देर आए दुरुस्त आए: पहले रार फिर क्यों उमड़ा प्यार? महागठबंधन में कैसे बनी बात — पढ़िए इनसाइड स्टोरी

बी के झा

NSK

पटना / नई दिल्ली, 23 अक्टूबर 2025

बिहार विधानसभा चुनाव के बीच आज का दिन महागठबंधन के लिए ऐतिहासिक बन गया। कई दिनों तक चली खींचतान, मतभेद और सीट बंटवारे की जद्दोजहद के बाद आखिरकार आज उस अध्याय पर विराम लग गया, जिसने विपक्षी गठबंधन को भीतर से झकझोर रखा था।राजद नेता तेजस्वी यादव को सर्वसम्मति से मुख्यमंत्री पद का चेहरा और वीआईपी प्रमुख मुकेश सहनी को डिप्टी सीएम फेस घोषित कर महागठबंधन ने एकजुटता का संदेश दे दिया।लेकिन इस ऐलान के पीछे की कहानी उतनी ही दिलचस्प है जितना इसका नतीजा।

सुबह 11 बजे की जगह दोपहर में शुरू हुई प्रेस कांफ्रेंस — वजह थी सहनी की “शर्त”महागठबंधन ने प्रेस कांफ्रेंस का समय सुबह 11 बजे तय किया था।

मीडिया, कार्यकर्ता और नेता सब पटना के होटल चाणक्य में बेसब्री से इंतजार कर रहे थे।

तेजस्वी यादव को सीएम फेस बनाना लगभग तय हो चुका था, लेकिन तभी वीआईपी प्रमुख मुकेश सहनी ने अंतिम क्षणों में नया दांव फेंका —अगर मुझे उपमुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी नहीं दी गई, तो मैं चुनाव से अलग हो जाऊंगा।”यह बयान सुनते ही बैठक का माहौल बदल गया। कई नेताओं के माथे पर पसीना आ गया।लगभग दो घंटे तक चली मशक्कत के बाद अंततः कांग्रेस और आरजेडी ने सहनी की शर्त मान ली।और जब मंच से अशोक गहलोत ने घोषणा की —महागठबंधन की ओर से तेजस्वी यादव मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार होंगे और वीआईपी के मुकेश सहनी उपमुख्यमंत्री पद के चेहरे होंगे।”तो हॉल “तेजस्वी जिंदाबाद” और “मुकेश सहनी अमर रहें” के नारों से गूंज उठा।

सहनी की रणनीति — धमकी जिसने बना दी डील

44 वर्षीय मुकेश सहनी, जिन्हें कभी “सन ऑफ मल्लाह” कहा गया, इस बार राजनीतिक शतरंज की बिसात पर वह चाल चली जिसने सबको चौंका दिया।सहनी जानते थे कि उनके पास मल्लाह, निषाद और सहनी समुदाय का मजबूत कैडर है —जो बिहार के करीब 50 विधानसभा क्षेत्रों में निर्णायक भूमिका निभा सकता है।पहले उन्होंने 24 सीटों की मांग की थी, फिर समझौते के तहत 15 सीटों पर राजी हो गए।लेकिन उन्होंने अपनी सौदेबाज़ी यहीं खत्म नहीं की।राज्यसभा में एक और विधान परिषद में दो सीटों का वादा भी वीआईपी को दे दिया गया।

एक वरिष्ठ नेता ने दबी जुबान में कहा,सहनी ने मौका देखकर खेला है। उन्होंने गठबंधन की मजबूरी को अपनी ताकत बना लिया।”

गहलोत ने सुलझाया सारा पेंच

जब गठबंधन टूटने की कगार पर था, तभी कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अशोक गहलोत पटना पहुंचे। उन्होंने आरजेडी, कांग्रेस और वीआईपी के बीच घंटों बैठकर बातचीत की और कहा —अगर विपक्ष को जीत चाहिए तो उसे एक चेहरा चाहिए — और वो चेहरा तेजस्वी यादव हैं।

”गहलोत ने न सिर्फ मतभेद सुलझाए बल्कि यह भी तय कराया कि सहनी की प्रतिष्ठा बरकरार रखी जाए।

राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि अगर गहलोत पटना नहीं आते तो आज यह गठबंधन शायद टूट चुका होता।

तेजस्वी की परछाई भी गलत करेगी तो सजा दिलाऊंगा” — तेजस्वी यादव सीएम पद का चेहरा घोषित होने के फौरन बाद तेजस्वी यादव ने जो भाषण दिया,उसने महागठबंधन के कार्यकर्ताओं में जोश भर दिया।

उन्होंने कहा —तेजस्वी की परछाई भी अगर गलत काम करेगी तो उसे तेजस्वी सजा दिलाएगा।

हमारा संकल्प है — भ्रष्टाचार और अपराध पर कोई समझौता नहीं होगा।

उन्होंने एनडीए पर तीखा हमला बोलते हुए कहा —बीजेपी जंगलराज का डर दिखाती है, लेकिन आज बिहार में गोलियों की गूंज आम बात हो चुकी है।

70 हजार हत्याएं, अनगिनत रेप — क्या यही सुशासन है?

तेजस्वी ने कहा कि उनका लक्ष्य है “नया बिहार, विकसित बिहार”,जहां जाति और धर्म से ऊपर उठकर हर नागरिक की भागीदारी होगी।

“किसी माई के लाल में दम नहीं जो संविधान बदल सके

”तेजस्वी यादव ने कहा,किसी माई के लाल में दम नहीं जो संविधान को बदल सके,आरक्षण को खत्म करे या हिंदू-मुस्लिम दंगा कराए।बिहार एकजुट है, और अब विकास की राजनीति होगी।”

उन्होंने जोड़ा कि बिहार के लोग अगर 20 महीने का मौका दें,तो वे 20 साल के काम को पीछे छोड़ देंगे।

उन्होंने वादा किया —हर गरीब घर में सस्ता सिलेंडर देंगे, युवाओं को रोजगार देंगे,और माई-बहन योजना से महिलाओं को सशक्त बनाएंगे।”

एनडीए पर प्रहार — “नीतीश जी को सीएम क्यों नहीं घोषित कर पा रहे?”तेजस्वी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में तंज कसा —हमारे गठबंधन में सीएम और डिप्टी सीएम दोनों चेहरों की घोषणा हो चुकी है,लेकिन भाजपा अब तक नीतीश कुमार जी को अपना चेहरा घोषित नहीं कर पा रही।क्या अब नीतीश जी पर भरोसा नहीं रहा?

”तेजस्वी ने अमित शाह के बयान का जिक्र करते हुए कहा —जब गृह मंत्री खुद कहते हैं कि चुनाव बाद विधायक दल तय करेगा,तो इसका मतलब साफ है — नीतीश जी का राजनीतिक भविष्य अधर में है।”

राजनीतिक हलचल —

अब एनडीए की बारी राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि तेजस्वी का यह ऐलान एनडीए पर “सीधा दबाव” बनाने वाला कदम है।

एक वरिष्ठ शिक्षाविद ने कहा —अगर भाजपा अगले 24 घंटे में नीतीश कुमार को सीएम फेस घोषित नहीं करती,तो विपक्ष के आरोप सही साबित होंगे —और नीतीश कुमार की राजनीतिक यात्रा शायद अपने अंतिम दौर में पहुंच जाएगी।”

निष्कर्ष:

“रार के बाद प्यार” ने महागठबंधन को नया जीवन दियाजो गठबंधन कुछ दिन पहले टूटने की कगार पर था,आज वही गठबंधन पहले से ज्यादा मजबूती से एक मंच पर खड़ा दिखा।तेजस्वी और सहनी की जोड़ी को लेकर अब कहा जा रहा है —“युवा ऊर्जा और सामाजिक प्रतिनिधित्व” का यह मेल बिहार की सियासत में एक नया अध्याय लिख सकता है।महागठबंधन के समर्थक अब इसे “एकजुटता की जीत” बता रहे हैं,

जबकि एनडीए खेमे में बेचैनी साफ झलक रही है।

राजनीति के जानकार मानते हैं —यह सिर्फ चेहरों की घोषणा नहीं, बल्कि बिहार के सत्ता समीकरण में एक निर्णायक मोड़ है।

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