बी के झा
NSK

बुलंदशहर / खुर्जा (यूपी) 1 दिसंबर
र्खुर्जा प्राचीन हनुमान टीला मंदिर के सामने स्थित मकान की बिक्री ने खुर्जा नगर में अचानक सियासी और सामाजिक सरगर्मी बढ़ा दी है। हिंदू बहुल इस इलाके में एक मुस्लिम व्यक्ति द्वारा खरीदे गए मकान का मुद्दा स्थानीय लोगों ने ‘लैंड जिहाद’ के आरोपों के साथ उठाया, जिसके बाद दर्जनों घरों पर “मकान बिकाऊ है” के पोस्टर लग गए।सड़क पर धरना, मंदिर परिसर में प्रदर्शन और मोहल्ले में लगातार बढ़ती बेचैनी ने रविवार की शाम को पुलिस प्रशासन को भी हरकत में ला दिया।
बेचने वाले बोले—“सालभर से खरीदार नहीं मिल रहा था”विवादित मकान के मालिक प्रदीप शर्मा ने बताया कि वे पिछले एक साल से आर्थिक संकट के चलते मकान बेचना चाह रहे थे।उनके अनुसार—कई लोगों से बात की, पर किसी ने खरीदा नहीं। मजबूरी में सलीम को बेचा। इसमें किसी तरह की दुर्भावना नहीं थी।”उन्होंने यह भी कहा कि वे इस मामले को अनावश्यक रूप से साम्प्रदायिक रंग दिए जाने से दुखी हैं।खरीदार सलीम बोले—“कब्जा नहीं लिया, विरोध है तो मकान वापस कर दूँगा”मकान खरीदने वाले सलीम उर्फ बब्लू ने भी पूरे विवाद को शांत करने का प्रयास किया।उनका कहना है—मैंने अभी कब्जा नहीं लिया है। लोग नहीं चाहते तो मैं यहाँ रहने नहीं आऊँगा। जिसे भी लेना हो ले सकता है।”सलीम की यह घोषणा मोहल्ले में एक राहत की तरह दिखी, लेकिन विरोध समाप्त नहीं हुआ।
स्थानीय हिंदू संगठनों की कड़ी आपत्ति मामले को लेकर स्थानीय हिंदू संगठनों ने खुलकर विरोध जताया। “श्री हनुमान सेवा समिति” और “हिंदू सुरक्षा दल” के पदाधिकारियों ने कहा कि यह केवल एक मकान की खरीद नहीं, बल्कि मंदिर के सामने सांस्कृतिक संतुलन बदलने का प्रयास है।एक स्थानीय संगठन के नेता ने कहा—
यह इलाका सदियों से हनुमान मंदिर की परंपरा से जुड़ा है। अचानक पहचान बदलने की कोशिश हमारी आस्था पर चोट है। हम शांतिपूर्ण तरीके से विरोध जारी रखेंगे।”प्रदर्शनकारी लोगों ने मंदिर में “धर्म रक्षा” और “संस्कृति बचाओ” जैसे प्लेकार्ड लेकर नारे लगाए।
राजनीतिक प्रतिक्रिया—“मुद्दे को अनावश्यक भड़काया जा रहा” या “लोगों की भावना को समझो”मामले पर राजनीतिक विश्लेषकों की राय बंटी हुई है।
राजनीतिक विश्लेषक 1 — विकास मिश्रा यह मामला स्थानीय सामाजिक असुरक्षा से उपजा है। चुनावी मौसम में ऐसे मुद्दों को हवा मिल जाती है। प्रशासन को पहले ही समुदायों से संवाद करना चाहिए था।
”राजनीतिक विश्लेषक 2 — नूतन सिंहलोगों की भावना वास्तविक है। मंदिर के सामने कोई भी बदलाव संवेदनशील बन जाता है। यह केवल सांप्रदायिकता नहीं, बल्कि सांस्कृतिक पहचान का प्रश्न भी है।कुछ विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि इस मामले को “राजनीतिक लाभ के लिए हवा दी जा रही है”, जबकि सत्तापक्ष से जुड़े लोग इसे “स्थानीय निवासियों की असली चिंताओं का प्रतिबिंब” बता रहे हैं।एसएसपी का स्पष्ट बयान—“पलायन जैसी कोई स्थिति
नहीं”बुलंदशहर के एसएसपी दिनेश कुमार सिंह ने स्थिति को सामान्य बताते हुए अफवाहों पर विराम लगाने की कोशिश की।उन्होंने कहा—प्रदीप शर्मा ने मकान 17 अक्टूबर 2025 को बेचा था। अभी भी वही अपने परिवार के साथ उस मकान में रह रहे हैं।इलाके में पलायन जैसी कोई बात सामने नहीं आई है।पुलिस लगातार क्षेत्र में गश्त कर रही है और कहा गया है कि कानून-व्यवस्था पूरी तरह नियंत्रित है।इलाके में तनाव नहीं, लेकिन बेचैनी बरकरार प्रशासन
के बयान और सलीम के पीछे हटने के संकेत ने तनाव कम किया है, लेकिन माहौल अभी भी सामान्य नहीं कहा जा सकता।स्थानीय लोग अपनी “आस्था की सुरक्षा” का मुद्दा उठाते हुए चाहते हैं कि भविष्य में इस तरह की बिक्री पर समाज को विश्वास में लिया जाए।
निष्कर्ष
यह मामला केवल एक प्रॉपर्टी ट्रांजैक्शन का नहीं, बल्कि आस्था, पहचान और सामाजिक संरचना से जुड़े भावनात्मक आयामों का प्रतीक बन गया है। प्रशासन की फुर्ती, समुदायों के बीच संवाद और संवेदनशीलता ही आने वाले दिनों में स्थिति को स्थायी रूप से शांत कर सकते हैं।
