ईरान के बाद अब क्यूबा पर अमेरिकी दबाव! कैरेबियन में USS Nimitz की एंट्री से बढ़ी वैश्विक बेचैनी, ट्रंप के तेवर से नए टकराव के संकेत

बी के झा

NSK

वाशिंगटन/ नई दिल्ली, 21 मई

दुनिया की महाशक्ति अमेरिका एक बार फिर अपनी सैन्य शक्ति के प्रदर्शन के जरिए वैश्विक राजनीति का नया समीकरण गढ़ने में जुटा दिखाई दे रहा है। मध्य पूर्व में ईरान को लेकर बढ़ी आक्रामकता के बाद अब कैरेबियन क्षेत्र में अमेरिकी युद्धपोत USS Nimitz की तैनाती ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में हलचल मचा दी है।

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया बयान और अमेरिकी दक्षिणी कमान (Southcom) की सक्रियता को केवल “सैन्य अभ्यास” मानना शायद बड़ी भूल होगी।

रक्षा विशेषज्ञ इसे क्यूबा पर मनोवैज्ञानिक दबाव और लैटिन अमेरिका में अमेरिकी वर्चस्व की पुनर्स्थापना की रणनीति के रूप में देख रहे हैं।

कैरेबियन में शक्ति प्रदर्शन या युद्ध की तैयारी?

अमेरिकी नौसेना का सबसे शक्तिशाली एयरक्राफ्ट कैरियर USS Nimitz अपने स्ट्राइक ग्रुप के साथ कैरेबियन सागर में पहुंच चुका है। यह वही युद्धपोत है जिसने ताइवान स्ट्रेट, अरब की खाड़ी और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य अभियानों का नेतृत्व किया है। इसके साथ तैनात F/A-18E Super Hornet लड़ाकू विमान, EA-18G Growler इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर एयरक्राफ्ट और मिसाइल विध्वंसक USS Gridley यह संकेत दे रहे हैं कि अमेरिका केवल “निगरानी” नहीं बल्कि सामरिक दबदबा स्थापित करना चाहता है।

रक्षा मामलों के जानकारों का मानना है कि कैरेबियन क्षेत्र में इतनी बड़ी सैन्य मौजूदगी का सीधा संदेश क्यूबा, वेनेजुएला और अमेरिकी विरोधी धुरी वाले देशों को दिया जा रहा है। सामरिक विश्लेषक मानते हैं कि चीन और रूस के बढ़ते प्रभाव से चिंतित वॉशिंगटन अब लैटिन अमेरिका में अपनी खोती पकड़ मजबूत करना चाहता है।

ट्रंप का बयान और राजनीतिक संदेश

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने क्यूबा को लेकर जिस प्रकार का बयान दिया, उसने इस सैन्य तैनाती को और अधिक राजनीतिक बना दिया है। ट्रंप ने साफ कहा कि “हमारी नजर क्यूबा पर है।” अमेरिकी न्याय विभाग द्वारा क्यूबा के पूर्व राष्ट्रपति राउल कास्त्रो पर हत्या जैसे गंभीर आरोप लगाना भी महज कानूनी कार्रवाई नहीं बल्कि राजनीतिक दबाव की रणनीति माना जा रहा है।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, ट्रंप प्रशासन अमेरिकी चुनावी राजनीति में क्यूबा मूल के मतदाताओं को साधने की कोशिश कर रहा है। फ्लोरिडा जैसे महत्वपूर्ण राज्य में क्यूबा-अमेरिकी समुदाय का बड़ा प्रभाव है और ट्रंप हमेशा कठोर विदेश नीति को अपनी राजनीतिक ताकत के रूप में पेश करते रहे हैं।

विपक्षी दलों ने उठाए सवाल

अमेरिका के भीतर भी इस सैन्य सक्रियता को लेकर सवाल उठने लगे हैं। डेमोक्रेटिक नेताओं और मानवाधिकार संगठनों ने पूछा है कि क्या अमेरिका फिर से “कोल्ड वॉर मानसिकता” की ओर लौट रहा है?

