बी के झा
NSK

नई दिल्ली, 17 नवंबर
लाल किले के पास हुए भीषण धमाके के सात दिन बाद इलाज के दौरान एक और घायल की मौत हो गई।55 वर्षीय विनय पाठक
, निवासी—आया नगर,
दिल्ली—ने लोकनायक अस्पताल के आईसीयू में अंतिम सांस ली।इसके साथ ही इस आतंकी हमले में मरने वालों की संख्या 15 हो गई है।
एक पैर कट गया था, 60% झुलसे थे—
7 दिन तक लड़ते रहे मौत सेधमाका इतना भयावह था किविनय पाठक का एक पैर मौके पर ही कट गया,हाथों में गंभीर फ्रैक्चर था,और उनका शरीर 60 फीसदी से ज्यादा झुलस गया था।डॉक्टरों ने उन्हें कई दिनों तक वेंटिलेटर पर रखा, लेकिन तेज़ संक्रमण और गहरी जलन के कारण उनका शरीर जवाब दे गया।
विनय का परिवार अब सदमे में है—“हमें बस इतना पता था कि वह बच जाएँ… पर हर दिन उनकी हालत खराब होती गई।”परिजनों ने रोते हुए यही कहा।जांच का फोकस: हमलावर डॉ. उमर उन-नबी के ‘आखिरी 48 घंटे’दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल, एनआईए और जम्मू-कश्मीर पुलिस की संयुक्त टीम इस समय डॉ. उमर उन-नबी की आखिरी गतिविधियों की बारीकी से जांच कर रही है।
जांचकर्ताओं ने अब तक 65 सीसीटीवी कैमरे खंगाले हैं।इन्हीं में से एक फुटेज सबसे महत्वपूर्ण सुराग बनकर उभरा है।सबसे अहम सुराग—
अल-फलाह यूनिवर्सिटी से 800 मीटर दूर धौज बाजार का CCTV30 अक्टूबर का फुटेज सामने आया है जिसमें—
डॉ. उमर एक मेडिकल स्टोर में बैठा दिखता है,उसके पास एक काला बैग है,और दो मोबाइल फोन हैं,जिनमें से एक फोन वह दुकान मालिक को चार्जिंग के लिए देता नजर आता है।यही दोनों फोन अब जांच का मुख्य बिंदु हैं, क्योंकि उमर ने इन्हें 30 अक्टूबर से 10 नवंबर के बीच सक्रिय रूप से इस्तेमाल किया था।दोनों फोन गायब—
जांच एजेंसियों की चिंता बढ़ी
जांच एजेंसियों को तेज़ी से एक ही सवाल परेशान कर रहा है:अचानक दोनों फोन कहाँ गायब हो गए?यह गायब होना सीधे-सीधे षड्यंत्र का संकेत देता है।
सूत्रों के मुताबिक—हमलावर से जुड़े 5 सिम कार्ड की पहचान की गई है।ये सभी सिम 30 अक्टूबर को निष्क्रिय किए गए थे।वही दिन जब उमर के निकट सहयोगी डॉ. मुजम्मिल शकील गनई को हिरासत में लिया गया था।ऐसे में संदेह है कि गिरफ्तारी की भनक लगते ही साक्ष्य मिटाने की कोशिश की गई।जांच का अगला चरण—
कौन था उमर के संपर्क में?एजेंसियों का फोकस अब इन बिंदुओं पर है—
गायब फोन किसने हटाए?क्या उमर के नेटवर्क में कोई और सक्रिय मददगार था?क्या धौज बाजार और अल-फलाह यूनिवर्सिटी के बीच कोई लिंक है?30 अक्टूबर से 10 नवंबर तक उमर कहाँ छिपा रहा?जांच अधिकारी कहते हैं—
“इस हमले की तैयारी बेहद संगठित और तकनीकी रूप से प्लान की गई थी। हम आखिरी टुकड़ों को जोड़ने में लगे हैं।”दिल्ली हाई-सेक्योरिटी जोन के पास लगातार बढ़ती मौतें सवाल खड़े करती हैं
लाल किला जैसे उच्च सुरक्षा क्षेत्र के बिल्कुल पास हुए विस्फोट ने दिल्ली पुलिस और केंद्र की सुरक्षा एजेंसियों पर भी सवाल खड़े किए हैं।हर गुजरते दिन के साथ मरने वालों की बढ़ती संख्या इस हमले की भयावहता को और स्पष्ट करती जा रही है।
निष्कर्ष
विनय पाठक की मौत सिर्फ एक संख्या नहीं, बल्कि इस भयावह धमाके के दर्दनाक अध्याय की नई गवाही है।उधर जांच एजेंसियां हमलावर डॉ. उमर के हर कदम को जोड़कर यह समझने की कोशिश कर रही हैं कि धमाके के पीछे किसका हाथ था, किसने मदद की और गायब फोन कहां गए।आने वाले दिनों में इस केस के कई परतें खुलने की संभावना है—
और हर परत, दिल्ली धमाके की साजिश को और गहराई से उजागर करेगी।
