होटल में प्रेम हुआ बेआबरू: दुल्हन चीखती रही– “शादी करूँगी”, पर हिंदूवादी संगठनों ने रुकवा दी रस्में

बी के झा

NSK

रायबरेली/महाराजगंज / न ई दिल्ली, 16 नवंबर

प्रेम किसी धर्म, जाति, सरहद का मोहताज नहीं होता—यह बात अक्सर किताबों और फिल्मों में सुनाई देती है। लेकिन ज़मीन पर इसकी कसौटी कभी-कभी इतनी कठोर हो जाती है कि प्रेम की सबसे ऊँची आवाज़ भी भीड़ के शोर में दब कर रह जाती है।रविवार को रायबरेली के एक होटल में ऐसा ही दृश्य देखने को मिला, जब एक हिंदू युवती और मुस्लिम युवक की शादी शुरू होने से पहले ही भारी हंगामा मच गया।

दिल्ली में मिला प्यार, गाँव लौटने पर टूटा सपना बिहार के जलालुद्दीन एम. अकबर और उत्तर प्रदेश के महाराजगंज की सपना यादव—

दोनों की मुलाकात दिल्ली की नौकरी के दौरान हुई। प्यार परिपक्व हुआ और परिवार भी तैयार हो गया। शनिवार शाम रायबरेली के डिडौली स्थित एक होटल में निकाह/विवाह की तैयारियाँ पूरी थीं।दोनों पक्ष के लोग मौजूद थे। होटल सजा था, मेहमान पहुँचे थे, और दुल्हन जिंदगी की नई शुरुआत के लिए तैयार खड़ी थी।लेकिन इसी बीच यह खबर इलाके में फैल गई कि “हिंदू युवती एक मुस्लिम युवक से शादी कर रही है।

”बस फिर क्या था—कई हिंदूवादी संगठनों के कार्यकर्ता होटल की ओर कूच कर गए।कर्तव्य की ढाल बनकर पहुंचे संगठन, और… फूट पड़ा हंगामा करती सेना के जिलाध्यक्ष सत्येंद्र सिंह भदौरिया ‘मोनू’, धर्म जागरण मंच के अजीत सिंह समेत कई संगठनों के कार्यकर्ता होटल पहुँच गए।

नारेबाजी शुरू हुई, आरोपों की बारिश हुई और फिर माहौल काबू से बाहर होने लगा।हंगामे के बीच दुल्हन सपना यादव भी अपने निर्णय पर अडिग रही। उसने भीड़ के सामने खड़े होकर साफ कहा—“

मैं शादी करूँगी… किसी को रोकने का हक नहीं!”दुल्हन का प्रतिरोध: चीख, गुस्सा और आत्मघाती धमकी जैसे-जैसे विरोध की तीव्रता बढ़ती गई, दुल्हन का आक्रोश भी सामने आता गया। वह रोई, चीखी, जमीन पर बैठ गई, तर्क दिए, और फिर हाईवे की ओर इशारा करके कहा—

“अगर शादी नहीं होने दी, तो मैं गाड़ियों के आगे कूद जाऊँगी!

”यहाँ तक कि उसने विरोध कर रहे एक युवक पर मोबाइल फेंककर मारने की भी कोशिश की।लेकिन भीड़ का रुख नहीं बदला—और धीरे-धीरे दुल्हन का हौसला भी टूटने लगा।

होटल मालिक ने भी हटा लिए हाथ, भोजन तक देने से मना किया विवाद इतना बढ़ा कि होटल मालिक ने शादी समारोह से हाथ खड़े कर दिए।

खाना तक देने से मना कर दिया गया।युवती ने तीन दिन पहले ही सौ लोगों के लिए होटल बुक कराया था।बुकिंग में दूल्हे का नाम ‘बबलू’ बताया गया था—ताकि पहचान न उजागर हो।जानकारी मिली कि मूल योजना युवती के गाँव में शादी की थी, लेकिन वहाँ भी इसी तरह का विरोध शुरू हो गया था। इसलिए गुपचुप तरीके से होटल का इंतज़ाम किया गया था—

पर वहां भी विरोधी लामबंद हो गए।पुलिस पहुँची, पर समाधान नहीं मिला—

दोनों पक्ष लौट गए खाली हाथ हंगामा बढ़ने पर पुलिस मौके पर पहुँची।एसआई धीरेंद्र कुमार वर्मा के नेतृत्व में दोनों पक्षों को समझाने की कोशिश हुई, लेकिन बात न बनी।ना शादी हो सकी, ना कोई औपचारिक शिकायत दर्ज कराई गई।दोनों परिवारों को बिना शादी के ही होटल से लौटना पड़ा—और प्रेम की वह कहानी, जो आज एक नए मुकाम पर पहुँचने वाली थी, अधूरी रह गई।

यह घटना सिर्फ एक शादी की कहानी नहीं…

यह सवाल है—समाज प्रेम के अधिकार को कब तक बहस का विषय बनाए रखेगा?क्या दो वयस्कों का फैसला भीड़ के डर से बदल जाएगा?और क्या किसी की व्यक्तिगत स्वतंत्रता भी सभाओं और नारों की शिकार हो जाएगी?

रायबरेली की यह घटना हमें सोचने पर मजबूर करती है कि आधुनिक भारत में भी प्रेम और विवाह पर सामाजिक नियंत्रण कितना गहरा है।दुल्हन की आँखों का आक्रोश और दूल्हे की चुप्पी… दोनों इस बात के गवाह हैं कि कभी-कभी प्रेम की सबसे बड़ी दुश्मन दीवारें घरों और मोहल्लों में ही खड़ी होती हैं।

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