बी के झा
NSK


दरभंगा/ सीतामढ़ी/ पटना, 13 मई
बिहार में अपराधियों का दुस्साहस अब इस हद तक पहुंच चुका है कि दिनदहाड़े सड़क पर लूट, गोलीबारी और मासूम बच्चियों के साथ दरिंदगी जैसी घटनाएं आम होती जा रही हैं। दरभंगा और सीतामढ़ी से सामने आई दो दिल दहला देने वाली घटनाओं ने एक बार फिर राज्य की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विपक्ष ने इसे “जंगलराज की वापसी” बताते हुए सरकार को कठघरे में खड़ा किया है, जबकि आम लोगों में भय और आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है।
दरभंगा में इंसानियत की कीमत मौत: चेन स्नेचर को पकड़ने गए चाय दुकानदार की गोली मारकर हत्या
दरभंगा शहर बुधवार सुबह गोलियों की आवाज से दहल उठा। विश्वविद्यालय थाना क्षेत्र के रामबाग गेट पर बाइक सवार अपराधियों ने पहले एक राहगीर की सोने की चेन झपटने की कोशिश की और जब एक चाय दुकानदार ने हिम्मत दिखाते हुए बदमाशों को पकड़ना चाहा, तो अपराधियों ने उसके सीने में गोली उतार दी।मृतक की पहचान हुसैन चौक निवासी श्रवण कुमार के रूप में हुई है, जो राज परिसर के समीप चाय की दुकान चलाकर अपने परिवार का भरण-पोषण करता था।
बताया जाता है कि सुबह करीब आठ बजे रामबाग गेट निवासी सोनू सिंह पैदल जा रहे थे, तभी बिना नंबर की बाइक पर आए दो अपराधियों ने उनके गले से चेन छीनने का प्रयास किया। छीना-झपटी के दौरान चेन का आधा हिस्सा सड़क पर गिर गया। जैसे ही पीछे बैठे बदमाश ने उसे उठाने की कोशिश की, पीड़ित ने उसे पकड़ लिया और शोर मचाने लगे।इसी बीच पास में मौजूद चाय दुकानदार श्रवण कुमार मदद के लिए दौड़ पड़े। उन्होंने अपराधियों को दबोचने की कोशिश की, लेकिन अपराधियों ने कानून और इंसानियत दोनों को ठेंगा दिखाते हुए फायरिंग शुरू कर दी। एक गोली सीधे श्रवण के सीने में लगी। गंभीर हालत में उन्हें डीएमसीएच ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।
घटना के बाद स्थानीय लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। आक्रोशित लोगों ने सड़क जाम कर प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। लोगों का कहना था कि शहर में अपराधियों का मनोबल इतना बढ़ चुका है कि अब कोई भी सुरक्षित नहीं है।
एसडीपीओ राजीव कुमार ने बताया कि अपराधी हसनचक की ओर से आए थे और घटना के बाद कैदराबाद की दिशा में फरार हो गए। पुलिस सीसीटीवी फुटेज और स्थानीय इनपुट के आधार पर छापेमारी कर रही है।
डेढ़ महीने में दूसरी बड़ी वारदात, फिर सवालों के घेरे में पुलिस
दरभंगा में यह कोई पहली बड़ी आपराधिक घटना नहीं है। इससे पहले 3 अप्रैल को बड़ा बाजार स्थित प्रेम ज्वेलर्स में हथियारबंद लुटेरों ने दिनदहाड़े धावा बोलकर दो करोड़ रुपये से अधिक के गहने और नकदी लूट ली थी। उस घटना के बाद भी पुलिस के हाथ अब तक खाली हैं। लगातार हो रही घटनाओं ने यह संकेत दे दिया है कि अपराधियों के भीतर पुलिस और कानून का भय तेजी से समाप्त हो रहा है।
सीतामढ़ी में शर्मनाक वारदात: 11 वर्षीय बच्ची से बीच सड़क पर दुष्कर्म
उधर, सीतामढ़ी से आई खबर ने पूरे बिहार को झकझोर कर रख दिया। यहां एक 11 वर्षीय मासूम बच्ची के साथ बीच सड़क पर दुष्कर्म की घटना ने इंसानियत को शर्मसार कर दिया। घटना के बाद पूरे शहर में गुस्से का विस्फोट हो गया।जानकारी के अनुसार, मंगलवार देर रात बच्ची अपनी नानी के घर जा रही थी। इसी दौरान नशे में धुत एक युवक ने उसे अकेला पाकर जबरन दुष्कर्म किया और मौके से फरार हो गया। बच्ची की चीख सुनकर आसपास के लोग पहुंचे, लेकिन तब तक आरोपी भाग चुका था।सुबह होते ही लोगों का गुस्सा सड़कों पर फूट पड़ा। जगह-जगह टायर जलाकर प्रदर्शन किया गया।
उग्र भीड़ ने कुछ स्थानों पर सब्जी और फलों के ठेलों में आग लगा दी। करीब चार घंटे तक शहर में तनाव और अफरातफरी का माहौल बना रहा। प्रशासन को हालात संभालने के लिए भारी पुलिस बल तैनात करना पड़ा।पुलिस ने पीड़िता को इलाज के लिए अस्पताल भेजते हुए घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए हैं। पीड़िता की मां के बयान पर प्राथमिकी दर्ज कर विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया है। सदर एसडीपीओ वन राजीव कुमार सिंह के नेतृत्व में पुलिस लगातार आरोपी की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी कर रही है।
आरोपी की पहचान पीड़ित परिवार के परिचित के रूप में हुई है और वह घटना के बाद से फरार बताया जा रहा है।
विपक्ष का हमला: “बुलडोजर की बातें, लेकिन जनता असुरक्षित
”इन दोनों घटनाओं को लेकर राजनीतिक माहौल भी गर्म हो गया है। आरजेडी सुप्रीमो ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि सरकार केवल बुलडोजर कार्रवाई की बातें करती है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि बिहार में न बेटियां सुरक्षित हैं और न आम नागरिक।उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में अपराधियों और भ्रष्ट तंत्र का गठजोड़ हावी हो चुका है। “
बिहार में सरकारी अधिकारियों से लेकर अपराधियों तक का आतंक है। जनता भय और असुरक्षा के माहौल में जी रही है,” उन्होंने कहा।
क्या फिर डर के साये में लौट रहा बिहार?
दरभंगा में एक गरीब चाय दुकानदार की बहादुरी की कीमत उसकी जान बन गई, तो सीतामढ़ी में एक मासूम की अस्मिता तार-तार हो गई। ये घटनाएं सिर्फ अपराध की खबरें नहीं हैं, बल्कि उस भयावह सच्चाई का आईना हैं जिसमें आम नागरिक खुद को असहाय महसूस करने लगा है।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर कब तक बिहार की सड़कों पर अपराधियों का राज चलता रहेगा?
कब तक मासूम बेटियां दरिंदगी का शिकार होती रहेंगी?
और कब तक अपराधियों के सामने कानून बेबस नजर आता रहेगा?राज्य की जनता अब जवाब चाहती है — सिर्फ बयान नहीं, बल्कि ऐसा कठोर और प्रभावी कदम, जिससे अपराधियों के भीतर कानून का डर दोबारा पैदा हो सके।
