बी के झा
NSK

रायपुर /कोलकाता/ नई दिल्ली, 7 अक्टूबर
बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने पश्चिम बंगाल सरकार पर निशाना साधते हुए बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के रहते वे अब पश्चिम बंगाल में कथा नहीं करेंगे। शास्त्री ने कहा, “दीदी जब तक हैं, तब तक हम बंगाल नहीं जाएंगे। जब दीदी की जगह दादा आएंगे, तब जरूर जाएंगे।”यह बयान उन्होंने छत्तीसगढ़ के रायपुर में चल रही अपनी कथा के दौरान दिया। दरअसल, 10 से 12 अक्टूबर तक कोलकाता में बागेश्वर धाम कथा का आयोजन होना था, लेकिन आखिरी वक्त पर राज्य सरकार ने अनुमति रद्द कर दी। सरकार की ओर से वजह बताई गई कि स्थल पर बारिश का पानी भर गया था, जिससे सुरक्षा कारणों से कार्यक्रम की अनुमति नहीं दी जा सकती।हालांकि, धीरेंद्र शास्त्री इस फैसले से स्पष्ट रूप से नाराज नजर आए। उन्होंने मंच से कहा,हमको पश्चिम बंगाल जाना था, लेकिन दीदी ने मना कर दिया, परमिशन कैंसिल कर दी। हमें उनसे कोई व्यक्तिगत दिक्कत नहीं, पर धर्म के विरोध में न जाएं। भगवान करे दीदी बनी रहें, लेकिन धर्म की बुद्धि सही रखें।”बंगाल में ‘दीदी बनाम बाबा’ की राजनीति तेजबाबा बागेश्वर के इस बयान के बाद पश्चिम बंगाल में राजनीतिक हलचल मच गई है।इंडी गठबंधन से जुड़े नेताओं ने उन पर संप्रदायिक माहौल बिगाड़ने का आरोप लगाया।इंडी गठबंधन के एक वरिष्ठ नेता ने कहा,धीरेंद्र शास्त्री वहां ही आग लगाने जाते हैं, जहां भाजपा की सरकार होती है। उन्हें समझ आ गया कि ममता दीदी के राज में इस तरह के बाबाओं की राजनीति नहीं चलने वाली, इसलिए अब बहाना बना रहे हैं।”वहीं, भाजपा समर्थक वर्ग बाबा के समर्थन में उतर आया है। उनका कहना है कि धार्मिक आयोजनों पर रोक लगाना हिंदू भावनाओं का अपमान है। सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने ममता सरकार के खिलाफ नाराजगी जताई है और “#LetBageshwarInBengal” जैसे हैशटैग ट्रेंड होने लगे हैं।कौन हैं धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री?धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री, जिन्हें लोग बागेश्वर बाबा के नाम से जानते हैं, मध्यप्रदेश के छतरपुर स्थित बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर हैं।वे अपनी कथाओं में हिंदू एकता, सनातन धर्म और हिंदू राष्ट्र के विचारों पर खुलकर बोलते हैं।बाबा का कहना है कि वे किसी राजनीतिक दल से नहीं जुड़े, लेकिन हिंदुत्व के प्रति समर्पित हैं।पिछले महीने आगरा में उन्होंने कहा था—जिसका न आदि है, न अंत है, वही सनातन है। तीन हजार साल पहले इस धरती पर सिर्फ सनातनी थे। जितने भी मजहब हैं, सबके पूर्वज सनातनी ही हैं।”उनके इस बयान के बाद भी कई विपक्षी दलों ने उन्हें “विवादित” करार दिया था।कथा रद्द होने के पीछे राजनीति या प्रशासनिक कारण?कोलकाता प्रशासन का दावा है कि कार्यक्रम स्थल पर लगातार बारिश के कारण जलभराव हो गया था, जिससे सुरक्षा खतरा उत्पन्न हो गया था। इसलिए अनुमति रद्द की गई।लेकिन, बाबा समर्थकों का कहना है कि यह “धार्मिक भेदभाव” का मामला है।एक स्थानीय आयोजक ने बताया,हमने पानी निकालने की व्यवस्था कर ली थी, लेकिन फिर भी सरकार ने परमीशन रद्द कर दी। लगता है कि यह फैसला ऊपर से आया है।”बाबा बोले — “दीदी बनी रहें, पर धर्म विरोध न करें”रायपुर कथा के मंच से बाबा ने एक ओर जहां नाराजगी जताई, वहीं दूसरी ओर सौम्यता भी दिखाई। उन्होंने कहा।हम ममता दीदी से कोई बैर नहीं रखते। बस इतना चाहते हैं कि वह धर्म के विरोध में न जाएं और अपनी बुद्धि धर्म के अनुकूल रखें। हम जब तक दीदी हैं, बंगाल नहीं जाएंगे, लेकिन दादा आएंगे, तो जरूर जाएंगे।”उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई है।कुछ ने इसे “धर्म के सम्मान की बात” कहा, तो कुछ ने “राजनीतिक संदेश” करार दिया। निष्कर्षधीरेंद्र कृष्ण शास्त्री और ममता बनर्जी के बीच यह विवाद धर्म और राजनीति के टकराव का एक और उदाहरण बन गया है।जहां बाबा अपने धार्मिक अधिकारों की बात कर रहे हैं, वहीं ममता सरकार इसे कानूनी और प्रशासनिक मामला बता रही है।आने वाले दिनों में यह विवाद बंगाल की राजनीति में एक बड़ा चुनावी मुद्दा बन सकता है।
