बी के झा
NSK

नई दिल्ली/ हिंगोली ( महाराष्ट्र ), 24 मई
देश की डिजिटल राजनीति में पिछले कुछ दिनों से अचानक उभरे एक नाम — ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ — ने सत्ता, सोशल मीडिया और युवाओं की नाराजगी के बीच ऐसी बहस छेड़ दी है, जिसने पूरे राजनीतिक तंत्र को असहज कर दिया है। अब इस विवाद ने नया मोड़ ले लिया है। पार्टी की आधिकारिक वेबसाइट बंद कर दी गई है, एक्स अकाउंट भारत में पहले ही प्रतिबंधित हो चुका है और संस्थापक Abhijeet Deepke के घर के बाहर पुलिस तैनात कर दी गई है। इंटरनेट पर मीम संस्कृति और युवा असंतोष से जन्मी यह मुहिम अब अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता बनाम सरकारी नियंत्रण की राष्ट्रीय बहस में बदलती दिखाई दे रही है।
वेबसाइट भी बंद, ‘तानाशाही’ का आरोप‘
कॉकरोच जनता पार्टी’ यानी CJP के संस्थापक Abhijeet Deepke ने दावा किया कि उनकी आधिकारिक वेबसाइट ‘cockroachjantaparty.org’ को बंद कर दिया गया है। इससे पहले पार्टी का एक्स अकाउंट भारत में ब्लॉक किया जा चुका था।दीपके ने सोशल मीडिया पर नाराजगी जताते हुए इसे “तानाशाही” करार दिया। उनका दावा है कि इस वेबसाइट के जरिए करीब 10 लाख युवाओं ने खुद को रजिस्टर किया था।
उन्होंने आरोप लगाया कि वेबसाइट पर चलाए गए एक अभियान में लगभग 6 लाख लोगों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री Dharmendra Pradhan के इस्तीफे की मांग की थी। यह अभियान कथित तौर पर नीट पेपर लीक विवाद को लेकर चलाया गया था।
दीपके ने अपने संदेश में लिखा,“सरकार इतनी डरी हुई क्यों है?
यह रवैया युवाओं की आंखें खोल रहा है। हम नया प्लेटफॉर्म बनाएंगे… क्योंकि कॉकरोच कभी मरते नहीं हैं।”सोशल मीडिया पर विस्फोटक उभार सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि कुछ ही दिनों में ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ का इंस्टाग्राम अकाउंट विस्फोटक तरीके से लोकप्रिय हो गया। शनिवार तक पार्टी के इंस्टाग्राम फॉलोअर्स 2.2 करोड़ से अधिक बताए गए, जो कई राष्ट्रीय राजनीतिक दलों के सोशल मीडिया आधार से भी ज्यादा हैं।तुलना की जाए तो भाजपा के इंस्टाग्राम पर लगभग 92 लाख और कांग्रेस के करीब 1.34 करोड़ फॉलोअर्स बताए जा रहे हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह आंकड़ा सिर्फ डिजिटल लोकप्रियता नहीं, बल्कि व्यवस्था के प्रति युवाओं में बढ़ते असंतोष और व्यंग्यात्मक राजनीति के उभार का संकेत भी है।
पुलिस तैनात, सुरक्षा या निगरानी?
महाराष्ट्र के हिंगोली जिले में Abhijeet Deepke के घर के बाहर पुलिस तैनात किए जाने से विवाद और गहरा गया है।पुलिस उपायुक्त पंकज अतुलकर ने कहा कि लोगों में CJP और उसके संस्थापक को लेकर काफी उत्सुकता है, इसलिए किसी अप्रिय घटना को रोकने के लिए सुरक्षा व्यवस्था की गई है। उन्होंने बताया कि दीपके फिलहाल अमेरिका में पढ़ाई कर रहे हैं।
हालांकि विपक्षी दलों और कुछ सामाजिक संगठनों ने इसे केवल सुरक्षा नहीं, बल्कि “डर का माहौल बनाने की कोशिश” बताया है।
जान से मारने की धमकी का दावा
इस पूरे घटनाक्रम के बीच Abhijeet Deepke ने दावा किया कि उन्हें जान से मारने की धमकियां भी मिली हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर कथित धमकी भरे संदेश का स्क्रीनशॉट साझा किया था।इसके बाद समर्थकों में आक्रोश बढ़ गया और सोशल मीडिया पर विरोध प्रदर्शन की चर्चाएं शुरू हो गईं। हालांकि दीपक ने अपने समर्थकों से संयम बरतने की अपील की।
उन्होंने कहा,“सरकार सिर्फ एक गलती का इंतजार कर रही है ताकि पूरे आंदोलन को बदनाम किया जा सके। हम सभी समर्थकों से शांति बनाए रखने की अपील करते हैं।
”आखिर क्यों चर्चा में आई ‘कॉकरोच जनता पार्टी’?
दरअसल, यह पूरा विवाद उस समय तेज हुआ जब भारत के मुख्य न्यायाधीश Surya Kant की युवाओं को लेकर की गई एक टिप्पणी सोशल मीडिया पर वायरल हो गई। इसके बाद इंटरनेट पर व्यंग्य, मीम्स और डिजिटल अभियानों की बाढ़ आ गई।
इसी माहौल में ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ तेजी से उभरी। इस मंच ने खुद को “व्यवस्था से निराश युवाओं की आवाज” के रूप में पेश किया।‘कॉकरोच’ शब्द को यहां प्रतीक के तौर पर इस्तेमाल किया गया — ऐसा जीव जो हर हाल में जीवित रहता है। पार्टी के समर्थक खुद को “कॉकरोच” कहकर संबोधित करने लगे।
क्या यह नई डिजिटल राजनीति की शुरुआत है?
विशेषज्ञ मानते हैं कि यह मामला केवल एक सोशल मीडिया अकाउंट या वेबसाइट बंद होने का नहीं, बल्कि भारत में उभरती नई डिजिटल राजनीति का संकेत है।राजनीतिक विश्लेषक प्रो. अच्युतानंद मिश्र कहते हैं,“आज का युवा पारंपरिक राजनीतिक दलों से भावनात्मक रूप से जुड़ा नहीं है। वह मीम, व्यंग्य और डिजिटल अभियानों के जरिए अपनी नाराजगी व्यक्त कर रहा है। ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ उसी मानसिकता की उपज है।
”वहीं मीडिया अध्ययन विशेषज्ञ डॉ. शालिनी वर्मा मानती हैं कि सरकारों के सामने सबसे बड़ी चुनौती अब सड़कों पर होने वाला आंदोलन नहीं, बल्कि इंटरनेट पर बनने वाला नैरेटिव है।
लोकतंत्र, व्यंग्य और डिजिटल नियंत्रण की बहस
इस पूरे विवाद ने कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं—क्या सोशल मीडिया आधारित व्यंग्यात्मक राजनीतिक अभियान वास्तव में व्यवस्था के लिए चुनौती बनते जा रहे हैं?
क्या डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बढ़ती सरकारी कार्रवाई अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर बहस को और तेज करेगी?
और सबसे बड़ा सवाल—
क्या इंटरनेट की नई पीढ़ी अब पारंपरिक राजनीति के बाहर अपनी अलग राजनीतिक भाषा गढ़ रही है?
फिलहाल ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ की वेबसाइट बंद है, सोशल मीडिया अकाउंट्स पर कार्रवाई हो चुकी है, लेकिन जिस तरह यह आंदोलन कुछ ही दिनों में करोड़ों युवाओं तक पहुंचा, उसने साफ कर दिया है कि डिजिटल युग में राजनीति अब सिर्फ मंचों और रैलियों से नहीं, बल्कि मीम्स, मोबाइल स्क्रीन और वायरल नैरेटिव से भी तय होगी।
