बी के झा
मुंबई / न ई दिल्ली, 7 नवंबर
बॉलीवुड का चमकता हुआ आकाश शुक्रवार को एक सितारे की अनंत यात्रा का साक्षी बना। दिग्गज अभिनेता और निर्माता संजय खान की पत्नी तथा अभिनेता जायद खान और सुज़ैन खान की मां जरीन खान का 81 वर्ष की आयु में निधन हो गया। लंबे समय से उम्रजनित बीमारियों से जूझ रहीं जरीन खान ने मुंबई स्थित अपने घर पर अंतिम सांस ली।
उनके निधन की खबर ने फिल्म उद्योग और उनके चाहने वालों को गहरे शोक में डुबो दिया।हिंदू रीति-रिवाज से हुआ अंतिम संस्कार
जरीन खान पारसी मूल की थीं, लेकिन शादी के बाद खान परिवार की परंपरा अपनाने के बजाय उनका अंतिम संस्कार हिंदू रीति-रिवाजों से किया गया। परिवार के आग्रह पर बेटे जायद खान ने मुखाग्नि दी। विधि-विधानों के बीच संजय खान का रोना और टूट जाना देखने वालों के दिलों को चीर गया।
बॉलीवुड हस्तियों की उमड़ी भीड़ जरीन खान से जुड़ी यादों को सँजोने और परिवार को सांत्वना देने के लिए बॉलीवुड जगत से कलाकारों का तांता लग गया।जया बच्चन अपनी बेटी श्वेता बच्चन के साथ पहुंचीं।रानी मुखर्जी, सबा आज़ाद और पश्मीना रोशन ने परिवार से मिलकर दुख साझा किया।बॉबी देओल पपराज़ी से बचते हुए चेहरे को ढंककर आए।
पूर्व दामाद ऋतिक रोशन भी सुज़ैन का हाथ थामे पहुंचे और भावुक नजर आए।एक्टर जैकी श्रॉफ जब पहुंचे, तो उन्होंने मीडिया से संयम बरतने की अपील करते हुए कहा—“ऐसे समय में परिवार को थोड़ी निजता दीजिए, यह सबसे बड़ी संवेदना होगी।”
जरीन खान—एक कलाकार, एक डिज़ाइनर, एक विरासत
जरीन खान का फिल्मी सफर भले ही छोटा रहा हो, लेकिन उनका प्रभाव गहरा था। 1963 में देव आनंद के साथ ‘तेरे घर के सामने’ में अभिनय कर उन्होंने फिल्मी दुनिया में कदम रखा, लेकिन जल्द ही उन्होंने अभिनय छोड़ आंतरिक सौंदर्य और रचनात्मकता की राह चुन ली।वह अपने समय की सबसे बेहतरीन इंटीरियर डिज़ाइनरों में गिनी जाती थीं।
बॉलीवुड के कई दिग्गज सितारों के घरों का इंटीरियर उनकी रचनात्मक दृष्टि का उदाहरण है—
सादगी, शालीनता और सौंदर्य का अनूठा संगम।संजय खान से प्रेम और जीवन1960 के दशक में जरीन खान और संजय खान की मुलाकात एक निजी पार्टी में हुई थी। कुछ वर्षों के परिचय और प्रेम के बाद 1966 में दोनों ने विवाह किया।उनकी चार संताने—
सुज़ैन, जायद, सिमोन और फराह—
आज अपने-अपने क्षेत्रों में ऊंचाइयों पर हैं। खान परिवार को एकजुट रखने में जरीन की भूमिका सबसे अहम मानी जाती थी।एक युग का इति
जरीन खान का जाना केवल एक परिवार का निजी नुकसान नहीं है, यह पूरे बॉलीवुड और डिज़ाइन जगत की एक अपूरणीय क्षति है।वह न सिर्फ एक खूबसूरत व्यक्तित्व थीं, बल्कि एक संवेदनशील, सुसंस्कृत और प्रेरणादायी महिला भी थीं। उनकी गरिमा, शांत स्वभाव और रचनात्मक तेजस ने हर उस व्यक्ति को प्रभावित किया जो उनके संपर्क में आया।शनिवार को हुए अंतिम संस्कार में बुझती चिता की लौ के साथ एक युग समाप्त हुआ। लेकिन जरीन खान की स्मृतियाँ—उनकी सौम्यता, उनकी गरिमा, और उनका सृजन—सदैव जीवित रहेंगे।
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