एपस्टीन फाइल्स: आखिर किन रईसों के राज दफन हैं इन दस्तावेज़ों में, और क्यों बार-बार बदला ट्रंप ने अपना रुख?

बी के झा

NSK

नई दिल्ली, 19 नवंबर

अमेरिका की राजनीति, न्याय व्यवस्था और हाई-प्रोफाइल सर्किल को लंबे समय से झकझोरने वाले जेफरी एपस्टीन केस की फाइलें जल्द ही सार्वजनिक हो सकती हैं। इन फाइलों को सार्वजनिक करने संबंधी बिल अमेरिकी हाउस में पास होने के बाद अब सीनेट में भी भारी बहुमत—427–1—से पारित हो चुका है। बिल अब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हस्ताक्षर का इंतजार कर रहा है।

उनके साइन होते ही अमेरिकी जस्टिस डिपार्टमेंट को यह फाइलें जारी करनी अनिवार्य होंगी।यह फैसला जितना ऐतिहासिक है, उतना ही सनसनीखेज भी—क्योंकि माना जा रहा है कि इन फाइलों में अमेरिका और यूरोप की राजनीति, व्यवसाय, हॉलीवुड और यहां तक कि राजघरानों से जुड़े कुछ बेहद प्रभावशाली लोगों के नाम दर्ज हैं। ऐसे लोग, जिनके राज़ अब तक दबे हुए थे।

कौन था जेफरी एपस्टीन?

जेफरी एपस्टीन एक अरबपति निवेशक था, जिसे 2019 में यौन शोषण और नाबालिग लड़कियों की तस्करी के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। गिरफ्तारी के कुछ समय बाद वह न्यूयॉर्क के मैनहट्टन जेल में संदिग्ध परिस्थितियों में मृत पाया गया। उसकी मौत को आधिकारिक तौर पर आत्महत्या बताया गया, लेकिन आज भी इस पर विवाद बरकरार है।

एपस्टीन पर आरोप था कि वह नाबालिग लड़कियों की सप्लाई का एक संगठित नेटवर्क चलाता था। इसके जरिए वह सत्ता और धन के भूखे रसूखदार लोगों को अपने जाल में फंसाता और बदले में उनके साथ निजी संबंध बनाता था।

क्या है “एपस्टीन फाइल्स स्कैंडल”?

“एपस्टीन फाइल्स” असल में हजारों पन्नों का एक विशाल दस्तावेज़ सेट है—जिसमें पीड़ितों के बयान, गवाहों की गवाही, एफबीआई की रिपोर्ट्स, कोर्ट रिकॉर्ड, फ्लाइट लॉग, पार्टियों की सूची और एपस्टीन के संपर्कों का विवरण शामिल है।पीड़ितों का दावा है कि इन फाइलों में:अमेरिकी अरबपतियों,प्रतिष्ठित

राजनेताओं,सेलिब्रिटीज़,बिजनेसमैनों,और विदेशी

राजघरानोंके नाम शामिल हैं—जो एपस्टीन द्वारा आयोजित पार्टियों और कथित यौन शोषण गतिविधियों से जुड़े थे।इन्हीं फाइलों को छिपाने के लिए अमेरिकी राजनीति में लंबे समय से भारी दबाव बनाया जाता रहा है। पीड़ित वर्षों से इन्हें सार्वजनिक करने की मांग कर रही थीं ताकि अपराधियों को सामने लाया जा सके।

जब ब्रिटिश राजघराने की बुनियाद हिली—प्रिंस एंड्रयू का मामला फेस्टीवल मामले का सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय असर तब देखने को मिला जब ब्रिटेन के प्रिंस एंड्रयू का नाम इस विवाद में सामने आया।आरोपों और जनदबाव के चलते:उनसे रॉयल ड्यूटीज़ वापस ले ली गईं,उनके सैन्य टाइटल छीन लिए गए,और उन्हें प्रभावी तौर पर शाही परिवार से अलग कर दिया गया।यह घटना बताती है कि एपस्टीन की फाइलें किसी भी बड़े नाम को हिला सकती हैं।

ट्रंप और एपस्टीन: रिश्ता, दूरी और बदलता रुखडोनाल्ड ट्रंप का नाम भी एपस्टीन से जुड़ा रहा है।वे दोनों कभी एक ही सामाजिक सर्किल का हिस्सा माने जाते थे, और कई सार्वजनिक कार्यक्रमों में साथ देखे गए। हालांकि बाद में ट्रंप ने कहा कि—

उन्होंने “बहुत पहले” ही एपस्टीन से संबंध तोड़ दिए थे,और एपस्टीन को अपने क्लब से बाहर भी कर दिया था।लेकिन आश्चर्य की बात यह है कि जब फाइल्स जारी करने के लिए बिल पेश हुआ, तो ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी झिझकती दिखी।ट्रंप ने शुरुआत में इसका विरोध भी किया।बाद में अचानक उन्होंने सोशल मीडिया पर यू-टर्न लेते हुए कहा:हमारे पास छिपाने को कुछ नहीं है। फाइल्स जारी होनी चाहिए।”

राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि उनका रुख चुनावी दबाव, पार्टी की छवि और व्यक्तिगत विवादों से बचने की रणनीति का हिस्सा था।ऐसे राज़ जो कई देशों को हिला सकते हैं

विशेषज्ञों का कहना है कि फाइल्स में केवल नाम ही नहीं, बल्कि:किसने कब एपस्टीन के प्राइवेट जेट से यात्रा की,किसने उसके आइलैंड का दौरा किया,किन पार्टियों में क्या-क्या हुआ,किन बड़े नामों से लेन-देन या ‘डील’ हुई,और किसने किस स्तर पर कानून को प्रभावित करने की कोशिश कीजैसे विवरण शामिल हो सकते हैं।यही वजह है कि कई अमेरिकी अरबपति, कंपनियां और राजनीतिक घराने इस खुलासे से चिंतित बताए जा रहे हैं।

अब आगे क्या?

बिल पास हो चुका है।अगर राष्ट्रपति ट्रंप इस पर हस्ताक्षर कर देते हैं, तो:जस्टिस डिपार्टमेंट को फाइलें सार्वजनिक करनी होंगी,मीडिया और जनता उन दस्तावेज़ों को देख सकेगी,और कई हाई-प्रोफाइल व्यक्तियों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।यह अपारदर्शिता से पारदर्शिता की ओर बड़ा कदम माना जा रहा है—

जो अमेरिका ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय सत्ता समीकरणों को भी प्रभावित कर सकता है।

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