बांकीपुर में बदलाव की आहट या एग्जिट पोल का भ्रम? तीन सर्वे में प्रशांत किशोर को बढ़त, भाजपा के अभेद्य गढ़ पर संकट के संकेत; मतदान के दौरान भाजपा-जन सुराज आमने-सामने, आरजेडी रही अपेक्षाकृत शांत

बी के झा

NSK News

पटना, 30 जुलाई

बिहार की प्रतिष्ठित बांकीपुर विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव के मतदान के बाद आए विभिन्न एग्जिट पोल ने राज्य की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। तीन अलग-अलग सर्वे एजेंसियों ने जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर को बढ़त दिखाते हुए भाजपा के लंबे समय से कायम राजनीतिक वर्चस्व पर सवाल खड़े किए हैं।

हालांकि, चुनावी विशेषज्ञों का कहना है कि एग्जिट पोल केवल संभावित रुझान होते हैं और अंतिम फैसला मतगणना के बाद ही सामने आएगा।भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के इस्तीफे से रिक्त हुई इस सीट को पार्टी का सबसे मजबूत गढ़ माना जाता रहा है। नितिन नवीन लगातार पांच बार यहां से विधायक चुने गए। ऐसे में यदि एग्जिट पोल के अनुमान वास्तविक परिणामों में बदलते हैं, तो यह केवल एक सीट की हार नहीं बल्कि बिहार की राजनीति में बदलते सामाजिक और राजनीतिक समीकरणों का संकेत माना जाएगा।

तीन एग्जिट पोल में प्रशांत किशोर को बढ़त

जनमत पोल्स के अनुसार जन सुराज को 49 से 52 प्रतिशत वोट मिलने का अनुमान है, जबकि भाजपा के नीरज कुमार सिन्हा को 34 से 36 प्रतिशत वोट मिलने की संभावना जताई गई है। आरजेडी की रेखा गुप्ता को 9 से 10 प्रतिशत वोट मिलने का अनुमान व्यक्त किया गया है।

डीवी रिसर्च के सर्वे में भी प्रशांत किशोर को बढ़त दिखाई गई है। एजेंसी ने दावा किया कि मतदान के बाद 1580 मतदाताओं से बातचीत के आधार पर जन सुराज को 43 प्रतिशत, भाजपा को 39 प्रतिशत और आरजेडी को लगभग 15 प्रतिशत वोट मिलने का अनुमान तैयार किया गया।

वहीं पोल पंडित के एग्जिट पोल ने सबसे बड़ा दावा करते हुए प्रशांत किशोर को निर्णायक बढ़त के साथ रिकॉर्ड मतों से जीतने की संभावना व्यक्त की है। इस सर्वे में जन सुराज को 50 प्रतिशत से अधिक वोट मिलने तथा भाजपा के वोट प्रतिशत में गिरावट का अनुमान लगाया गया है।

मतदान के दौरान भाजपा और जन सुराज में तीखी टक्कर

मतदान के दिन राजनीतिक मुकाबला केवल वोटों तक सीमित नहीं रहा। मीठापुर, किदवईपुरी, सलीमपुर अहरा, जक्कनपुर, श्रीकृष्णपुरी और एएन कॉलेज मतदान केंद्र के आसपास भाजपा और जन सुराज के समर्थकों के बीच कई बार विवाद और नोकझोंक हुई। कुछ स्थानों पर धक्का-मुक्की तथा बोगस वोटिंग के आरोप भी लगे।

पुलिस और प्रशासन ने हस्तक्षेप कर सभी मामलों को नियंत्रित किया तथा मतदान प्रक्रिया जारी रखी।शाम को एएन कॉलेज बूथ पर विवाद बढ़ने के बाद स्वयं प्रशांत किशोर मौके पर पहुंचे और उन्होंने दावा किया कि इस बार बांकीपुर की जनता परिवर्तन के पक्ष में मतदान कर रही है।दिलचस्प तथ्य यह रहा कि पूरे मतदान के दौरान राष्ट्रीय जनता दल के कार्यकर्ता किसी बड़े विवाद या टकराव में शामिल नहीं दिखे।

राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि इस उपचुनाव में मुख्य मुकाबला भाजपा और जन सुराज के बीच सिमट गया था।

कम मतदान ने बढ़ाई राजनीतिक बेचैनी

बांकीपुर में लगभग 34 प्रतिशत मतदान हुआ, जो पिछले विधानसभा चुनाव की तुलना में लगभग पांच प्रतिशत कम बताया जा रहा है। कम मतदान ने सभी दलों की रणनीति और संगठन क्षमता पर सवाल खड़े किए हैं।

एक वरिष्ठ शिक्षाविद ने नाम प्रकाशित न करने की शर्त पर कहा,”आज बांकीपुर के मतदाताओं ने एक मौन संदेश दिया है। भाजपा के पारंपरिक समर्थकों की बड़ी संख्या मतदान केंद्र तक नहीं पहुंची। यह केवल चुनावी उदासीनता नहीं बल्कि संगठन और शासन दोनों के प्रति असंतोष का संकेत भी हो सकता है।

उन्होंने आगे कहा,”यदि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी कानून-व्यवस्था, बढ़ते अपराध और भ्रष्टाचार पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करने में अधिक सफल होते, तो भाजपा को इतनी कठिन चुनौती शायद नहीं मिलती।

