बी के झा
NSK

पटना, 16 मई
बिहार की सत्ता के गलियारों में इन दिनों एक नाम सबसे अधिक चर्चा में है — निशांत कुमार। मुख्यमंत्री पद से हटने के बाद भी Nitish Kumar का राजनीतिक प्रभाव किस तरह कायम है, इसकी नई झलक शुक्रवार को तब देखने को मिली जब मुख्यमंत्री सचिवालय में तैनात विशेष कार्य पदाधिकारी (ओएसडी) कौशलेंद्र कुमार को स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार का आप्त सचिव यानी प्राइवेट सेक्रेटरी नियुक्त कर दिया गया।
इस फैसले ने बिहार की राजनीति में एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या राज्य की सत्ता संरचना में अब भी “नीतीश मॉडल” ही प्रभावी है, भले ही मुख्यमंत्री की कुर्सी पर कोई और बैठा हो।
सीएम सचिवालय से सीधे निशांत कैंप में पहुंचे अधिकारी कौशलेंद्र कुमार
बिहार प्रशासनिक सेवा के अधिकारी हैं और अब तक मुख्यमंत्री सचिवालय में ओएसडी के रूप में कार्यरत थे। सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार उनकी सेवाएं मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग को सौंपते हुए उन्हें स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार का निजी सचिव नियुक्त किया गया है।
दिलचस्प बात यह है कि इससे पहले भी मुख्यमंत्री सचिवालय में लंबे समय तक तैनात रहे 2005 बैच के आईएएस अधिकारी कुमार रवि को स्वास्थ्य विभाग का सचिव बनाया गया था। यानी अब स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार के विभाग में दो ऐसे अधिकारी अहम जिम्मेदारी संभाल रहे हैं जो लंबे समय तक सीधे नीतीश कुमार के प्रशासनिक ढांचे का हिस्सा रहे।
क्या यह सिर्फ प्रशासनिक फेरबदल है या सत्ता का नया संकेत?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह महज सामान्य प्रशासनिक तबादला नहीं बल्कि सत्ता के भीतर शक्ति संतुलन का बड़ा संकेत है।
विश्लेषकों के अनुसार, मुख्यमंत्री पद छोड़ने के बाद भी नीतीश कुमार अपनी राजनीतिक विरासत और प्रशासनिक पकड़ को कमजोर नहीं होने देना चाहते। स्वास्थ्य जैसे बड़े और संवेदनशील विभाग में अपने भरोसेमंद अधिकारियों की तैनाती इसी रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है।राजनीतिक टिप्पणीकारों का कहना है कि बिहार में पहली बार ऐसा माहौल बन रहा है जहां सत्ता की औपचारिक कमान एक तरफ दिखाई दे रही है, लेकिन प्रशासनिक और राजनीतिक प्रभाव का केंद्र कहीं और महसूस किया जा रहा है।
निशांत कुमार की बढ़ती राजनीतिक भूमिका
एनडीए सरकार के गठन के बाद जब निशांत कुमार को स्वास्थ्य मंत्री बनाया गया था, तभी से यह चर्चा शुरू हो गई थी कि बिहार की राजनीति में उन्हें धीरे-धीरे बड़ी भूमिका देने की तैयारी हो रही है।अब लगातार मुख्यमंत्री सचिवालय से जुड़े भरोसेमंद अधिकारियों की उनके विभाग में तैनाती ने इस चर्चा को और तेज कर दिया है।
विपक्ष इसे “सिस्टमेटिक पावर ट्रांसफर” बता रहा है।राजनीतिक जानकारों का कहना है कि बिहार की राजनीति में परिवारवाद के आरोपों से हमेशा दूरी बनाने वाले नीतीश कुमार अब अपने बेटे को प्रशासनिक और राजनीतिक रूप से स्थापित करने की दिशा में बढ़ते दिखाई दे रहे हैं।
विपक्ष का हमला — “रिमोट कंट्रोल सरकार”
