बी के झा
NSK

नई दिल्ली/ पटना, 29 नवंबर
पटना में पूर्व मुख्यमंत्री और विधान परिषद में विपक्ष की नेता राबड़ी देवी का सरकारी आवास बदलने के आदेश पर नई राजनीतिक बहस शुरू हो गई है। RJD से निष्कासित बागी नेता रितु जायसवाल ने इसे सीधे-सीधे RJD की मौजूदा कमजोरी और JDU–RJD गठबंधन की संभावनाओं के खत्म होने से जोड़ते हुए बड़ा सवाल खड़ा किया है।
रितु जायसवाल का आरोप: “अगर 25 सीटों पर ना सिमटती RJD, तो ये कार्रवाई नहीं होती”रितु जायसवाल ने सोशल मीडिया पर लिखा—“अगर पार्टी महज़ 25 सीटों पर सिमट न जाती,अगर JDU से दोबारा गठबंधन की उम्मीद रह जाती,तो क्या सरकार 10, सर्कुलर रोड का बंगला खाली करा पाती?”उनका इशारा साफ है—RJD मजबूत होती या सरकार से संभावित तालमेल की कोई संभावना बची होती, तो राजनीतिक साहस नहीं होता।राज्य सरकार ने राबड़ी देवी को 10, सर्कुलर रोड वाला प्रतिष्ठित आवास खाली कर 39, हार्डिंग रोड वाले नए आवास में शिफ्ट होने का आदेश दिया है।यह वही हार्डिंग रोड परिसर है जहाँ लालू यादव पहले से रहते हैं, और यह आवास विपक्ष की नेता के पद के अनुसार आवंटित है।
10, सर्कुलर रोड का महत्व यह आवास न सिर्फ RJD परिवार का राजनीतिक केंद्र रहा है, बल्कि इसी सड़क के सामने कुछ दूरी पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का आवास भी पड़ता है।राबड़ी देवी का यह घर 2005 में सत्ता गंवाने के बाद से ही लालू परिवार का मुख्य निवास रहा है।इसे खाली कराने का आदेश सिर्फ प्रशासनिक नहीं, एक राजनीतिक संकेत भी माना जा रहा है।
रितु जायसवाल क्यों हमलावर हैं?बिहार चुनाव में RJD ने उन्हें टिकट नहीं दिया था। वे बागी होकर लड़ीं और 65,455 वोट लाकर दूसरे स्थान पर रहीं।अब वे लगातार पार्टी नेतृत्व पर सवाल उठा रही हैं—टिकट वितरणसंगठन की कमजोरीचुनावी रणनीतिनेतृत्व की पकड़उनके ताज़ा ट्वीट को RJD के अंदरूनी असंतोष का एक और संकेत माना जा रहा है।
निर्दलीयों में सबसे आगे रहीं रितु बिहार चुनाव 2025 में चार निर्दलीय उम्मीदवार उपविजेता बने।सबसे अधिक वोट रितु जायसवाल को मिले: 65,455 (परिहार)सिकटा में JDU बागी फिरोज़ अहमद ने 50,029 वोट पाएकुशेश्वरस्थान में गणेश भारती को 49,244मोहनिया में रविशंकर पासवान को 57,538 वोटइनमें से तकनीकी रूप से दो उम्मीदवार महागठबंधन समर्थित थे, लेकिन रितु और फिरोज़ पूरी तरह स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़कर बड़े दलों को पीछे छोड़ गए।
राजनीतिक विश्लेषकों का मत
राजनीतिक विश्लेषक प्रो. अजय कुमार“राबड़ी आवास मुद्दा सिर्फ प्रशासनिक फैसले की तरह नहीं देखा जा सकता। यह सत्ता-समीकरणों और विपक्ष की घटती ताकत को दर्शाता है।”
वरिष्ठ पत्रकार रीतेश सिंह“RJD की 25 सीटें उन्हें राजनीतिक रूप से कमजोर बनाती हैं। सरकार ऐसे निर्देश अब इसलिए दे पा रही है क्योंकि RJD अब ‘भावी सहयोगी’ की श्रेणी में नहीं है।”
पॉलिटिकल स्ट्रेटेजिस्ट निधि चौधरी“
रितु जायसवाल का बयान पार्टी के भीतर और बाहर दोनों जगह मौजूद असंतोष को उजागर करता है। यह RJD नेतृत्व के लिए चेतावनी है।”
विपक्ष का हमला RJD ने इस आदेश को “राजनीतिक प्रतिशोध” बताया।
RJD नेताओं का कहना है—“सरकार विपक्ष की आवाज कमजोर करने की कोशिश कर रही है। बंगला बदली का समय संदिग्ध है।”कांग्रेस ने भी इसे “अनुचित जल्दबाजी” कहा।वहीं जेडीयू ने जवाब दिया—“यह नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया है, इसका राजनीति से कोई लेना-देना नहीं।”
निष्कर्ष
राबड़ी देवी का आवास बदलने के आदेश और उस पर रितु जायसवाल का सवाल—दोनों मिलकर बिहार की राजनीति में नई हलचल पैदा कर रहे हैं।यह बहस केवल एक घर बदलने की नहीं, बल्कि—विपक्ष की ताकत सत्ता का दबदबा गठबंधन की संभावनाएँ और RJD की आंतरिक स्थिति—इन सबकी दिशा तय करेगी।
