बी के झा
NSK

पटना, 16 नवंबर
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में करारी हार के बाद राजद के भीतर जो उथल-पुथल शुरू हुई है, उसने लालू प्रसाद यादव के राजनीतिक साम्राज्य पर बड़ा सवालचिह्न खड़ा कर दिया है।पहले तेजप्रताप यादव का बाग़ी तेवर, फिर रोहिणी आचार्य की भावनात्मक विदाई, और अब चप्पल कांड—
यह सब मिलकर संकेत दे रहा है कि तेजस्वी यादव के नेतृत्व और परिवार प्रबंधन पर एक बड़ा संकट मंडरा रहा है।तेजप्रताप का अलग रास्ता: “जयचंद” का आरोप और परिवार से दूरीचुनाव अभियान शुरू होते ही तेजप्रताप यादव ने पारिवारिक तनावों और मतभेदों के बीच अपनी अलग पार्टी बना ली।
यह केवल एक राजनीतिक कदम नहीं था—यह लालू परिवार की एकता पर पहली खुली चोट थी।तेजप्रताप ने साफ कहा था कि“तेजस्वी के करीबी—
संजय यादव और रमीज—ने परिवार में दरार डलवाई है।”
उन्होंने इन्हें जयचंद तक कह दिया।राजद नेतृत्व ने इसे उनकी “व्यक्तिगत चुनावी रणनीति” बताया, लेकिन यह स्पष्ट था कि तेजस्वी यादव अपने बड़े भाई को साथ रखने में नाकाम रहे।
रोहिणी की विदाई:
24 घंटे में परिवार से रिश्ता ख़त्म चुनाव परिणामों के अगले ही दिन लालू की बेटी रोहिणी आचार्य ने राजनीति और परिवार—दोनों से दूरी बनाने की घोषणा कर दी।
पटना एयरपोर्ट पर मीडिया से बात करते हुए उनका बयान चौंकाने वाला था—
अब मेरा कोई परिवार नहीं है।सबकुछ तेजस्वी, संजय यादव और रमीज ने किया है।मुझे अपमानित कर घर से निकाला गया।”रोहिणी ने सोशल मीडिया पर लिखे बेहद भावनात्मक पोस्ट में दर्द भी झलका और आक्रोश भी—
मुझे गालियां दी गईं, चप्पल उठाई गई।
मैंने आत्मसम्मान नहीं बेचा, इसलिए मुझे घर से निकाल दिया गया।मैं रोती हुई माँ-बाप को छोड़कर आयी हूँ।मेरा मायका छीन लिया गया।मुझे अनाथ बना दिया गया।”उनकी पोस्ट ने लालू परिवार की आंतरिक स्थितियों को पहली बार इस कदर सार्वजनिक कर दिया।“
चप्पलकांड”:
नाराजगी का नया विस्फोट
रोहिणी ने आरोप लगाया कि तीखी बहस के दौरान उन्हें चप्पल से मारने की कोशिश की गई।यह आरोप केवल राजनीतिक नहीं बल्कि भावनात्मक विस्फोट भी है—और यहीं से जनता में यह सवाल और तेज हुआ कि—
क्या लालू परिवार में सबकुछ नियंत्रण से बाहर हो रहा है?
तेजस्वी का बढ़ता कद… और परिवार की घटती एकजुटता तेजस्वी यादव पिछले एक दशक से राजद की केंद्रीय शक्ति रहे हैं।लालू यादव बीमार हैं और सक्रिय राजनीति से लगभग बाहर।मीसा भारती अपनी चुनौतियों से जूझ रही हैं।
तेजप्रताप पहले ही निकल चुके हैं।अब रोहिणी भी दरी खींच चुकी हैं।ऐसे में परिवार की एकता का धागा अब और पतला होता दिख रहा है।करारी हार ने तेजस्वी को सवालों के घेरे में खड़ा किया
राजद की सीटें 75 से घटकर 25 रह जाना केवल एक चुनावी हार नहीं—
यह जनादेश है कि पार्टी में नेतृत्व और प्रबंधन दोनों में बड़ी कमी रही।चुनाव हार के बाद तेजस्वी अब तक मीडिया के सामने नहीं आए हैं।और इस बीच रोहिणी की नाराजगी ने प्रश्नों को और पैना कर दिया है—
क्या तेजस्वी यादव संगठन तो संभाल रहे हैं, पर परिवार नहीं?क्या लालू परिवार नेतृत्व का संक्रमण काल राजनीतिक टूट में बदल रहा है?विश्लेषण: लालू परिवार की राजनीति—
पहली बार इतना बिखरी हुई लालू परिवार ने तीन दशक तक बिहार की राजनीति पर अपना मजबूत असर बनाए रखा।पर पहली बार ऐसा लग रहा है कि—परिवार बिखर रहा है रिश्तों पर अविश्वास बढ़ रहा है
तेजस्वी की गुटबाजी रोकने की क्षमता पर सवाल उठ रहे हैंऔर जनता यह सब LIVE देख रही है
राजनीतिक विशेषज्ञ मानते हैं कि“अगर यह दरार गहरी होती गई, तो राजद का भविष्य तेजस्वी के कंधों पर भारी पड़ सकता है।
”क्या आगे और विस्फोट होंगे?
परिवार के अंदर दो साल से खिचड़ी पक रही थी,पर चुनाव हार ने उसे उफान पर ला दिया।
तेजप्रताप, रोहिणी के बाद अगला मोर्चा कौन खोलेगा—इस पर भी राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज है।
और सबसे बड़ा सवाल—
क्या तेजस्वी यादव इन टूटे रिश्तों को जोड़ पाएंगे?
या लालू परिवार की राजनीति अब तेजस्वी बनाम परिवार के मोड़ पर पहुँच चुकी है?
