बी के झा
NSK

पटना, 21 नवंबर
बिहार की राजनीति में शनिवार का दिन इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया। 10वीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पटना एयरपोर्ट पर स्वयं विदा किया और इस दौरान उनके पैर छूकर आशीर्वाद लिया। यह दृश्य सामने आते ही सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया और इसके साथ ही राजनीतिक बयानबाज़ी भी तेज होने लगी।राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने वीडियो साझा कर नीतीश कुमार पर तीखा हमला बोला, वहीं राजनीतिक विश्लेषकों, वरिष्ठ पत्रकारों और शिक्षाविदों ने इस पूरे घटनाक्रम को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं व्यक्त कीं।
शपथ ग्रहण में ‘गर्मजोशी’, एयरपोर्ट पर दिखा ‘प्रणाम’पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, उनके दोनों उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और विजय कुमार सिन्हा सहित नई कैबिनेट के मंत्रियों ने शपथ ली। इस भव्य कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी उपस्थित थे।मंच पर नीतीश और पीएम मोदी के बीच मुस्कुराहट, संवाद और सहजता से साथ बैठने की तस्वीरें भी खूब चर्चा में रहीं।लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा उस पल की हुई जब शपथ ग्रहण के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार स्वयं प्रधानमंत्री को विदा करने पटना एयरपोर्ट पहुंचे। मुलाक़ात के दौरान वे झुककर पीएम मोदी के पैर छूते नजर आए। मोदी ने उन्हें स्नेह पूर्वक रोकने का प्रयास भी किया, मगर दृश्य कैमरों में दर्ज हो चुका था। यह क्षण वायरल होते ही राजनीतिक गलियारों में नई बहस छिड़ गई।
RJD का तंज—“पहली बार देखा मुख्यमंत्री को प्रधानमंत्री के पांव में झुकते हुए”आरजेडी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एयरपोर्ट का वीडियो पोस्ट करते हुए लिखा—वीडियो में हवाई अड्डे पर प्रधानमंत्री मोदी के पैर छूकर आशीर्वाद लेते मुख्यमंत्री नीतीश कुमार! मुख्यमंत्री का कर्तव्य है कि प्रधानमंत्री को विदा करे, लेकिन किसी राज्य के मुख्यमंत्री को सार्वजनिक स्थल पर प्रधानमंत्री के चरण स्पर्श करते पहली बार देखा गया है।
”वहीं, आरजेडी की तेज तर्रार महिला प्रवक्ता कंचना यादव ने जेडीयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि—मुख्यमंत्री (नीतीश) जी को प्रधानमंत्री के पैरों में गिराने का प्लान संजय झा का ही होगा।उन्होंने एक कदम आगे बढ़ते हुए कहा—सच्चाई तो यह है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जी मेडिकली स्वास्थ्य नहीं हैं, इसलिए वह इस तरह की हरकतें कर रहे हैं।आरजेडी ने तंज कसते हुए कहा कि बिहार चुनाव के बाद बनी नई राजनीतिक तस्वीर कई गंभीर सवाल खड़े करती है।
“समय का चक्र देखिए”—
वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषकों का कटाक्ष एक वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक ने टिप्पणी करते हुए कहा—यही नीतीश कुमार एक समय गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री और वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से आर्थिक मदद लेने से मना कर चुके थे।
लेकिन समय का चक्र देखिए—आज वही नीतीश कुमार उनकी सरकार में रहते प्रधानमंत्री के चरणों में झुक गए।
”विश्लेषकों के अनुसार, यह दृश्य बदलती राजनीतिक परिस्थितियों और मजबूरियों का संकेत माना जा सकता है।
“यह बिहार का संस्कार”—कुछ पत्रकारों व शिक्षाविदों की प्रतिक्रिया कुछ वरिष्ठ पत्रकारों और शिक्षाविदों ने इस दृश्य को सांस्कृतिक संदर्भ में देखते हुए कहा बिहार की धरती का संस्कार है कि छोटा-बड़ा का आदर करता है और आशीर्वाद लेता है। नीतीश जी ने वही किया।
”लेकिन साथ ही उन्होंने यह भी जोड़ा—किसी संवैधानिक पद पर बैठे मुख्यमंत्री का सार्वजनिक मंच पर प्रधानमंत्री के चरण स्पर्श करना न संवैधानिक औचित्य है और न ही राजनीतिक रूप से उचित परंपरा।
प्रधानमंत्री ने भी इस दंडवत प्रणाम से जन्म लेने वाले विवाद को भांपते हुए उन्हें रोकने की कोशिश की।
विपक्ष का आरोप—“नीतीश अब मोदी–शाह की कठपुतली, बिहार की सरकार दिल्ली से चलेगी”विपक्षी दलों ने इस घटना के बहाने भाजपा और जेडीयू पर सीधा हमला बोलते हुए कहाअब नीतीश कुमार सिर्फ मोदी और अमित शाह के इशारों पर चलने वाली कठपुतली रह गए हैं।गृह मंत्रालय से लेकर अधिकांश बड़े मंत्रालय अमित शाह ने अपने कोटे के मंत्रियों को दे दिए हैं। बिहार की सरकार अब दिल्ली में बैठे अमित शाह चलाएंगे।”विपक्ष का मानना है कि सार्वजनिक रूप से चरण स्पर्श का यह दृश्य राजनीतिक संदेश देता है कि नीतीश कुमार अपनी सत्ता की मजबूरी में भाजपा नेतृत्व पर पूरी तरह निर्भर हो चुके हैं।
क्या यह सम्मान था या राजनीति?
बिहार में शुरू हो गई नई बहस
नीतीश कुमार का प्रधानमंत्री को सार्वजनिक रूप से चरण स्पर्श करना—किसी के लिए यह संस्कार और व्यक्तिगत सम्मान था,तो किसी के लिए राजनीतिक अधीनता का प्रतीक।बिहार की राजनीति में पहले भी कई बड़े घटनाक्रम हुए हैं, लेकिन मुख्यमंत्री द्वारा सार्वजनिक मंच पर प्रधानमंत्री को इस तरह प्रणाम करना अभूतपूर्व माना जा रहा है।यह दृश्य न केवल राजनीति को नई दिशा दे रहा है, बल्कि आने वाले दिनों में इसके राजनीतिक संकेत और भी स्पष्ट हो सकते हैं।
RJD प्रवक्ता की तीखी टिप्पणी—कंचना यादव का दो टूक हमला वीडियो वायरल होते ही आरजेडी की तेजतर्रार प्रवक्ता कंचना यादव ने कड़ा रिएक्शन दिया। उन्होंने दोबारा जेडीयू नेता संजय झा पर आरोप दोहराते हुए कहा—मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को प्रधानमंत्री के चरणों में झुकाने की पटकथा संजय झा ने ही लिखी होगी। राजनीतिक निष्ठा साबित करने के लिए ऐसे दृश्य रचे-गढ़े जाते हैं, और यह उसी का परिणाम है।”
उन्होंने आगे कहा—सच्चाई यह है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सेहत अब पहले जैसी नहीं रही। कई बार ऐसे व्यवहार उनकी अस्थिर स्वास्थ्य स्थिति का संकेत देते हैं। यह दृश्य उसी असंतुलन की झलक भी हो सकता है।”उनकी टिप्पणी ने राजनीतिक गलियारों में एक नई बहस को जन्म दे दिया है। यह आरोप न केवल नीतीश कुमार की वर्तमान राजनीतिक स्थिति पर सवाल उठाते हैं, बल्कि जेडीयू के भीतर सत्ता समीकरणों को लेकर भी गंभीर संकेत देते हैं।


