राज्यसभा की विशेषाधिकार समिति की अहम बैठक: जयराम रमेश बनाम जगदीप धनखड़—संसद में गरमाई सियासत, भाजपा ने कसा तंज, विश्लेषकों ने उठाए बड़े सवाल

बी के झा

NSK

नई दिल्ली, 24 नवंबर

राज्यसभा की विशेषाधिकार समिति ने सोमवार को संसद भवन परिसर में एक महत्वपूर्ण बैठक की, जिसने देश की राजनीतिक हलचल को नई दिशा दी। बैठक का केंद्रबिंदु कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद जयराम रमेश के खिलाफ दायर वह गंभीर शिकायत रही, जिसमें उन पर तत्कालीन सभापति और पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के प्रति बार-बार, जानबूझकर और अपमानजनक टिप्पणी करने का आरोप है। शिकायत में यह भी कहा गया है कि रमेश ने सार्वजनिक रूप से सभापति की निष्पक्षता पर सवाल उठाकर सदन की गरिमा को ठेस पहुँचाई है।समिति की बैठक में क्या हुआ?

उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में शिकायत से जुड़े तथ्यों को विस्तार से रखा गया। बैठक सुबह 11 बजे शुरू हुई और समिति ने ऐलान किया कि जल्द ही जयराम रमेश को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर अपना पक्ष रखने के लिए समन भेजा जाएगा।समिति चाहती है कि रमेश स्वयं बताएं—उनकी टिप्पणियों की मंशा क्या थी?क्या यह जानबूझकर सदन के अधिकारी के सम्मान को ठेस पहुँचाने की कोशिश थी?क्या उन्होंने संसद के नियमों और परंपराओं का उल्लंघन किया?संसदीय प्रक्रिया में यह एक गंभीर मामला माना जाता है, क्योंकि सभापति की निष्पक्षता पर सवाल उठाना सीधे-सीधे सदन की प्रतिष्ठा से जुड़ा होता है।भाजपा ने कांग्रेस पर साधा सीधा निशाना

बीजेपी ने इस पूरी घटना को कांग्रेस की “राजनीतिक हताशा” बताया है। पार्टी प्रवक्ता ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा—“जयराम रमेश जैसे वरिष्ठ नेता से अपेक्षा रहती है कि वे मर्यादा रखें। लेकिन कांग्रेस अब जनादेश और संसद दोनों के प्रति असम्मान की राजनीति पर उतर आई है। धनखड़ जी की निष्पक्षता पर सवाल उठाना जनता के फैसले और संविधान की गरिमा, दोनों का अपमान है।”एक अन्य भाजपा सांसद ने इसे “निराधार और निचले स्तर की राजनीति” बताया और कहा—“कांग्रेस अपनी गिरती राजनीतिक जमीन को भाषा की तल्खी से नहीं बचा पाएगी।”राजनीतिक विश्लेषकों ने भी जताई चिंता राजनीतिक

विशेषज्ञों ने इस मामले को महज ‘टिप्पणी विवाद’ नहीं बताया बल्कि संसदीय मर्यादाओं के क्षरण की गंभीर मिसाल मानते हुए कहा—

1. “पिछले कुछ वर्षों में संसद में भाषा, व्यवहार और आचरण के स्तर में गिरावट आई है।”

2. “सभापति की निष्पक्षता पर सवाल उठाना बड़ी राजनीतिक रणनीति का हिस्सा भी हो सकता है।

”3. “यह विवाद संसद की वर्तमान राजनीतिक खाई को और गहरा कर सकता है।”एक वरिष्ठ विश्लेषक ने कहा—“राज्यसभा वह सदन है जो संयम और परंपरा के लिए जाना जाता है। जब वरिष्ठ सांसद इस मर्यादा को तोड़ते हैं, तो संदेश बेहद नकारात्मक जाता है।”सदन की तीन अन्य समितियों की अहम बैठकें भी आयोजित इसी दिन संसद की तीन अन्य स्थायी समितियों ने भी महत्वपूर्ण मुद्दों पर विचार-विमर्श किया:

1. संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी समिति मीडिया से जुड़े कानूनों के क्रियान्वयन की समीक्षा सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय और प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया के सुझाव

2. कोयला, खान एवं इस्पात समितिसेल की संगठनात्मक संरचना और प्रदर्शन पर विस्तृत साक्ष्यइस्पात मंत्रालय के अधिकारियों से चर्चा

3. रसायन एवं उर्वरक समितिदेश में दवाइयों की बढ़ती कीमतों पर NPPA की भूमिका की समीक्षाऔषधि विभाग के शीर्ष प्रतिनिधियों के मौखिक साक्ष्यविशेषाधिकार समिति की भूमिका—क्यों अहम है यह मामला?यह समिति राज्यसभा के 10 वरिष्ठ सदस्यों से मिलकर बनी होती है और इसका काम है—विशेषाधिकार हनन के आरोपों की जाँच करना यह तय करना कि उल्लंघन हुआ या नहीं यदि हुआ है, तो उचित दंड या कार्रवाई का सुझाव देनाऔर जरूरत पड़ने पर सिफारिशों के क्रियान्वयन की प्रक्रिया भी बताना जयराम रमेश पर दर्ज शिकायत इस समिति के लिए एक उच्च प्रोफ़ाइल संवेदनशील मामला बन गई है।निष्कर्ष: मामला सिर्फ एक शिकायत नहीं, संसदीय संस्कृति की परीक्षा भी है जयराम रमेश को समन भेजने की तैयारी, भाजपा का तीखा रुख, और राजनीतिक विश्लेषकों की चिंता—

सभी इस बात की ओर संकेत करते हैं कि यह विवाद आने वाले दिनों में संसद की राजनीति को और तेज़, और टकराव पूर्ण बना सकता है।राज्यसभा की परंपरा, सभापति की प्रतिष्ठा और सांसदों की जवाबदेही—इन तीनों की अग्नि परीक्षा अब इस मामले से होगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *