बी के झा
NSK

जमुई/पटना, 8 नवंबर
बिहार विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण से पहले जमुई अचानक राजनीतिक और साम्प्रदायिक तनाव के केंद्र में आ गया है। स्टेशन रोड स्थित बीजेपी कार्यालय के बाहर शनिवार की दोपहर राजद समर्थकों ने भारी हंगामा मचाया, जिसके बाद घंटों तक शहर में तनावपूर्ण स्थिति बनी रही।
तेजस्वी की रैली के बाद भड़का माहौल जानकारी के अनुसार, स्टेडियम मैदान में तेजस्वी यादव की सभा समाप्त होते ही राजद प्रत्याशी शमशाद आलम और पूर्व मंत्री विजय प्रकाश के नेतृत्व में रोड शो निकला। भीड़ जब बीजेपी कार्यालय के पास पहुँची, तभी स्थिति अचानक बिगड़ गई।
भाजपा प्रत्याशी और अंतरराष्ट्रीय शूटिंग चैंपियन श्रेयसी सिंह इसी समय कार्यालय में मौजूद थीं।“मुर्दाबाद” से शुरू होकर नारेबाज़ी साम्प्रदायिक रंग तक पहुँची
बीजेपी नेताओं के मुताबिक, जैसे ही रोड शो पार्टी दफ्तर के सामने पहुंचा, राजद समर्थकों ने श्रेयसी सिंह और बीजेपी के खिलाफ “मुर्दाबाद” के नारे लगाने शुरू कर दिए।स्थिति तब और गंभीर हो गई जब भीड़ में शामिल कुछ युवकों ने कथित तौर पर “अल्लाह-हू-अकबर” और “पाकिस्तान ज़िंदाबाद” जैसे नारे लगाए।
हालांकि इन नारे बाज़ियों की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हुई है, लेकिन बीजेपी की ओर से यह आरोप बेहद गंभीर अंदाज में उठाया गया है।
पुलिस की त्वरित दखल, भीड़ को हटाया
बीजेपी कार्यालय में मौजूद नेताओं ने तुरंत पुलिस को सूचना दी।स्थानीय थाना प्रभारी के नेतृत्व में पुलिस टीम पहुंची और राजद समर्थकों को वहाँ से हटाया।पुलिस अधिकारियों ने बताया कि स्थिति अब नियंत्रण में है, लेकिन चुनाव से पहले ऐसे घटनाक्रम बेहद संवेदनशील माहौल पैदा कर सकते हैं।
RJD प्रत्याशी से संपर्क नहीं, चुप्पी बढ़ा रही राजनीतिक गर्मी
इस मामले पर प्रतिक्रिया के लिए राजद प्रत्याशी शमशाद आलम से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उनसे बात नहीं हो पाई। राजद की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
स्थानीय पत्रकारों की चेतावनी: “
यह विवाद सिर्फ जमुई नहीं, पूरे बिहार का चुनावी तापमान बदल देगा”एक स्थानीय पत्रकार ने कहा—“आज बीजेपी ऑफिस के बाहर जिस तरह की नारेबाज़ी हुई, उसने वातावरण को खतरनाक मोड़ पर पहुँचा दिया है। दूसरे चरण की वोटिंग अब सीधा-सीधा धार्मिक ध्रुवीकरण का मैदान बन सकती है।”
उन्होंने आगे कहा—
“इस तरह की नारेबाज़ी समाज में घृणा और उन्माद को बढ़ाती है। चुनाव आयोग को सख़्त कार्रवाई करनी चाहिए ताकि बिहार में साम्प्रदायिक तनाव की कोई घटना न हो।
राजनीतिक विश्लेषण:
यह घटना चुनाव को किस दिशा में ले जाएगी?
जमुई की यह घटना न सिर्फ स्थानीय राजनीति बल्कि पूरे बिहार के चुनावी समीकरण को प्रभावित कर सकती है।नेटाओं की भाषा पहले ही तल्ख़ है, और अब धार्मिक नारेबाज़ी ने सियासी फिज़ा में नया तनाव भर दिया है।बीजेपी इस घटना को “राजद की अराजकता और उन्माद” बताकर चुनावी मुद्दा बना सकती है।राजद इस मामले को “उकसावे की राजनीति” कहकर जवाब दे सकती है।वोटर अब भावनात्मक, धार्मिक और पहचान आधारित मुद्दों की तरफ खिंच सकते हैं।दूसरे चरण की सीटें, खासकर मुस्लिम-बहुल इलाकों में, इसका असर और गहरा हो सकता है।
निष्कर्ष:
बिहार चुनाव का सबसे संवेदनशील मोड़जमुई की घटना सीधे-सीधे कानून-व्यवस्था, सांप्रदायिक सौहार्द और चुनाव आयोग की निष्पक्षता जैसे बड़े सवाल खड़े करती है।बीजेपी और राजद— दोनों के लिए यह मौक़ा चुनावी रणनीति को नए सिरे से मोड़ने का है।अब पूरा बिहार देख रहा है कि:क्या चुनाव आयोग सख्त कार्रवाई करेगा?क्या इस घटना से दूसरे चरण की राजनीति बदल जाएगी?और क्या जमुई, इस चुनाव की नई “टर्निंग पॉइंट” बनकर उभरेगा?
