बी के झा
NSK

नई दिल्ली/इस्लामाबाद/रावलपिंडी ,, 2 दिसंबर
पाकिस्तान की राजनीति एक बार फिर उथल-पुथल के भंवर में खड़ी है। अदियाला जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री और पीटीआई प्रमुख इमरान खान ने अपनी बहन से मुलाकात के दौरान पहली बार बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने साफ शब्दों में कहा—
“मेरा मेंटल टॉर्चर किया जा रहा है… और इसके पीछे फील्ड मार्शल असीम मुनीर हैं।”सरकार द्वारा एक महीने बाद दी गई मुलाकात की अनुमति ने जेल की चुप्पी को तोड़ा, लेकिन जो बातें बाहर आईं, उन्होंने पाकिस्तान की सत्ता संरचना और मानवाधिकारों पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।25–35 मिनट की मुलाकात, पर खुलासे भारी
उजमा खान नियाजी ने बताया कि उनका भाई शारीरिक रूप से फिट, मानसिक रूप से मज़बूत और बेहद गुस्से में दिखाई दिया।स्रोतों के मुताबिक, इमरान खान ने बहन से कहा:“कमरे से बाहर निकलने नहीं दिया जाता।”“हर गतिविधि पर कड़ी निगरानी है।”“मुझ पर मानसिक दबाव डालने के प्रयास किए जा रहे हैं।”इमरान खान ने सेना प्रमुख असीम मुनीर का नाम लेकर यह भी कहा कि वर्तमान व्यवस्था उन्हें “मानसिक रूप से तोड़ने” के इरादे से काम कर रही है।जेल के बाहर इमरान की बहनों का मोर्चा—हजारों समर्थक सड़क पर पिछले एक महीने से मुलाकात की इजाजत न मिलने के बाद इमरान खान की बहनों ने अदियाला जेल के बाहर विरोध प्रदर्शन शुरू किया था।
सोशल मीडिया पर लाइव वीडियो, बड़े-बड़े प्लेकार्ड और “रिहाई दो” के नारे—स्थिति ने अचानक राजनीतिक उबाल पैदा कर दिया।मंगलवार को पीटीआई ने बड़े पैमाने पर प्रदर्शन का ऐलान किया था।स्रोतों के अनुसार, शहबाज सरकार को आशंका थी कि प्रदर्शन काबू से बाहर हो सकता है, जिसके बाद दबाव में आकर परिवार को मुलाकात की अनुमति दी गई।रावलपिंडी और इस्लामाबाद में धारा 144 लागू सरकार ने विरोध को रोकने के लिए दोनों शहरों में धारा 144 लागू कर दी।गृह राज्य मंत्री तलाल चौधरी ने कहा—“कानून हाथ में लेने की इजाजत किसी को नहीं दी जाएगी। धारा 144 का सख्ती से पालन कराया जाएगा।”इसके बावजूद पीटीआई समर्थकों के बीच नाराज़गी चरम पर बनी हुई है।इमरान खान की गिरफ्तारी—
कानून या राजनीति?
72 वर्षीय पूर्व प्रधानमंत्री अगस्त 2023 से जेल में हैं।वे कई मामलों में सज़ा पा चुके हैं—तोषखाना मामला**साइफर केस (10 साल)अल-कादिर ट्रस्ट केस (14 साल)**इमरान खान का दावा है कि 2022 में अविश्वास प्रस्ताव के बाद उन्हें सत्ता से हटाने के लिए राजनीतिक साज़िश रची गई और सभी मुकदमे उसी साज़िश का हिस्सा हैं।
विशेष राजनीतिक विश्लेषण
१. पाक राजनीति में ‘सामरिक वर्चस्व’ की वापसीवरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि इमरान खान की गिरफ्तारी और उनके खिलाफ कठोर रुख यह संकेत देता है कि पाकिस्तान की सत्ता व्यवस्था में फिर से सैन्य वर्चस्व बढ़ रहा है।
इस्लामाबाद के वरिष्ठ विश्लेषक डॉ. अब्दुल क़य्यूम कहते हैं—“इमरान खान सेना के साथ टकराव का रास्ता चुनने वाले दुर्लभ नेताओं में हैं। मौजूदा परिस्थितियों में उनके आरोप राजनीतिक भूचाल ला सकते हैं।”
२. विपक्षी दलों की प्रतिक्रिया—‘नाटक’ बनाम ‘मानवाधिकार उल्लंघन’पीएमएल-एन (शहबाज शरीफ का दल) ने इमरान के आरोपों को राजनीतिक ड्रामा बताया।उनका कहना है कि इमरान खान ने हमेशा संस्थाओं के खिलाफ बयानबाज़ी की है, अब न्याय प्रक्रिया से बचने के लिए ‘मेंटल टॉर्चर’ का हवाला दे रहे हैं।पीपीपी ने अधिक संतुलित प्रतिक्रिया देते हुए कहा—
“किसी भी कैदी के मानवाधिकारों का उल्लंघन नहीं होना चाहिए। अगर टॉर्चर के आरोप हैं तो जांच होनी चाहिए।”पीटीआई नेताओं ने साफ कहा है—“इमरान खान पाकिस्तान की आवाज़ हैं। उन्हें चुप कराने के लिए यह सब किया जा रहा है।
”३. जनता का मानस—नया ‘आक्रोश चक्र’ शुरूजेल के बाहर उमड़ी भीड़ इस बात का संकेत है कि इमरान खान अब भी पाकिस्तान के बड़े वर्ग पर प्रभाव रखते हैं।विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकार ने मुलाकात की अनुमति न दी होती, तो स्थिति देशव्यापी विरोध की ओर बढ़ सकती थी।निष्कर्ष—अदियाला जेल की दीवारें जितनी ऊँची, राजनीति उसका ताप उतना तेज
इमरान खान और असीम मुनीर के बीच यह संघर्ष सिर्फ एक नेता और एक सेना प्रमुख का टकराव नहीं, बल्कि पाकिस्तान की सत्ता संरचना की गहरी लड़ाई है।इमरान के “मेंटल टॉर्चर” वाले आरोप आने वाले दिनों में घरेलू राजनीति को और अस्थिर कर सकते हैं।पाकिस्तान एक बार फिर उसी मोड़ पर है—जहाँ अदालतें, सरकार, सेना और सड़क—चारों तरफ सवाल हैं…पर जवाब अभी भी धुंध में छिपे हुए हैं।
