बी के झा
NSK

कोलकाता / नई दिल्ली, 3 दिसंबर
केंद्र के वक्फ संशोधन अधिनियम, 2025 को लागू करने की राज्य सरकार की सहमति के बाद पश्चिम बंगाल में सियासी तापमान अचानक तेज हो गया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की कैबिनेट के एक वरिष्ठ मंत्री ही अब खुलकर विरोध में उतर आए हैं। जन शिक्षा विस्तार और पुस्तकालय सेवा मंत्री तथा जामिया उलेमा-ए-हिंद (WB) के अध्यक्ष सिद्दीकुल्लाह चौधरी ने तीखे शब्दों में चेतावनी दी—“
यदि वक्फ संपत्तियां छीनी गईं, तो मुसलमान चुप नहीं बैठेंगे।”उनके इस बयान के बाद न केवल टीएमसी के भीतर खलबली मच गई है, बल्कि सुरक्षा एजेंसियां भी सतर्क हो गई हैं—
क्योंकि 6 दिसंबर का संवेदनशील दिन पास आ चुका है।“गांव जाकर कहें कि अब वक्फ संपत्ति उनकी नहीं”—मंत्री की चुनौतीकोलकाता में प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए चौधरी ने केंद्र पर तीखा प्रहार किया और राज्य सरकार के कदम से भी असहमति जताई। उन्होंने कहा:“AC कमरे में बैठकर कानून बनाना आसान है, लेकिन कोई गांव जाकर लोगों से कह कर देखे कि अब वक्फ संपत्ति उनकी नहीं रही। यह फैसला मुसलमानों पर जबरन थोपा गया है।”इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, पश्चिम बंगाल सरकार महीनों तक इस कानून को लागू करने से बचती रही थी, लेकिन पिछले सप्ताह उसने केंद्र के निर्देश मानते हुए 82,000 वक्फ संपत्तियों का विवरण 5 दिसंबर तक पोर्टल पर अपलोड करने का आदेश जारी कर दिया।चौधरी बोले—“
मुख्यमंत्री पहले कुछ और सोच रही थीं, अब शायद कुछ और सोच रही होंगी। इस कानून पर लड़ाई लंबी और कठिन होगी।”हमायूं कबीर के ‘बाबरी मस्जिद निर्माण’ बयान से टीएमसी ने बनाई दूरी उधर, तृणमूल कांग्रेस ने अपने बागी विधायक हमायूं कबीर से दूरी बना ली है। कबीर ने 6 दिसंबर को मुर्शिदाबाद में ‘बाबरी मस्जिद की तर्ज पर मस्जिद की नींव’ रखने का दावा किया था। सिद्दीकुल्लाह चौधरी ने इसे “बेहद संवेदनशील और तनाव पैदा करने वाला कदम” बताया और कहा:“मस्जिद पवित्र स्थान है, राजनीति का औजार नहीं। इस तरह के बयान मुस्लिम समुदाय को भी नुकसान पहुंचाते हैं।”
उन्होंने संकेत दिए कि सोशल मीडिया पर जिस तरह इस घोषणा को उछाला जा रहा है, उससे 6 दिसंबर को बंगाल में अवांछित माहौल बनाने की कोशिश दिख रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों और वरिष्ठ पत्रकारों की प्रतिक्रियाएँ
1 राजनीतिक चिंतक डॉ. अमलेश भट्टाचार्य“टीएमसी के भीतर यह पहली बार है जब कोई मंत्री खुले मंच से मुख्यमंत्री के फैसले पर सवाल उठा रहा है। यह संकेत है कि मुस्लिम वोटबैंक पर पकड़ ढीली पड़ने का डर पार्टी में बढ़ रहा है।”
2. शिक्षाविद् प्रो. नाजनीन आलम“ममता बनर्जी ने वक्फ कानून को लागू करने का निर्णय राजनीतिक विवशता में लिया होगा, वरना वह जानती हैं कि बंगाल में यह मुद्दा आसानी से भड़क सकता है। 6 दिसंबर का इतिहास भी यही बताता है कि भावनात्मक मुद्दे कैसे सड़कों तक आ जाते हैं।”
3. वरिष्ठ पत्रकार संजय दत्त“इधर वक्फ संपत्तियों का सवाल, उधर बाबरी मस्जिद की नींव की घोषणा—दोनों मुद्दों ने बंगाल की राजनीति को ‘धर्म बनाम शासन’ के मोड़ पर ला खड़ा किया है। केंद्र और राज्य की तनातनी अब टीएमसी के भीतर के मतभेद में बदलती दिख रही है।”
4. राजनीतिक रणनीति विशेषज्ञ ऋषभ सेन“बंगाल में मुस्लिम जनसंख्या 27% से अधिक है। ऐसे में मंत्री का बयान सिर्फ नाराजगी नहीं, बल्कि राजनीतिक संदेश है। यह आने वाले पंचायत और लोकसभा चुनाव पर असर डाल सकता है।”राज्य की कानून-व्यवस्था पर अलर्ट मोड
6 दिसंबर की संवेदनशीलता को देखते हुए राज्य सरकार, केंद्रीय एजेंसियां और इंटेलिजेंस यूनिट्स सतर्क हैं।मुर्शिदाबाद, मालदा और उत्तर 24 परगना जैसे जिलों पर विशेष नजर रखी जा रही है।राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि—“
वक्फ कानून और बाबरी मस्जिद विवाद—
ये दोनों मुद्दे बंगाल में भावनात्मक विस्फोट की क्षमता रखते हैं। राज्य सरकार का संतुलन और प्रशासन की सक्रियता आगामी 72 घंटे बेहद निर्णायक बनाती है।”सियासत की दिशा तय करेगी आने वाली कुछ तारीखें वक्फ कानून पर मंत्री की बगावत, 6 दिसंबर की छाया, और हमायूं कबीर जैसे बयानों ने बंगाल की राजनीति को नए मोड़ पर खड़ा कर दिया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि—“यदि वक्फ मुद्दा सड़क पर उतर आया, तो यह बंगाल की सियासत में नया भूचाल ला सकता है।
