बी के झा
NSK

लखनऊ / न ई दिल्ली, 12 नवंबर
दिल्ली में लाल किले के पास हुए धमाके के बाद अब जांच एजेंसियों को एक और बड़ा सुराग हाथ लगा है। गिरफ्तार आतंकियों की पूछताछ में खुलासा हुआ है कि आतंकी संगठन की असली योजना दिल्ली नहीं, बल्कि अयोध्या और वाराणसी जैसे देश के दो सबसे पवित्र शहरों को दहला देने की थी।सूत्रों के मुताबिक, गिरफ्तार महिला आतंकी शाहीन ने अयोध्या में पहले से ही स्लीपर मॉड्यूल को सक्रिय कर रखा था, जो किसी भी वक्त बड़े हमले को अंजाम दे सकता था। हालांकि, सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता से इस मॉड्यूल की साजिश नाकाम कर दी गई।
लाल किले का ब्लास्ट — असली टारगेट को छिपाने की जल्दबाजी
जांच से यह भी सामने आया है कि दिल्ली का ब्लास्ट योजनाबद्ध नहीं था, बल्कि यह हड़बड़ी और घबराहट में किया गया विस्फोट था।दरअसल, लाल किले के पास 10 नवंबर की शाम 7 बजे के करीब हुई i-20 कार ब्लास्ट में 12 लोगों की मौत और 20 से अधिक घायल हुए थे।पुलिस को विस्फोटक में टाइमर या किसी रिमोट ट्रिगर का इस्तेमाल नहीं मिला, जिससे यह आशंका और मजबूत हुई कि ब्लास्ट आतंकी नेटवर्क की समय से पहले उजागर हो जाने पर जल्दबाजी में किया गया।अस्पतालों और भीड़भाड़ वाली जगहें थीं हिट लिस्ट में पूछताछ में आतंकियों ने स्वीकार किया कि उनका उद्देश्य केवल धार्मिक स्थल नहीं था, बल्कि अस्पतालों और सार्वजनिक स्थानों को भी निशाना बनाना था ताकि अधिकतम जनहानि हो सके।
जांच एजेंसियों के सूत्रों के अनुसार, आतंकियों की हिट लिस्ट में कई अस्पताल, बाजार और धार्मिक स्थल शामिल थे।डॉक्टरों के रूप में छिपा था मौत का नेटवर्क
इस साजिश में शामिल तीन मुख्य नाम सामने आए हैं
डॉ. मुजम्मिल, डॉ. अदील अहमद डार और डॉ. उमर।इन तीनों ने अपने पेशे की आड़ में आतंक का जाल बुना था।सूत्रों के अनुसार, डॉ. उमर धमाके के समय ही मारा गया, जबकि डॉ. मुजम्मिल और डॉ. अदील अहमद डार को गिरफ्तार कर लिया गया है।दोनों से पूछताछ में कई चौंकाने वाले तकनीकी और नेटवर्क संबंधी तथ्य सामने आए हैं, जिनसे अब सुरक्षा एजेंसियां अन्य राज्यों में फैले मॉड्यूल तक पहुंचने की कोशिश कर रही हैं।
अयोध्या-वाराणसी पर बढ़ी चौकसी
दिल्ली ब्लास्ट के बाद अब अयोध्या और वाराणसी में सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट मोड पर हैं।राम मंदिर, काशी विश्वनाथ धाम सहित तमाम प्रमुख धार्मिक स्थलों पर अतिरिक्त सुरक्षाबल तैनात कर दिए गए हैं।
इंटेलिजेंस सूत्रों का मानना है कि यह आतंकी नेटवर्क किसी विदेशी ताकत के इशारे पर काम कर रहा था, जो भारत के धार्मिक सौहार्द और सामाजिक एकता को चोट पहुंचाना चाहता था।
राष्ट्रविरोधी साजिश का अंत — सुरक्षा एजेंसियों की तत्परता ने बचाई अनगिनत जानें
दिल्ली से लेकर लखनऊ तक चल रही ताबड़तोड़ छापेमारियों ने इस साजिश के कई तारों को जोड़ दिया है।हालांकि जांच अभी जारी है, लेकिन एक बात स्पष्ट हो चुकी है कि अगर यह स्लीपर मॉड्यूल सक्रिय हो जाता, तो देश एक और बड़े आतंक हमले का गवाह बन सकता था।
राष्ट्र विरोधी शक्तियों की इस साजिश को विफल कर सुरक्षा एजेंसियों ने न सिर्फ अयोध्या और वाराणसी की सुरक्षा सुनिश्चित की, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था को भी सुरक्षित रखा है।
(बी.के. झा)”राष्ट्र की रक्षा में सजग पत्रकारिता — सत्य के साथ, सुरक्षा के साथ।”