शिक्षाविद का यह भी मत था कि यदि प्रशांत किशोर को सफलता मिलती है तो उसके पीछे केवल उनकी व्यक्तिगत रणनीति नहीं बल्कि राज्य सरकार के शासन को लेकर जनता की नाराजगी भी एक बड़ा कारण मानी जाएगी।उन्होंने यह भी दावा किया कि”राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा रही कि प्रशांत किशोर को विपक्ष के कुछ वर्गों, विशेषकर तेजस्वी यादव के समर्थकों की अप्रत्यक्ष सहानुभूति भी मिली।

हालांकि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और न ही संबंधित दलों ने इसकी आधिकारिक पुष्टि की है।

राजनीतिक विश्लेषकों की राय

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यदि एग्जिट पोल सही साबित होते हैं तो यह बिहार की राजनीति में तीसरे विकल्प के उभरने का संकेत होगा।विश्लेषकों के अनुसार,”प्रशांत किशोर ने चुनाव को भाजपा बनाम जन सुराज बना दिया, जिससे आरजेडी का पारंपरिक विपक्षी वोट आधार भी प्रभावित हुआ।”एक अन्य राजनीतिक विश्लेषक का कहना है,”यदि भाजपा अपना सबसे सुरक्षित शहरी गढ़ भी नहीं बचा पाती है, तो यह संगठन और सरकार—दोनों के लिए गंभीर आत्ममंथन का विषय होगा।

कानूनविदों की प्रतिक्रिया

संवैधानिक मामलों के जानकारों का कहना है कि मतदान के दौरान हुई छिटपुट झड़पें लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए चिंता का विषय हैं।उनके अनुसार,”चुनाव आयोग और स्थानीय प्रशासन की सबसे बड़ी जिम्मेदारी यह सुनिश्चित करना है कि प्रत्येक मतदाता भयमुक्त वातावरण में मतदान कर सके। जहां भी विवाद हुए, वहां त्वरित हस्तक्षेप सकारात्मक संकेत है, लेकिन भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकना आवश्यक होगा।

समाजसेवियों और नागरिक संगठनों की प्रतिक्रिया

कई सामाजिक संगठनों ने कम मतदान प्रतिशत पर चिंता व्यक्त की।उनका कहना है,”लोकतंत्र की मजबूती केवल चुनाव कराने से नहीं बल्कि अधिकतम मतदान सुनिश्चित करने से होती है। यदि शिक्षित और शहरी मतदाता मतदान से दूरी बना रहे हैं तो यह लोकतंत्र के लिए गंभीर संकेत है।”कुछ संस्थाओं ने मतदाता जागरूकता अभियान को और व्यापक बनाने की मांग भी की।

भाजपा समर्थक खेमे की प्रतिक्रिया

भाजपा समर्थक नेताओं का कहना है कि एग्जिट पोल अंतिम परिणाम नहीं होते।उनके अनुसार,”बांकीपुर भाजपा का मजबूत गढ़ रहा है। मतदान प्रतिशत कम होने का अर्थ हार नहीं होता। अंतिम परिणाम आने तक किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।”उन्होंने यह भी कहा कि पिछले कई चुनावों में एग्जिट पोल वास्तविक परिणामों से अलग साबित हुए हैं और इस बार भी ऐसा हो सकता है।

विपक्षी दलों की प्रतिक्रिया

विपक्षी दलों ने एग्जिट पोल को जनता में बदलाव की इच्छा का संकेत बताया।विपक्षी नेताओं का कहना है,”यदि बांकीपुर जैसी सीट पर भाजपा संघर्ष करती दिखाई दे रही है तो यह जनता के मन में बढ़ती असंतुष्टि का परिणाम है।

“जन सुराज के समर्थकों ने इसे वैकल्पिक राजनीति की स्वीकार्यता बताया, जबकि आरजेडी नेताओं का कहना है कि अंतिम फैसला ईवीएम खुलने के बाद ही होगा।अंतिम फैसला 3 अगस्त को

राजनीतिक इतिहास गवाह है कि कई बार एग्जिट पोल और वास्तविक चुनाव परिणामों में बड़ा अंतर देखने को मिला है। इसलिए बांकीपुर में अगला विधायक कौन होगा, इसका वास्तविक उत्तर 3 अगस्त को मतगणना के बाद ही मिलेगा।फिलहाल इतना स्पष्ट है कि इस उपचुनाव ने बिहार की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। यदि एग्जिट पोल सही साबित होते हैं तो यह केवल एक सीट का परिणाम नहीं होगा, बल्कि बिहार की राजनीतिक दिशा बदलने वाले घटनाक्रम के रूप में भी देखा जा सकता है।

वहीं यदि भाजपा यह सीट बचाने में सफल रहती है, तो एग्जिट पोल की विश्वसनीयता पर एक बार फिर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा होगा।

(नोट: इस रिपोर्ट में उल्लिखित एग्जिट पोल विभिन्न सर्वे एजेंसियों के अनुमान हैं। आधिकारिक चुनाव परिणाम 3 अगस्त को मतगणना के बाद ही घोषित होंगे।)

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