2026 तक चुनाव नहीं हुए तो पश्चिम बंगाल में लगेगा राष्ट्रपति शासन” — सुवेंदु अधिकारी का बड़ा दावा

बी के झा

NSK

जलपाईगुड़ी / नई दिल्ली, 16 अक्टूबर

पश्चिम बंगाल की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। राज्य विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और बीजेपी के कद्दावर नेता सुवेंदु अधिकारी ने गुरुवार को एक तूफानी बयान देते हुए दावा किया कि यदि 2026 के विधानसभा चुनाव समय पर नहीं हुए, तो राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू हो जाएगा।जलपाईगुड़ी जिले के नग्राकाटा में आयोजित एक विशाल जनसभा में सुवेंदु ने यह भी आरोप लगाया कि मतदाता सूची में 2.4 करोड़ फर्जी नाम शामिल हैं, जिन्हें हटाने के लिए SIR (Special Intensive Revision) प्रक्रिया शुरू की गई है।

सुवेंदु अधिकारी का दावा:अगर 4 मई 2026 तक चुनाव प्रक्रिया पूरी नहीं हुई, तो उसके बाद राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया जाएगा। यह तय है।”उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में लोकतंत्र को “तृणमूल कांग्रेस की साजिशों” से बचाने के लिए मतदाता सूची की समीक्षा अनिवार्य है। सुवेंदु ने कहा कि अगर SIR के जरिए फर्जी नाम नहीं हटाए गए, तो चुनावों की पारदर्शिता पर सवाल उठेगा।

“2.4 करोड़ फर्जी नाम हटेंगे, ममता हारेंगी भवानीपुर में”सुवेंदु ने कहा,2024 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी और टीएमसी के बीच वोटों का अंतर केवल 42 लाख था। लेकिन मतदाता सूची में 2.4 करोड़ फर्जी नाम हैं — अवैध प्रवासियों और अयोग्य लोगों के। इन्हें हटाने के बाद जनता का असली जनादेश सामने आएगा।”उन्होंने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को सीधी चुनौती देते हुए कहा,मैं भवानीपुर में ममता को हराऊंगा। नंदीग्राम की तरह इस बार भी जनता सच्चाई के साथ खड़ी होगी।”

गौरतलब है कि 2021 के विधानसभा चुनाव में सुवेंदु ने ममता बनर्जी को नंदीग्राम से 1900 से अधिक वोटों से हराया था, और यह मामला अभी कलकत्ता हाईकोर्ट में लंबित है।

TMC के विरोध पर BJP का पलटवार कुछ TMC नेताओं द्वारा SIR के विरोध और कथित ‘मतदाता नाम हटाने की साजिश’ के आरोपों के जवाब में सुवेंदु ने कहा,हम ‘नो SIR, नो इलेक्शन’ के नारे के साथ रैलियां करेंगे। जब तक मतदाता सूची शुद्ध नहीं होगी, तब तक लोकतंत्र सुरक्षित नहीं हो सकता।”उन्होंने कहा कि बीजेपी मतदाता सूची को पारदर्शी बनाने और फर्जी वोटिंग की प्रवृत्ति पर रोक लगाने के लिए प्रतिबद्ध है।

बाढ़ पीड़ितों और चाय मजदूरों के लिए वाले उत्तर बंगाल के बाढ़ प्रभावित इलाकों में जनता को संबोधित करते हुए सुवेंदु ने कहा कि यदि बीजेपी 2026 में सत्ता में आती है, तो बाढ़ पीड़ितों के पुनर्वास के लिए विशेष राहत कोष बनाया जाएगा।उन्होंने चाय बागान मजदूरों के लिए भी न्यूनतम वेतन और स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार का आश्वासन दिया।हम केवल सत्ता नहीं, सेवा के लिए राजनीति करते हैं। बंगाल को हिंसा और भ्रष्टाचार से मुक्त कराना हमारा धर्म है।”

BJP सांसद पर हमले की निंदा सुवेंदु अधिकारी ने मालदा उत्तर के बीजेपी सांसद खगेन मुर्मू पर हालिया हमले की कड़ी निंदा की।उन्होंने कहा:मुर्मू जी अनुसूचित जनजाति से आते हैं। उन पर हुआ हमला राज्य सरकार की नाकामी का उदाहरण है। गिरफ्तारियां सिर्फ दिखावा हैं।उन्होंने इस घटना की NIA से जांच और अदालत की निगरानी में कार्रवाई की मांग की।गौरतलब है कि 6 अक्टूबर को बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के दौरे के दौरान खगेन मुर्मू और विधायक शंकर घोष पर भीड़ ने हमला कर दिया था, जिसमें दोनों घायल हो गए थे।बीजेपी ने आरोप लगाया कि यह हमला “टीएमसी से जुड़े गुंडों” द्वारा करवाया गया।

राजनीतिक विश्लेषण:

बंगाल में बढ़ी सियासी गर्मी राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सुवेंदु अधिकारी का यह बयान सिर्फ चेतावनी नहीं, बल्कि बीजेपी की नई रणनीति का संकेत है।राज्य की राजनीति में जहां टीएमसी सरकार प्रशासनिक मोर्चे पर विपक्ष के निशाने पर है, वहीं सुवेंदु का “राष्ट्रपति शासन” वाला बयान 2026 के चुनावी माहौल को पहले से गरमा रहा है।सुवेंदु अधिकारी अब विपक्षी नेता नहीं, बल्कि बीजेपी के रणनीतिक चेहरा बन चुके हैं।

उनकी हर बात अब सीधे ममता सरकार की नसों पर असर डालती है।” —

एक राजनीतिक विशेषज्ञ की टिप्पणी

निष्कर्ष:

बंगाल में ‘राजनीतिक तूफान’ की आहट पश्चिम बंगाल की राजनीति में यह बयान नया भूचाल ला सकता है। जहां बीजेपी “फर्जी मतदाता सूची” के मुद्दे को लेकर सड़क पर उतरने की तैयारी में है, वहीं टीएमसी इसे “लोकतांत्रिक प्रक्रिया में हस्तक्षेप” बता सकती है।

2026 का चुनाव अब सिर्फ सत्ता की जंग नहीं, बल्कि पारदर्शिता बनाम भ्रष्टाचार का सवाल बनता जा रहा है।राज्य की सियासत एक बार फिर उबाल पर है — और इस बार केंद्र में हैं सुवेंदु अधिकारी।

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