बी के झा
NSK

नई दिल्ली, 17 नवंबर
दिल्ली में लाल किले के पास हुए भीषण विस्फोट की जांच हर बीतते दिन के साथ और चौंकाने वाले आयाम उजागर कर रही है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने सोमवार को इस मामले में दूसरी बड़ी गिरफ्तारी कर आतंकियों के मंसूबों की भयावह तस्वीर सामने रख दी।एजेंसी ने अनंतनाग के काजीगुंड निवासी जसीर बिलाल वानी उर्फ़ दानिश को श्रीनगर से दबोचा है —
वही दानिश, जिसने कथित तौर पर मुख्य हमलावर डॉ. उमर उन नबी के साथ मिलकर दिल्ली हमले के शक्ल देने में अहम भूमिका निभाई थी।जांच में खुलासा हुआ है कि 10 नवंबर को हुए आतंकी हमले से पहले दानिश ड्रोन में तकनीकी बदलाव कर रहा था और साथ ही रॉकेट तैयार करने की कोशिश भी कर रहा था।
हमास-शैली के हमले की तैयारी?सूत्रों के मुताबिक, दानिश जिस दिशा में काम कर रहा था, उससे संकेत मिलता है कि आतंकियों की योजना 2023 में इज़राइल पर हुए हमास के हमले जैसी विनाशकारी कार्रवाई करने की थी।
सनद रहे कि हमास ने उस हमले में अत्याधुनिक हथियारबंद ड्रोन का इस्तेमाल कर दुनिया को चौंका दिया था।इसी पैटर्न को भारत में दोहराने की कोशिश —
यह बात भर ही सुरक्षा एजेंसियों की चिंता को कई गुना बढ़ा देती है।ड्रोन को ‘बमवाहक’ मशीन बनाने की कोशिश
सूत्र बताते हैं कि दानिश को छोटे हथियारबंद ड्रोन तैयार करने का अनुभव था। NIA की प्रारंभिक जांच का दावा है कि दानिश:ड्रोन को अधिक क्षमता वाली बैटरियों से लैस कर रहा था,ताकि वह कैमरों के साथ-साथ भारी विस्फोटक भी उठा सके,और भीड़भाड़ वाले इलाकों में बड़े पैमाने पर जनहानि करने में सक्षम हो जाए।
जांच अधिकारियों का मानना है कि व्हाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल की यह योजना भारत की राजधानी में आतंक फैलाने के सबसे खतरनाक प्रयासों में से एक हो सकती थी।ऐसे हमलों का पैटर्न सीरिया में भी देखा जा चुका है, जहां आतंकियों ने इसी तरह के “बम-वाहित ड्रोन” का इस्तेमाल किया था।
प्रौद्योगिकी बनाम आतंकी नवाचार –
एक उभरता हुआ खतरा दुनिया भर में ड्रोन तकनीक की उपलब्धता जितनी सामान्य होती जा रही है, सुरक्षा एजेंसियों के लिए चुनौतियाँ भी उतनी ही जटिल।कई देश अपनी सुरक्षा ढाल को मजबूत करने में जुटे हैं —
कहीं एंटी-ड्रोन सिस्टम तैनात किए जा रहे हैं, कहीं रडार व जामिंग तकनीक में सुधार हो रहा है।लेकिन सवाल वही है— क्या आतंकी संगठनों की ‘तकनीक-प्रेरित साजिशों’ पर पूरी तरह अंकुश लगाया जा सकता है?डॉ. उमर से गहरी सांठगांठ पीटीआई के अनुसार, दानिश ने न केवल ड्रोन मॉडिफिकेशन में योगदान दिया, बल्कि रॉकेट जैसे हथियार विकसित करने के प्रयास में मुख्य हमलावर डॉ. उमर उन नबी की तकनीकी मदद भी की।
NIA के हाथ लगे डिजिटल साक्ष्य दानिश को इस पूरे साजिशी नेटवर्क का सक्रिय और केंद्रीय सदस्य बताते हैं।जांच का बढ़ता दायरा NIA ने दिल्ली में हुए विस्फोट को किसी एक व्यक्ति का अचानक किया गया हमला मानने से इनकार किया है।
एजेंसी को इस बात के पुख्ता संकेत मिले हैं कि:यह एक सुसंगठित आतंकी मॉड्यूल का हिस्सा था,जिसका लक्ष्य “बड़ी संख्या में नागरिकों को निशाना बनाना” था,और जिस पर महीनों से तकनीकी तैयारी की जा रही थी।जांच अब मॉड्यूल के बाकी सदस्यों, फंडिंग चैनल और विदेशी लिंक की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है।
नतीजा
दिल्ली धमाके की यह जांच सिर्फ एक आतंकी हमले का सच उजागर नहीं कर रही, बल्कि यह चेतावनी भी दे रही है कि भविष्य के हमले पारंपरिक तरीकों से अलग, अधिक तकनीक-संचालित और कहीं अधिक विनाशकारी हो सकते हैं।
NIA की ताज़ा गिरफ्तारी ने यह साफ कर दिया है कि भारत के सामने उभर रही चुनौती मानसिक कट्टरता से अधिक तकनीकी दक्षता की है—
शायद यही नया चेहरा है 21वीं सदी के आतंकवाद का।
