बी के झा
NSK

पटना, 13 मई
Samrat Choudhary की अध्यक्षता में बुधवार को हुई बिहार कैबिनेट की अहम बैठक में लिए गए फैसलों ने यह स्पष्ट संकेत दे दिया कि राज्य सरकार अब एक साथ कई मोर्चों पर बड़ा दांव खेलने की तैयारी में है। कर्मचारियों को महंगाई भत्ते का तोहफा, पांच जिलों में ग्रामीण एसपी के नए पद, 72 हजार करोड़ रुपये से अधिक के ऋण की स्वीकृति, इलेक्ट्रिक वाहन नीति में बड़े बदलाव, वैशाली में राष्ट्रीय खाद्य प्रौद्योगिकी संस्थान की स्थापना और “बिहार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मिशन” जैसे फैसलों ने राज्य की प्रशासनिक और आर्थिक दिशा को लेकर नई बहस छेड़ दी है।करीब 40 मिनट तक चली इस महत्वपूर्ण बैठक में दोनों उपमुख्यमंत्री सहित कैबिनेट के लगभग सभी मंत्री मौजूद रहे।
कुल 19 एजेंडों पर मुहर लगी, जिनमें कर्मचारियों, उद्योग, तकनीक, पर्यावरण, शिक्षा और कानून-व्यवस्था से जुड़े कई बड़े निर्णय शामिल हैं।कर्मचारियों को राहत, महंगाई भत्ते में बढ़ोतरीराज्य सरकार ने सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को बड़ी राहत देते हुए महंगाई भत्ते (डीए) में वृद्धि को मंजूरी दे दी। सप्तम वेतनमान के तहत अब कर्मचारियों को 58 प्रतिशत के बजाय 60 प्रतिशत डीए मिलेगा।
वहीं छठे वेतनमान के कर्मचारियों का डीए 257 प्रतिशत से बढ़ाकर 262 प्रतिशत तथा पांचवें वेतनमान वालों का भत्ता 474 प्रतिशत से बढ़ाकर 483 प्रतिशत कर दिया गया है।सरकार ने स्पष्ट किया कि यह वृद्धि 1 जनवरी 2026 से प्रभावी मानी जाएगी।वित्तीय मामलों के जानकारों का कहना है कि बढ़ती महंगाई और जीवनयापन की लागत को देखते हुए यह निर्णय लाखों कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को सीधी राहत देगा। हालांकि इसके साथ राज्य पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ भी बढ़ेगा।
72 हजार करोड़ का ऋण: विकास की मजबूरी या आर्थिक जोखिम?
कैबिनेट ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए बाजार ऋण सहित कुल 72,901 करोड़ रुपये से अधिक की ऋण उगाही को मंजूरी दी है। इसमें लगभग 64,141 करोड़ रुपये बाजार से ऋण के रूप में जुटाए जाएंगे।राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बिहार जैसे संसाधन-वंचित लेकिन तेजी से विकास की ओर बढ़ते राज्य के लिए बड़े पैमाने पर उधारी अब लगभग अनिवार्य होती जा रही है। सरकार बुनियादी ढांचे, उद्योग, शिक्षा, स्वास्थ्य और तकनीकी परियोजनाओं के लिए भारी निवेश करना चाहती है।
हालांकि विपक्ष ने इस फैसले पर सवाल उठाए हैं। विपक्षी दलों का कहना है कि सरकार विकास के नाम पर राज्य को कर्ज के बोझ तले दबा रही है। विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया कि यदि ऋण का उपयोग उत्पादक क्षेत्रों में नहीं हुआ तो आने वाले वर्षों में राज्य की वित्तीय स्थिति पर गंभीर दबाव पड़ सकता है।
पांच जिलों में ग्रामीण एसपी के पद कानून-व्यवस्था को मजबूत करने के उद्देश्य से सरकार ने पूर्वी चंपारण, समस्तीपुर, मधुबनी, वैशाली और सिवान में ग्रामीण पुलिस अधीक्षक (एसपी ग्रामीण) के पांच नए पदों के सृजन को मंजूरी दी है।पुलिस प्रशासन के जानकारों का कहना है कि बिहार में तेजी से बढ़ते शहरीकरण और ग्रामीण इलाकों में अपराध की बदलती प्रकृति को देखते हुए यह फैसला प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अलग ग्रामीण एसपी की नियुक्ति से पुलिस निगरानी मजबूत होगी और सीमावर्ती तथा संवेदनशील जिलों में कानून-व्यवस्था पर बेहतर नियंत्रण स्थापित किया जा सकेगा।
वैशाली में NIFTEM: बिहार के युवाओं के लिए नया अवसर
उद्योग और तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए वैशाली जिले में 100 एकड़ भूमि पर राष्ट्रीय खाद्य प्रौद्योगिकी उद्यमिता एवं प्रबंधन संस्थान (NIFTEM) की स्थापना को मंजूरी दी गई है।
शिक्षाविदों का कहना है कि यह संस्थान बिहार के कृषि और खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र को नई दिशा दे सकता है। बिहार लंबे समय से कृषि प्रधान राज्य रहा है, लेकिन खाद्य प्रसंस्करण उद्योग की कमी के कारण किसानों को पर्याप्त लाभ नहीं मिल पाता।
विशेषज्ञों के अनुसार NIFTEM की स्थापना से युवाओं को आधुनिक तकनीकी शिक्षा, फूड टेक्नोलॉजी, एग्री-बिजनेस और उद्यमिता के क्षेत्र में नए अवसर मिलेंगे।
बिहटा में डेयरी प्लांट, उद्योग को नई गति
