बी. के. झा
NSK

पटना / न ई दिल्ली, 28 अक्टूबर
बिहार की सियासत में जब राजनीति और ग्लैमर एक साथ मंच साझा करते हैं, तो बहसें भी दिलचस्प और तीखी हो जाती हैं।
भोजपुरी सिनेमा की चमक अब चुनावी गलियारों तक पहुँच चुकी है। इसी बीच छपरा से आरजेडी प्रत्याशी बने सुपरस्टार खेसारी लाल यादव के एक बयान ने नया तूफान खड़ा कर दिया है। उन्होंने पवन सिंह को “नचनिया” कहकर संबोधित किया, और यही शब्द अब चुनावी हवा में आग बन चुका है।इस बयान पर पवन सिंह की पत्नी और काराकाट सीट से निर्दलीय उम्मीदवार ज्योति सिंह का गुस्सा फूट पड़ा है।
ज्योति सिंह ने न सिर्फ खेसारी के बयान को अपमानजनक बताया, बल्कि सार्वजनिक रूप से अपने रिश्ते पर भी बेबाकी से बोलते हुए कहा —पवन सिंह मेरे पति थे, हैं और रहेंगे। मैं तलाक नहीं चाहती। मैं आज भी खुद को उनकी पत्नी मानती हूं, क्योंकि जब तक कोर्ट से कोई फैसला नहीं आता, वो मेरे जीवनसाथी हैं।
“कलाकारों को नचनिया कहना अपमान है” — ज्योति सिंह की फटकारन्यूज़18 को दिए इंटरव्यू में ज्योति सिंह ने खेसारी पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा —हर किसी का अपना प्रोफेशन होता है। पवन जी मेहनत करके यहां तक पहुंचे हैं। आप ऐसे किसी कलाकार को ‘नचनिया’ नहीं कह सकते। जो भीड़ आपको चुनावी मंचों पर चाहिए, वही कलाकार आपको जुटाकर देते हैं।
वही जनता का मनोरंजन करते हैं, तो उन्हीं का आप अपमान कैसे कर सकते हैं?”उन्होंने आगे कहा कि भोजपुरी कलाकारों को जनता दिल से चाहती है, और उनके गानों पर गांव-गांव में बच्चे तक नाचते हैं। ऐसे में उन्हें नीचा दिखाने की कोशिश निंदनीय है।अगर आप उन्हें नचनिया कहते हैं, तो आप तमाम कलाकारों का अपमान करते हैं — उन दर्शकों का भी जो प्यार से उनके गीत सुनते हैं।
“तलाक नहीं लेना चाहती, आज भी पवन जी के नाम से जानी जाती हूं”
ज्योति सिंह ने अपने वैवाहिक रिश्ते को लेकर जो बयान दिया, उसने राजनीति और सिनेमा दोनों जगत में हलचल मचा दी है। उन्होंने कहा —हमारे यहां शादी सिर्फ कानूनी बंधन नहीं, बल्कि आत्मिक संबंध है। जब तक कोर्ट का फैसला नहीं आता, पवन जी मेरे पति हैं।
मैं पूरी कोशिश करूंगी कि तलाक न हो। मैं पवन जी के नाम से जानी जाती हूं — यही मेरी पहचान है।”उनका यह बयान स्पष्ट करता है कि ज्योति सिंह राजनीति में चाहे जितनी आगे बढ़ें, लेकिन अपने निजी जीवन को लेकर उनका दृष्टिकोण पारंपरिक भारतीय नारी की तरह है — भावनात्मक, दृढ़ और परिवारनिष्ठ।
पवन-ज्योति-खेसारी: राजनीति में भावनाओं का त्रिकोणबिहार के इस चुनाव में जहां एक ओर पवन सिंह पावर स्टार की छवि के साथ जनभावनाओं को छूने की कोशिश में हैं, वहीं खेसारी लाल यादव सामाजिक मुद्दों के साथ जनता से जुड़ने की कोशिश कर रहे हैं।
लेकिन खेसारी का यह बयान उनकी छवि पर सवाल खड़े कर गया है।दूसरी ओर, ज्योति सिंह अपने व्यक्तिगत संघर्ष और आत्मसम्मान को राजनीतिक शालीनता से जोड़कर पेश कर रही हैं। उनकी यह बयानबाज़ी अब चुनावी मंचों की कहानी नहीं, बल्कि भावनाओं की दास्तान बन चुकी है।
निष्कर्ष:
भोजपुरी सिनेमा और बिहार की राजनीति में यह पहला मौका नहीं जब निजी रिश्तों और सार्वजनिक बयानों ने चर्चा का विषय बनाया हो। लेकिन इस बार “नचनिया” शब्द ने सिर्फ एक कलाकार का नहीं, बल्कि पूरी फिल्म इंडस्ट्री के सम्मान का सवाल खड़ा कर दिया है।और इस सियासी तूफान के बीच ज्योति सिंह का एक ही संदेश गूंज रहा है —सम्मान देना सीखिए, क्योंकि कलाकारों का अपमान जनता का अपमान है।”
