खरगे के बयान पर सियासी संग्राम: भाजपा ने किया तीखा पलटवार, कहा – “पीएफआई और मुस्लिम लीग की भाषा बोल रहे हैं कांग्रेस अध्यक्ष”

बी के झा

NSK

नई दिल्ली, 1 नवंबर

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के आरएसएस पर दिए बयान ने सियासी हलचल मचा दी है। भाजपा ने शुक्रवार को उनकी टिप्पणी की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि खरगे का बयान पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI), मुस्लिम लीग और जमीयत उलमा-ए-हिंद की भाषा से मेल खाता है। भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने प्रेस वार्ता में कहा कि “खरगे जी को देश का इतिहास और संघ का योगदान पढ़ लेना चाहिए, तभी उन्हें सच्चाई का अंदाज़ा होगा।

”भाजपा का पलटवार:पात्रा ने कहा, “

आज खरगे जी ने जिस तरह की भाषा आरएसएस के लिए इस्तेमाल की, वह विभाजनकारी संगठनों की शब्दावली जैसी है। कांग्रेस की मानसिकता अब पूरी तरह वामपंथी और सांप्रदायिक संगठनों के इशारे पर काम कर रही है।”

उन्होंने आगे कहा कि महात्मा गांधी, भीमराव आंबेडकर, जवाहरलाल नेहरू और इंदिरा गांधी तक — सभी ने समय-समय पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अनुशासन और राष्ट्रहित की भावना की सराहना की थी।

इतिहास के उदाहरणों से भाजपा का जवाब:

संबित पात्रा ने कहा, “1934 में वर्धा में महात्मा गांधी ने संघ शिविर का दौरा कर कहा था कि उन्हें संगठन में अस्पृश्यता के अभाव और अनुशासन देखकर खुशी हुई। 1939 में पुणे में डॉ. आंबेडकर ने भी संघ में जातीय समानता देखकर संतोष व्यक्त किया था।”

उन्होंने यह भी याद दिलाया कि 1962 के भारत-चीन युद्ध के बाद, तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने 1963 के स्वतंत्रता दिवस समारोह में संघ को आमंत्रित किया था। “यह इतिहास में दर्ज सच्चाई है कि संघ ने उस समारोह में शामिल होकर राष्ट्रीय एकता का परिचय दिया था,” पात्रा ने जोड़ा।

‘गांधी हत्या में संघ निर्दोष’ – भाजपा का दावा:भाजपा प्रवक्ता ने आगे कहा कि महात्मा गांधी की हत्या के मामले में कपूर आयोग और सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट कर दिया है कि आरएसएस का इससे कोई लेना-देना नहीं था।

“इतिहास गवाह है कि संघ राष्ट्रनिर्माण में योगदान देने वाला संगठन रहा है, न कि तोड़ने वाला,” पात्रा ने कहा।उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने नागपुर में संघ मुख्यालय जाकर संगठन की वैचारिक भूमिका की प्रशंसा की थी।

कांग्रेस पर विचार धारात्मक भ्रम का आरोप:भाजपा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस अब अपने वैचारिक आधार को खो चुकी है और किसी भी कीमत पर सांप्रदायिक ध्रुवीकरण की राजनीति कर रही है। संबित पात्रा ने कहा, “कांग्रेस अध्यक्ष को यह याद रखना चाहिए कि देश संघ के त्याग और सेवा भावना को जानता है। उन्हें विभाजन की भाषा नहीं, एकता की राजनीति करनी चाहिए।”

सियासी संकेत स्पष्ट:

खरगे के बयान ने एक बार फिर कांग्रेस और भाजपा के बीच वैचारिक टकराव को तेज कर दिया है। एक तरफ भाजपा संघ की ऐतिहासिक भूमिका और राष्ट्रसेवा का हवाला दे रही है, वहीं कांग्रेस अपने रुख पर कायम दिखाई दे रही है। चुनावी मौसम में यह बहस आने वाले दिनों में और गरमाने की पूरी संभावना है।

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