बी के झा
NSK

नई दिल्ली, 10 अक्टूबर
सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार को दिल्ली-एनसीआर में पटाखों पर लगे प्रतिबंध और ‘हरित पटाखों’ के उपयोग को लेकर अहम सुनवाई हुई। इस दौरान अदालत में माहौल तब हल्का हो गया जब केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा —अगर दो घंटे का समय दिया जाता है, तो एक घंटा तो माता-पिता को समझाने में ही चला जाता है! हम सब भी तो बच्चे थे, मीलॉर्ड!”उनकी यह बात अदालत में मौजूद सभी के चेहरे पर मुस्कान ले आई, लेकिन मुद्दा बेहद गंभीर था — दिल्ली-एनसीआर की प्रदूषित हवा और त्योहारों के दौरान बढ़ते AQI स्तर को लेकर।मामला क्या हैमुख्य न्यायाधीश बी. आर. गवई और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ ‘हरित पटाखों’ के निर्माण, बिक्री और उपयोग से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। एनसीआर के राज्यों — दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान — ने कोर्ट से आग्रह किया कि कुछ सख्त शर्तों के साथ हरित पटाखे जलाने की अनुमति दी जाए।राज्यों की दलील थी कि ये पटाखे केवल राष्ट्रीय पर्यावरण अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान (NEERI) द्वारा प्रमाणित हों और उनकी बिक्री पर सख्त निगरानी रखी जाए।त्योहारों के लिए समय सीमा का सुझावएनसीआर राज्यों ने अदालत को सुझाव दिया कि:दिवाली पर रात 8 बजे से 10 बजे तक ही पटाखे जलाने की अनुमति दी जाए।क्रिसमस और न्यू ईयर ईव पर रात 11:55 से 12:30 बजे तक सीमित अवधि के लिए अनुमति हो।किसी भी ई-कॉमर्स वेबसाइट को ऑनलाइन पटाखों के ऑर्डर स्वीकार करने की अनुमति न दी जाए।राज्यों का कहना है कि यह संतुलित समाधान होगा — परंपरा भी निभे और प्रदूषण नियंत्रण भी बना रहे।CJI गवई का सवाल — “क्या पहले प्रदूषण कम था?”सुनवाई के दौरान CJI गवई ने सवाल उठाया,क्या 2018 में प्रदूषण (AQI) 2024 की तुलना में कम था?”इस पर तुषार मेहता ने जवाब दिया,केवल कोविड के दौरान यह कम हुआ था, अन्यथा हमेशा लगभग समान ही रहा है। ऐसा कोई रिकॉर्ड नहीं है जो दिखाए कि पटाखों के कारण ही प्रदूषण बढ़ा।”उन्होंने अदालत से कहा कि “पूर्ण प्रतिबंध के बजाय सीमित समय में अनुमति दी जानी चाहिए,” ताकि लोग अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं को निभा सकें।हरियाणा की दलील — ‘बिना सुनवाई प्रतिबंध’वरिष्ठ अधिवक्ता के. परमेश्वर, जो हरियाणा का पक्ष रख रहे थे, ने अदालत से कहा,आधे हरियाणा पर तो बिना सुनवाई के ही प्रतिबंध लगा दिया गया है। एनसीआर का विस्तार इतना बड़ा है कि इसका प्रभाव अन्य जिलों पर भी पड़ रहा है।”उन्होंने कहा कि राज्य सरकारें हरित पटाखों के नियमन के लिए तैयार हैं, परंतु blanket ban (पूर्ण प्रतिबंध) उचित नहीं। हरित पटाखों का मतलब क्या है‘हरित पटाखे’ (Green Crackers) ऐसे पटाखे हैं जिनमें कम मात्रा में सल्फर और अन्य विषैले रसायन होते हैं।इनसे 30% तक कम प्रदूषण होता है और इन्हें केवल NEERI की मंजूरी के बाद ही बनाया या बेचा जा सकता है।सुप्रीम कोर्ट ने 26 सितंबर 2025 को ही यह आदेश दिया था कि प्रमाणित निर्माता हरित पटाखे बना सकते हैं, लेकिन उन्हें दिल्ली-एनसीआर में बिना मंजूरी बेचने की अनुमति नहीं है। कोर्ट ने क्या कहासुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल किसी भी पक्ष को राहत नहीं दी है और कहा है कि वह सभी दलीलों को सुनने के बाद ही कोई आदेश पारित करेगी।CJI गवई ने कहा कि “यह मुद्दा भावनाओं और पर्यावरण दोनों से जुड़ा है, इसलिए हमें संतुलन बनाना होगा।” त्योहार बनाम प्रदूषण — हर साल की बहस फिर शुरूदिवाली नजदीक आते ही दिल्ली-एनसीआर में पटाखों पर बहस एक बार फिर तेज हो गई है।एक ओर परंपरा और त्योहारी उल्लास है, तो दूसरी ओर दमघोंटू धुंध से जूझता शहर।तुषार मेहता का “हम भी तो बच्चे थे, मीलॉर्ड!” वाला बयान इस बहस को एक मानवीय मोड़ जरूर दे गया,पर अब सबकी निगाहें सुप्रीम कोर्ट के अगले फैसले पर टिकी हैं।
