने इस कदम से यह संदेश देने की कोशिश की है कि राजद की राजनीति में नए चेहरे, पुराने रिश्ते और पारिवारिक भावनाएं एक साथ चल सकते हैं।अब देखना यह होगा कि करिश्मा राय अपनी इस राजनीतिक पारी की शुरुआत में परसा की जनता का विश्वास जीत पाती हैं या नहीं — क्योंकि इस सीट पर मुकाबला सिर्फ वोटों का नहीं, अतीत और वर्तमान की जंग का भी है।