पटना के बिहटा में डेयरी प्लांट की स्थापना को मंजूरी देकर सरकार ने यह संकेत दिया है कि वह कृषि आधारित उद्योगों को नई ऊर्जा देना चाहती है।आर्थिक मामलों के जानकारों का कहना है कि बिहार दुग्ध उत्पादन में तेजी से आगे बढ़ रहा है और आधुनिक डेयरी इंफ्रास्ट्रक्चर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत कर सकता है।
इलेक्ट्रिक वाहन योजना: पर्यावरण और रोजगार दोनों पर फोकस
कैबिनेट ने “मुख्यमंत्री बिहार पर्यावरण अनुकूल परिवहन रोजगार योजना” को मंजूरी देकर राज्य में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है।सरकार का लक्ष्य वर्ष 2030 तक नए वाहनों की कुल बिक्री में कम-से-कम 30 प्रतिशत हिस्सेदारी इलेक्ट्रिक वाहनों की सुनिश्चित करना है।नई नीति के तहत इलेक्ट्रिक मालवाहक तिपहिया, दोपहिया तथा महिलाओं के लिए चारपहिया वाहनों की खरीद पर प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। यह राशि सीधे लाभार्थियों के खातों में डीबीटी के माध्यम से भेजी जाएगी।
समाजसेवियों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने इस फैसले का स्वागत किया है। उनका कहना है कि बिहार के शहरों में बढ़ते प्रदूषण और पेट्रोल-डीजल पर निर्भरता को कम करने के लिए ईवी नीति बेहद जरूरी थी।महिला संगठनों ने विशेष रूप से महिलाओं को इलेक्ट्रिक वाहन खरीद पर प्रोत्साहन दिए जाने को आत्मनिर्भरता की दिशा में सकारात्मक कदम बताया है।
चार्जिंग स्टेशन पर जोर
सरकार ने राज्य में चार्जिंग स्टेशनों की संख्या बढ़ाने के लिए अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि देने का भी फैसला किया है। इसके अलावा केंद्र सरकार की पीएम ई-ड्राइव योजना के तहत भी सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।विशेषज्ञों का मानना है कि यदि चार्जिंग नेटवर्क मजबूत हुआ तो बिहार में इलेक्ट्रिक वाहन बाजार तेजी से विस्तार कर सकता है।
बिहार AI मिशन: तकनीकी क्रांति की ओर कदम
कैबिनेट का सबसे चर्चित फैसला “बिहार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मिशन” माना जा रहा है। सरकार ने इसके लिए सिंगापुर की संस्था Global Finance and Technology Network को साझेदार बनाया है।इस मिशन के तहत अगले पांच वर्षों में सात हजार विद्यार्थियों को उन्नत एआई प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसमें विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित के छात्र शामिल होंगे।
नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ सिंगापुर और अन्य वैश्विक संस्थाओं के सहयोग से पांच महीने का एडवांस्ड AI सर्टिफिकेशन प्रोग्राम चलाया जाएगा।शिक्षाविदों का कहना है कि यदि यह योजना प्रभावी ढंग से लागू हुई तो बिहार तकनीकी शिक्षा और स्टार्टअप इकोसिस्टम में नई पहचान बना सकता है।
“आर्यभट्ट टेक्नोलॉजी ऑब्जर्वेटरी” बनेगा नया डिजिटल मंच
सरकार “आर्यभट्ट टेक्नोलॉजी ऑब्जर्वेटरी” नाम से एआई और क्वांटम तकनीक आधारित डिजिटल प्लेटफॉर्म भी तैयार करेगी। इसके जरिए छात्रों, शोधकर्ताओं, स्टार्टअप्स और सरकारी अधिकारियों को मशीन लर्निंग, क्लाउड कंप्यूटिंग और बड़े भाषा मॉडल जैसी अत्याधुनिक तकनीकी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।सरकार का दावा है कि इससे 100 से अधिक स्टार्टअप को सीधा लाभ मिलेगा।
विपक्ष ने उठाए सवाल
विपक्षी दलों ने सरकार के फैसलों पर मिश्रित प्रतिक्रिया दी है। एक ओर विपक्ष ने कर्मचारियों के डीए बढ़ोतरी और तकनीकी शिक्षा से जुड़े फैसलों का स्वागत किया, वहीं दूसरी ओर भारी ऋण उगाही और योजनाओं के क्रियान्वयन पर सवाल उठाए।विपक्षी नेताओं का कहना है कि सरकार घोषणाओं में आगे रहती है, लेकिन जमीन पर परियोजनाओं का लाभ आम लोगों तक पहुंचाने में अक्सर विफल रहती है।
क्या बिहार बदलती तस्वीर की ओर बढ़ रहा है?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सम्राट सरकार अब बिहार को पारंपरिक राजनीति से निकालकर तकनीक, उद्योग, हरित परिवहन और कौशल विकास आधारित मॉडल की ओर ले जाने का प्रयास कर रही है।
हालांकि चुनौती केवल योजनाओं की घोषणा नहीं, बल्कि उनके प्रभावी क्रियान्वयन की होगी। बिहार लंबे समय से बेरोजगारी, पलायन और औद्योगिक पिछड़ेपन की समस्या से जूझता रहा है। ऐसे में AI मिशन, ईवी नीति, तकनीकी शिक्षा और औद्योगिक निवेश जैसे कदम यदि सफल होते हैं तो राज्य की आर्थिक और सामाजिक तस्वीर बदल सकती है।
फिलहाल इतना तय है कि बुधवार की कैबिनेट बैठक केवल प्रशासनिक निर्णयों की सूची नहीं थी, बल्कि यह बिहार के भविष्य की नई विकास-परिकल्पना का संकेत भी बनकर उभरी
