बी के झा
NSK

नई दिल्ली/फरीदाबाद/नूंह, 15 नवंबर
दिल्ली के लाल किले के पास हुए बम धमाके ने न केवल राजधानी को दहलाया बल्कि जांच एजेंसियों के पीछा करते-करते यह मामला हरियाणा के नूंह के भीतर तक जा पहुंचा है। इस पूरे मामले में डॉक्टरों की संदिग्ध भूमिका उभरकर सामने आने लगी है। एजेंसियों के हाथ अब वह सुराग लग रहे हैं, जो एक बड़े नेटवर्क की ओर इशारा करते हैं।सूत्रों की मानें तो गिरफ्तार संदिग्ध डॉक्टर मुजम्मिल और अन्य आरोपियों के मोबाइल नंबरों की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) से एक चौंकाने वाला पैटर्न सामने आया है। कई ऐसे डॉक्टर, जिनका सीधा-सीधा कनेक्शन अल फलाह यूनिवर्सिटी से है, धमाके के बाद से अपने फोन बंद करके गायब हैं।
जांच एजेंसियां अब इन सभी नंबरों को ट्रेस करने में जुट गई हैं।एजेंसियों की सूची में करीब एक दर्जन से अधिक डॉक्टर हैं, जिनके आतंकी संगठन जैश के संदिग्धों से संपर्क सामने आए हैं।
नूंह बना जांच का केंद्र, 5 लोग हिरासत मेंदिल्ली ब्लास्ट का धागा अब नूंह के रास्ते खुल रहा है। अब तक नूंह से पांच लोग हिरासत में लिए जा चुके हैं, जिनमें दो डॉक्टर और एक MBBS स्टूडेंट शामिल हैं। तीनों का संबंध फरीदाबाद स्थित अल फलाह यूनिवर्सिटी से जुड़ा हुआ है।
जिन डॉक्टरों को हिरासत में लिया गया है, उनमें शामिल हैं—डॉ. मोहम्मद (फिरोजपुर झिरका)डॉ. रिहान (नूंह शहर)डॉ. मुस्तकीम (सुनहेड़ा गांव, पुन्हाना)डॉ. मोहम्मद ने हाल ही में अल फलाह यूनिवर्सिटी से MBBS की डिग्री और छह महीने की इंटर्नशिप पूरी की थी। वह 15 नवंबर को यूनिवर्सिटी में फिर से जॉइन करने वाला था, लेकिन उससे पहले ही दिल्ली ब्लास्ट की घटना हो गई और वह गिरफ्तार कर लिया गया।
एजेंसियों को आशंका है कि यह नेटवर्क डॉक्टरों और मेडिकल छात्रों की आड़ लेकर ऑपरेट हो रहा था।जमीन में छिपे राज?
अल फलाह यूनिवर्सिटी पर दबाव बढ़ा
फरीदाबाद जिला प्रशासन ने यूनिवर्सिटी की लगभग 78 एकड़ जमीन की विस्तृत जांच के आदेश दिए हैं। इस जांच का मकसद सिर्फ जमीन की नापजोख करना नहीं, बल्कि उस पूरी प्रक्रिया को खंगालना है जिसके तहत यह जमीन खरीदी गई थी।पटवारी और राजस्व अधिकारी वर्तमान में—पूरी जमीन का पैमाइश रिकॉर्ड तैयार कर रहे है।
किस हिस्से पर इमारतें बनी हैं, किस हिस्से में खाली क्षेत्र हैजमीन किससे खरीदी गई थी पूरे लेनदेन में किन-किन लोगों की भूमिका थी कितनी रकम और किसे दी गई इन सभी पहलुओं की गहन जांच कर रहे हैं।
अधिकारियों को संदेह है कि खाली पड़ी जमीन का इस्तेमाल संदिग्ध गतिविधियों के लिए किया गया हो, या यहां कुछ छिपाकर रखा गया हो।जांच की दिशा बड़े खुलासे की ओरब्लास्ट की शुरुआती जांच में यह मामला महज एक लो-इंटेंसिटी धमाके जैसा लग रहा था, लेकिन डॉक्टरों के नेटवर्क, बंद फोनों और यूनिवर्सिटी कनेक्शन ने इस केस को बेहद संवेदनशील बना दिया है।
CDR से यह भी समझ में आया है कि कई संदिग्ध धमाके से कुछ घंटे पहले और बाद तक एक-दूसरे से लगातार संपर्क में थे, लेकिन धमाका होते ही सभी नंबर अचानक स्विच ऑफ हो गए।एजेंसियों का मानना है कि यह सिर्फ एक ब्लास्ट नहीं, बल्कि एक बड़े मॉड्यूल के सक्रिय होने का संकेत हो सकता है, जो मेडिकल पेशे की आड़ में काम कर रहा हो।क्या आने वाले दिनों में और गिरफ्तारी?जांच टीमों ने नूंह, फरीदाबाद और दिल्ली-NCR में कई जगहों पर छापेमारी तेज कर दी है।
सूत्रों के मुताबिक:दर्जन भर डॉक्टरों की धरपकड़ की तैयारीअल फलाह यूनिवर्सिटी के कई पूर्व और वर्तमान स्टाफ से पूछताछ
आतंकियों के स्थानीय सपोर्ट सिस्टम की पहचानदेश के बाहर से फंडिंग के लिंक तलाशे जा रहे हैंआने वाले दिनों में कई और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।निष्कर्ष: दिल्ली से नूंह तक एक नेटवर्क की परतें खुलती हुईं
दिल्ली का यह धमाका अब एक ऐसी दिशा में बढ़ चुका है, जहां मेडिकल शिक्षा, संदिग्धों के संपर्क, जमीन की खरीद और स्थानीय नेटवर्क—
सब एक-दूसरे में उलझे हुए नजर आ रहे हैं।जांच एजेंसियों की तेजी से यह संकेत मिल रहा है कि मामला केवल एक आतंकी वारदात का नहीं, बल्कि एक सुव्यवस्थित मॉड्यूल का हो सकता है।
देश की राजधानी में हुए इस धमाके के धागे अब गांवों, यूनिवर्सिटी और पेशेवर समूहों तक फैल चुके हैं। आने वाले दिनों में यह केस देश की सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक महत्वपूर्ण परीक्षा साबित हो सकता है।
