राम मंदिर ध्वजारोहण से पहले दुल्हन-सी सजी अयोध्या, गेट नंबर–11 से प्रधानमंत्री मोदी करेंगे एंट्री, 8 हजार अतिथियों के स्वागत को तैयार रामनगरी विपक्ष ने भी कार्यक्रम पर जताई अपनी राजनीतिक प्रतिक्रिया

बी के झा

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नई दिल्ली / अयोध्या, 24 नवंबर

अयोध्या, रामभक्ति की अनंत धारा में नहाई हुई—25 नवंबर को एक बार फिर इतिहास साक्षी बनने जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज राम मंदिर के शिखर पर भगवा ध्वज फहराकर भव्य ध्वजारोहण समारोह का शुभारंभ करेंगे। मंदिर परिसर, रामपथ और संपूर्ण अयोध्या दुल्हन-सी सजकर तैयार है। सुरक्षा, व्यवस्था, सांस्कृतिक रंग और आस्था…

सब कुछ चरम पर है।

प्रधानमंत्री मोदी का मार्ग तय—गेट नंबर 11 से ‘शंकराचार्य प्रवेश द्वार’ से प्रवेश पीएम मोदी का आगमन अयोध्या एयरपोर्ट पर होगा, जहां से वे हेलीकॉप्टर द्वारा साकेत महाविद्यालय के मैदान पर उतरेंगे।इसके बाद उनका काफिला गेट नंबर 11, जिसे शंकराचार्य प्रवेश द्वार नाम दिया गया है, से राम मंदिर परिसर में प्रवेश करेगा।यह मार्ग पूरी तरह वीवीआईपी रूट के रूप में आरक्षित है, जहां सुरक्षा एजेंसियों ने विशेष व्यवस्था की है।8 हजार श्रद्धेय अतिथियों के लिए बना ‘सीटिंग प्लान’, रंगों में सजा परिसर ध्वजारोहण समारोह केवल आध्यात्मिक नहीं, बल्कि एक विशाल सांस्कृतिक आयोजन में बदल गया है।

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के महासचिव चंपतराय ने बताया—8,000 आमंत्रित अतिथियों के लिए 19 ब्लॉकों में कुर्सियां लग चुकी हैं।प्रत्येक ब्लॉक का अलग रंग का पंडाल होगा, जिससे अतिथियों को अपने क्षेत्रानुसार पहचान आसान रहे।पांच–पांच जनपदों को एक-एक रंग आवंटित किया गया है।संयोजक–सह संयोजक टीम जलपान, प्रसाद, दर्शन और समस्या समाधान की जिम्मेदारी संभालेगी।मंदिर परिसर में कुर्सियों की पंक्तियाँ मानो दिव्य उत्सव की पूर्व सूचना दे रही हों।

सुरक्षा छावनी में बदली अयोध्या—एसपीजी, एटीएस, एसटीएफ तैनात ध्वजारोहण से पहले सुरक्षा तैयारी अपने चरम पर है।एसपीजी पहले से ही अयोध्या में डेरा डाले हुए है। रविवार को पीएम का स्कॉट और सीएम योगी आदित्यनाथ की सुरक्षा टीम भी जिले में पहुंच गई।सुरक्षा के मुख्य बिंदु:लगभग 15 किलोमीटर के दायरे में चप्पे–चप्पे पर सुरक्षा तैनाती एटीएस, एसटीएफ, स्वाट, पैरामिलिट्री फ़ोर्स की तैनाती शहर के चौक–चौराहों पर सघन तलाशी और चेकिंग सेना के हेलीकॉप्टर द्वारा मंदिर परिसर और गलियारों का हवाई सर्वेक्षण पांच दिवसीय अनुष्ठान के चलते मंदिर के आसपास अतिरिक्त पिकेट

अयोध्या इस समय सुरक्षा की वह संरचना दिखा रही है, जो देश के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में से एक से मेल खाती है।5 दिवसीय अनुष्ठान—महाआयोजन को दे रहा आध्यात्मिक आधार ध्वजारोहण से पहले मंदिर परिसर में जारी पांच दिवसीय अनुष्ठान ने धार्मिक वातावरण को और पवित्र बना दिया है।वेदमंत्रों की ध्वनि, घंटों–घड़ियालों की मधुर लय और श्रद्धालुओं की भीड़ यह संकेत दे रही है कि अयोध्या एक बार फिर अपनी सनातन पहचान के शिखर पर है।विपक्ष की प्रतिक्रियाएँ—

सियासत ने जताए अपने स्वरइस ऐतिहासिक धार्मिक आयोजन ने जहाँ करोड़ों रामभक्तों में उत्साह जगाया,

वहीं विपक्ष ने अपनी राजनीतिक आपत्तियाँ दर्ज कराई हैं।

कांग्रेस

कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया—“अयोध्या में धार्मिक आयोजन को चुनावी मंच बनाया जा रहा है। मंदिर भाजपा की संपत्ति नहीं, देश की आस्था का केंद्र है।”

समाजवादी पार्टी (सपा)सपा ने कहा—“ध्वजारोहण का समय और तरीका जनता को संदेश देने के लिए चुना गया है। भाजपा राम नाम का राजनीतिक इस्तेमाल बंद करे।

”आरजेडी

आरजेडी ने दो टूक टिप्पणी की—“भीड़, सुरक्षा और भव्य आयोजन से ज्यादा जरूरी है कि रामराज्य की अवधारणा, यानी जनता के कल्याण पर सरकार काम करे।”हालांकि विपक्ष के इन बयानों का जनता में सीमित प्रभाव दिख रहा है, क्योंकि अधिकांश लोग आयोजन को धार्मिक उत्सव के रूप में देख रहे हैं।

निष्कर्ष :

ध्वजरोहण से पहले अयोध्या में उत्सव, राजनीति के स्वर भी तेज रामनगरी अयोध्या एक बार फिर इतिहास के शिखर पर खड़ी है—धर्म, आस्था, सुरक्षा, संस्कृति और राजनीति… सब एक साथ इस आयोजन का हिस्सा बन गए हैं।

प्रधानमंत्री का यह दौरा—धार्मिक दृष्टि से भव्य सांस्कृतिक दृष्टि से ऐतिहासिक राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण होने जा रहा है।

अयोध्या आज तैयार है—राम ध्वज के उस क्षण के लिए, जिसका इंतजार सैकड़ों वर्षों से था।

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