IPS से इस्तीफा देकर राजनीति में आए, पर छपरा में जमानत भी नहीं बचा पाए डॉ. जय प्रकाश — क्यों नहीं चला पूर्व ADGP का कद?

बी के झा

NSK

पटना/छपरा, 15 नवंबर

हिमाचल प्रदेश पुलिस के पूर्व अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (ADGP) और प्रतिष्ठित आईपीएस अधिकारी डॉ. जय प्रकाश सिंह का राजनीति में पहला कदम बेहद निराशाजनक साबित हुआ। प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी ने उन पर भरोसा जताते हुए उन्हें छपरा विधानसभा सीट से प्रत्याशी बनाया था, लेकिन जनता ने उन्हें लगभग नकार दिया। डॉ. सिंह को सिर्फ 3433 वोट मिले और उनकी जमानत तक जब्त हो गई।यह कहानी सिर्फ एक उम्मीदवार की हार की नहीं, बल्कि यह सवाल भी छोड़ जाती है कि क्या व्यवस्थित राजनीति में उतरना उतना ही आसान है जितना बाहर से दिखता है?

किसान परिवार से IPS तक का सफर — प्रेरणादायक लेकिन राजनीति में नाकाफी10 जुलाई 1967 को बिहार के एकमा प्रखंड के तेघड़ा गांव में जन्मे डॉ. जेपी सिंह का जीवन संघर्ष और समर्पण की मिसाल रहा है।एक साधारण किसान परिवार से निकलकर उन्होंने पहले भारतीय सेना में सेवा दी, फिर भारतीय पुलिस सेवा (IPS) में चयन पाया।

2000 बैच के अधिकारी के रूप में वे हिमाचल कैडर में शामिल हुए। गांव से उनका लगाव इतना गहरा था कि छुट्टियों के दौरान वे गांव लौटकर बच्चों को नि:शुल्क पढ़ाते, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करवाते। यह सामाजिक जुड़ाव ही उन्हें आगे चलकर सार्वजनिक जीवन यानि राजनीति की तरफ ले आया।

हिमाचल पुलिस में बेदाग और प्रभावशाली करियरहर पद पर ईमानदारी और दक्षता का परिचय देने वाले डॉ. सिंह का करियर लगातार ऊंचाइयों पर गया—2001: कांगड़ा में प्रोबेशन एएसपी कांगड़ा राज्यपाल के ADC चंबा एसपी सिरमौर एसपी इंटेलिजेंस कमांडेंटआईजी साउथ रेंजआईजी नॉर्थ रेंजएडीजी विजिलेंस

31 जनवरी 2025 को उन्हें ADGP बनाया गया—यह किसी भी अधिकारी के करियर का स्वर्णिम दौर माना जाता है।लेकिन इस ऊंचाई से केवल 5 महीने बाद उन्होंने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) लेकर राजनीति में उतरने का चौंकाने वाला निर्णय लिया,

जबकि उनकी नियत सेवानिवृत्ति 2027 में होने वाली थी।राजनीति में एंट्री: जन सुराज पार्टी की उम्मीदें, नतीजे बेहद उलट

प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी पहली बार सियासी धरातल पर अपनी पकड़ बनाने की कोशिश कर रही थी। डॉ. सिंह जैसे कद वाले अधिकारी का टिकट मिलना खुद में चर्चा का विषय था।लेकिन छपरा सीट के नतीजे ने सबको चौंका दिया—

छपरा विधानसभा सीट – नतीजे भाजपा की छोटी कुमारी – 86,845 वोटआरजेडी के शत्रुघन यादव – 79,245 वोटनिर्दलीय राखी गुप्ता – 11,488 वोटजन सुराज पार्टी के डॉ. जय प्रकाश सिंह – केवल 3,433 वोट10 प्रत्याशियों में वे चौथे स्थान पर रहे।

इतना कम जनसमर्थन कि जमानत भी नहीं बच सकी।—क्यों नहीं चला IPS का कद?

विश्लेषण के 4 बड़े कारण

1. स्थानीय राजनीति की गहराई को समझने में कमीIPS अधिकारी होने का सम्मान जरूर मिलता है, लेकिन चुनाव जीतने के लिए स्थानीय समीकरणों पर मजबूत पकड़ जरूरी होती है। छपरा में यह पकड़ कमजोर दिखी।

2. जन सुराज पार्टी की सीमित जमीनी पकड़नई पार्टी की पहुंच और संगठन सीमित था। बड़े राजनीतिक दलों की तुलना में संसाधन भी कम थे।

3. जातीय समीकरणों का भारी प्रभावछपरा एक अत्यंत जाति-संवेदी सीट है। यहां कैंडिडेट की पृष्ठभूमि से अधिक जातीय बैलेंसिंग मायने रखती है।

4. चुनाव बहुत देर से लड़ने का फैसलाIPS से सीधे चुनावी मैदान में उतरना लोगों से जुड़ने के लिए पर्याप्त समय नहीं दे पाया।

IPS करियर चमका, पर राजनीतिक शुरुआत धुंधली

डॉ. जेपी सिंह का IPS करियर बेशक एक आदर्श उदाहरण है—कड़ी मेहनत, ईमानदारी और समर्पण से भरा।लेकिन राजनीति का मैदान बिल्कुल अलग है,

जहां कद नहीं, समीकरण चलते हैं…काम नहीं, कनेक्शन जीत दिलाते हैं…उनकी पहली चुनावी यात्रा भले असफल रही हो, लेकिन यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या वे राजनीति में टिके रहते हैं या फिर कोई नया रास्ता चुनते हैं।

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