बी के झा
NSK

नई दिल्ली/पटना, 25 नवंबर
बिहार में नई एनडीए सरकार के गठन के साथ ही सत्ता के गलियारे में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। प्रशासनिक फेरबदल के बीच सबसे बड़ा राजनीतिक विवाद उस समय सामने आया जब पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी को उनका दशकों पुराना सरकारी आवास—10, सर्कुलर रोड—खाली करने का आदेश जारी हुआ।भवन निर्माण विभाग ने आधिकारिक रूप से उन्हें नया आवास 39, हार्डिंग रोड आवंटित कर दिया है। यह बदलाव विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष के तौर पर उनकी वर्तमान हैसियत के अनुरूप किया गया है।भाजपा का तंज—“इस बार सरकारी संपत्ति सुरक्षित रहनी चाहिए”आदेश जारी होते ही राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया।भाजपा प्रवक्ता नीरज कुमार ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा—“
यदि राबड़ी देवी जी को आवास खाली करने का आदेश मिला है, तो उन्हें तुरंत वह आवास खाली कर देना चाहिए। हमें उम्मीद है कि इस बार वह अपने परिवार की परंपरा को आगे नहीं बढ़ाएंगी। सरकारी संपत्ति को कोई नुकसान नहीं होगा, और बाथरूम की टोटी तक सुरक्षित रहे, क्योंकि हमारी नजर पैनी है।”यह टिप्पणी आग में घी का काम कर गई और राजनीतिक तापमान अचानक बढ़ गया।राबड़ी आवास विवाद बना नया राजनीतिक तूफ़ान राबड़ी देवी का 10 सर्कुलर रोड, लालू-राबड़ी परिवार की राजनीति का दशकों पुराना केंद्र रहा है।जैसे ही आवास खाली करने की खबर आई, विपक्ष समेत कई सियासी हलक़ों में इसे राजनीतिक बदले की भावना से जोड़कर देखा जाने लगा।विशेष रूप से तब जब हाल ही में तेजस्वी यादव द्वारा परिवार की एक सदस्य को लेकर विवादित घटनाक्रम सामने आया था, उसी बेटी—
रोहिणी आचार्या—ने X (पूर्व ट्विटर) पर खुलकर नीतीश कुमार पर हमला बोला।उन्होंने लिखा कि सत्ता बदलते ही “सियासी प्रतिशोध” की शुरुआत हो गई है।सेक्युलर दलों का आरोप—“नीतीश सत्ता के उन्माद में हैं”कई विपक्षी और सेक्युलर राजनीतिक दलों ने भी इस निर्णय की तीखी आलोचना की।राजनीतिक विश्लेषक इसे संयोग नहीं, बल्कि संकेत मान रहे हैं—कि नई सरकार लालू परिवार पर दबाव बढ़ाने की रणनीति अपना रही है।
विश्लेषकों का कहना है—“10 सर्कुलर रोड से राबड़ी देवी को हटाना महज आवास आवंटन का मामला नहीं, बल्कि सत्ता परिवर्तन के बाद राजनीतिक वर्चस्व दिखाने का तरीका है। यह आने वाले दिनों में बिहार की राजनीति को और विभाजित कर सकता है।”नीतीश सरकार पर ‘राजनीतिक खुन्नस’ का आरोप विपक्ष का दावा है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपने पुराने गठबंधन सहयोगी—लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार—के प्रति “दबी खुन्नस” निकाल रहे हैं।तेजस्वी यादव के साथ कई चरणों में बीते विवादों और सत्ता परिवर्तन को देखते हुए यह कदम “राजनीतिक संदेश” के तौर पर भी देखा जा रहा है।क्या बनेगी नई राजनीतिक कहानी?
बिहार की राजनीति में हर बदलाव एक नई कहानी जन्म देता है।राबड़ी देवी को 10 सर्कुलर रोड खाली कराना सिर्फ एक प्रशासनिक फैसला नहीं, बल्कि नई सरकार की प्राथमिकताओं, टोन और राजनीतिक दिशा को स्पष्ट रूप से दर्शाता है।अब सबकी निगाहें इस बात पर टिक गई हैं—
क्या राबड़ी देवी शांति से आवास खाली करेंगी, या बिहार राजनीति में यह विवाद एक बड़े संघर्ष में बदल जाएगा?