Rashtriya Janata Dal और अन्य विपक्षी दलों ने इस नियुक्ति को लेकर सरकार पर निशाना साधा है। विपक्ष का आरोप है कि बिहार में “रिमोट कंट्रोल शासन” चल रहा है और प्रशासनिक मशीनरी को एक खास राजनीतिक परिवार के इर्द-गिर्द केंद्रित किया जा रहा है।कुछ विपक्षी नेताओं ने सवाल उठाया कि आखिर मुख्यमंत्री सचिवालय के महत्वपूर्ण अधिकारियों को लगातार एक ही मंत्री के विभाग में क्यों भेजा जा रहा है। विपक्ष का कहना है कि इससे प्रशासनिक निष्पक्षता पर सवाल खड़े होते हैं।
हालांकि सत्तारूढ़ गठबंधन का कहना है कि अधिकारियों की तैनाती उनकी कार्यक्षमता और अनुभव के आधार पर की जाती है, न कि राजनीतिक समीकरणों के आधार पर।
बिहार सरकार का पक्ष
सरकारी सूत्रों का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग राज्य का सबसे महत्वपूर्ण विभागों में से एक है और वहां अनुभवी तथा भरोसेमंद अधिकारियों की आवश्यकता है।सरकार का तर्क है कि मुख्यमंत्री सचिवालय में कार्य कर चुके अधिकारियों को प्रशासनिक समन्वय और नीति क्रियान्वयन का व्यापक अनुभव होता है, इसलिए उन्हें महत्वपूर्ण विभागों में जिम्मेदारी देना स्वाभाविक प्रशासनिक प्रक्रिया है।
शिक्षाविदों और कानूनविदों की राय
प्रशासनिक मामलों के जानकारों का कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में मंत्रियों को अपने भरोसेमंद अधिकारियों के साथ काम करने का अधिकार होता है। लेकिन जब लगातार एक ही राजनीतिक परिवार से जुड़े नेताओं के इर्द-गिर्द अधिकारियों की नियुक्तियां बढ़ती हैं तो राजनीतिक संदेश स्वतः निकलने लगते हैं।कुछ कानूनविदों ने कहा कि जब तक नियुक्तियां नियमों और सेवा शर्तों के अनुरूप हैं, तब तक उन्हें कानूनी रूप से चुनौती देना कठिन होगा।
लेकिन राजनीतिक दृष्टि से ऐसे फैसले सत्ता के भीतर प्रभाव और नियंत्रण के संकेत अवश्य देते हैं।अन्य मंत्रियों को भी मिले निजी सचिवसामान्य प्रशासन विभाग ने अन्य मंत्रियों के लिए भी नए आप्त सचिवों की नियुक्ति की है।पुरुषोत्तम कुमार को विज्ञान, प्रावैधिकी एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री शीला मंडल का आप्त सचिव बनाया गया है।मुजफ्फरपुर के जिला परिवहन पदाधिकारी सत्येंद्र यादव को सहकारिता मंत्री राम कृपाल यादव का निजी सचिव नियुक्त किया गया है।
वहीं दुर्गेश कुमार को आपदा प्रबंधन मंत्री रत्नेश सदा के साथ लगाया गया है।इसके अलावा रिजवान फिरदौश कुरैशी को अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री जमा खान का पर्सनल सेक्रेटरी बनाया गया है।
बिहार की राजनीति में नया अध्याय?
बिहार की राजनीति लंबे समय से व्यक्तित्व आधारित नेतृत्व के इर्द-गिर्द घूमती रही है। लालू यादव के बाद तेजस्वी यादव और अब नीतीश कुमार के बाद निशांत कुमार की बढ़ती सक्रियता को उसी राजनीतिक परंपरा की अगली कड़ी के रूप में देखा जा रहा है।
फिलहाल इतना तय है कि स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार केवल विभागीय मंत्री भर नहीं रह गए हैं। उनके इर्द-गिर्द जिस तरह प्रशासनिक ढांचा मजबूत किया जा रहा है, उसने बिहार की सत्ता राजनीति में भविष्य के बड़े संकेत दे दिए हैं।