विपक्षी नेताओं का कहना है कि कूटनीति की जगह सैन्य ताकत का इस्तेमाल वैश्विक तनाव को और बढ़ा सकता है।कुछ अमेरिकी सांसदों ने यह भी सवाल उठाया कि क्या व्हाइट हाउस कांग्रेस की अनुमति के बिना किसी बड़े सैन्य संघर्ष की जमीन तैयार कर रहा है?

उनका तर्क है कि ईरान, यूक्रेन और ताइवान के बाद अब क्यूबा मोर्चे पर तनाव अमेरिका की विदेश नीति को और आक्रामक बना देगा।

कानूनविदों की चेतावनी

अंतरराष्ट्रीय कानून के विशेषज्ञों का कहना है कि यदि अमेरिका केवल राजनीतिक मतभेदों के आधार पर किसी देश पर सैन्य दबाव बनाता है तो यह संयुक्त राष्ट्र चार्टर की भावना के विपरीत माना जा सकता है। अंतरराष्ट्रीय समुद्री क्षेत्र में युद्धपोतों की तैनाती कानूनी रूप से संभव जरूर है, लेकिन यदि इसका उद्देश्य राजनीतिक अस्थिरता पैदा करना हो तो वैश्विक संस्थाओं में इसका विरोध बढ़ सकता है।कानूनविद यह भी मानते हैं कि 1996 के विमान गिराने वाले मामले को दशकों बाद अचानक उठाना कूटनीतिक तनाव को बढ़ाने वाला कदम है। इससे अमेरिका-क्यूबा संबंध और अधिक खराब हो सकते हैं।

मार्को रुबियो की एंट्री और क्यूबा की राजनीति

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो का स्पेनिश भाषा में जारी संदेश भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। क्यूबा मूल के अमेरिकी नेता होने के कारण उनका बयान केवल विदेश नीति नहीं बल्कि भावनात्मक राजनीतिक संदेश भी है। उन्होंने क्यूबा सरकार को बिजली संकट और आर्थिक बदहाली के लिए जिम्मेदार ठहराया।

विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका अब “आर्थिक दबाव + सैन्य शक्ति + राजनीतिक नैरेटिव” के संयुक्त मॉडल पर काम कर रहा है। यानी जनता के असंतोष को अंतरराष्ट्रीय दबाव से जोड़कर क्यूबा सरकार को कमजोर करने की रणनीति अपनाई जा सकती है।

क्या दुनिया नए शीत युद्ध की ओर बढ़ रही है?

रूस-यूक्रेन युद्ध, चीन-अमेरिका तनाव, ईरान संकट और अब क्यूबा पर बढ़ती अमेरिकी सक्रियता ने दुनिया को नए भू-राजनीतिक ध्रुवीकरण की ओर धकेल दिया है। विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि यदि अमेरिका और उसके विरोधी देशों के बीच यह शक्ति प्रदर्शन जारी रहा, तो वैश्विक अस्थिरता और बढ़ सकती है।

कई रणनीतिक मामलों के जानकारों का मानना है कि कैरेबियन में USS Nimitz की मौजूदगी केवल सैन्य गतिविधि नहीं, बल्कि आने वाले समय की बड़ी भू-राजनीतिक पटकथा का शुरुआती संकेत है। अमेरिका शायद यह दिखाना चाहता है कि वह केवल एशिया या मध्य पूर्व ही नहीं, बल्कि अपने “पिछवाड़े” यानी लैटिन अमेरिका में भी किसी चुनौती को बर्दाश्त नहीं करेगा।

निष्कर्ष

क्यूबा के आसपास अमेरिकी सैन्य गतिविधि ने दुनिया को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या वॉशिंगटन एक साथ कई मोर्चों पर दबाव की राजनीति खेल रहा है। ट्रंप प्रशासन की आक्रामक विदेश नीति, सैन्य शक्ति का प्रदर्शन और राजनीतिक बयानबाजी आने वाले दिनों में वैश्विक तनाव को नई दिशा दे सकते हैं।

फिलहाल पूरी दुनिया की नजर कैरेबियन सागर पर टिकी है, जहां युद्धपोतों की हलचल केवल समुद्री गतिविधि नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय शक्ति संतुलन का संकेत बन चुकी है।

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