अमेरिका की ‘ईंट’ का जवाब चीन ने ‘पत्थर’ से दिया, ट्रंप सरकार के नए फैसले पर जिनपिंग का करारा पलटवार, अब अमेरिकी जहाजों पर चीन में लगेगी भारी पोर्ट फीस

बी के झा

NSK

बीजिंग/वॉशिंगटन / नई दिल्ली, 10 अक्टूबर

अमेरिका और चीन के बीच व्यापारिक तनाव एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। अमेरिका द्वारा चीनी जहाजों पर पोर्ट फीस लगाने के फैसले के बाद अब चीन ने भी पलटवार करते हुए अमेरिकी जहाजों पर अतिरिक्त पोर्ट फीस लगाने की घोषणा कर दी है। इससे दोनों देशों के बीच चल रही ट्रेड वॉर और तीव्र हो गई है।चीन ने दी अमेरिका को उसी की भाषा में जवाबचीन के परिवहन मंत्रालय ने शुक्रवार को कहा कि अमेरिकी फर्मों और व्यक्तियों के स्वामित्व या संचालन वाले जहाज जब भी किसी चीनी बंदरगाह पर आएंगे, उन्हें भारी पोर्ट फीस चुकानी होगी।यह शुल्क 14 अक्टूबर (मंगलवार) से लागू हो जाएगा। मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि यह नियम अमेरिका में बने या अमेरिकी झंडा लगे सभी जहाजों पर लागू होगा।मंत्रालय ने बयान जारी करते हुए कहाअमेरिका ने हमारे जहाजों पर फीस लगाने का जो निर्णय लिया है, चीन उसी के जवाब में समान कार्रवाई कर रहा है ताकि व्यापारिक संतुलन कायम रखा जा सके।”अमेरिका का कदम और उसका उद्देश्यअमेरिका ने हाल ही में घोषणा की थी कि 14 अक्टूबर से उसके बंदरगाहों पर ठहरने वाले चीन निर्मित या चीनी स्वामित्व वाले जहाजों को फीस चुकानी होगी।अमेरिका की इस नीति के पीछे उद्देश्य अपने घरेलू जहाज निर्माण उद्योग को पुनर्जीवित करना और चीन की समुद्री ताकत को सीमित करना बताया गया है।सूत्रों के अनुसार, यह निर्णय यूएस ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव (USTR) की एक विस्तृत रिपोर्ट के बाद लिया गया, जिसमें यह कहा गया था कि चीनी कंपनियां अमेरिकी बाजार में अनुचित बढ़त बना रही हैं।कितनी होगी अमेरिकी बंदरगाहों पर चीनी जहाजों की फीसविश्लेषकों के मुताबिक, 10,000 से अधिक कंटेनर ले जाने वाले एक बड़े जहाज को अमेरिका में 10 लाख डॉलर (लगभग 8.3 करोड़ रुपये) तक का पोर्ट शुल्क देना पड़ सकता है।इसके अलावा, हर बार ठहरने पर प्रति टन 80 डॉलर की निश्चित फीस भी ली जाएगी।अब चीन ने लगाया जवाबी शुल्कअमेरिका के इस फैसले के जवाब में चीन ने भी अपने पोर्ट्स पर अमेरिकी जहाजों के लिए कड़े नियम लागू कर दिए हैं।चीन के परिवहन मंत्रालय के अनुसार, नई पोर्ट फीस चरणबद्ध रूप से लागू की जाएगी —लागू होने की तिथि पोर्ट फीस (प्रति टन) डॉलर में अनुमानित राशि14 अक्टूबर 2025 400 युआन 56.13 डॉलर17 अप्रैल 2026 640 युआन 89.81 डॉलर17 अप्रैल 2027 880 युआन 123.47 डॉलर17 अप्रैल 2028 1,120 युआन 157.16 डॉलरकौन झेलेगा ज्यादा नुकसान?आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस वार-पलटवार की नीति में अमेरिका को सीमित नुकसान होगा, जबकि चीन को ज्यादा झटका लग सकता है।दरअसल, चीन के जहाज निर्माण उद्योग का आकार अमेरिका से कहीं बड़ा है।साल 2024 में चीन ने 1,000 से अधिक कमर्शियल जहाज बनाए, जबकि अमेरिका ने मुश्किल से 10 जहाजों का निर्माण किया।हालांकि, विश्लेषक यह भी मानते हैं कि अमेरिका के जहाजों के लिए चीन की यह नई फीस तेजी से बढ़ते परिवहन खर्च का कारण बनेगी और अंततः अमेरिकी आयात-निर्यात लागत में भी वृद्धि करेगी।चीन का जहाज निर्माण उद्योग दुनिया में नंबर 1पिछले दो दशकों में चीन ने खुद को जहाज निर्माण की दुनिया का वैश्विक केंद्र बना लिया है।देश के प्रमुख शिपयार्ड न केवल कमर्शियल वेसल्स, बल्कि मिलिट्री प्रोजेक्ट्स भी बनाते हैं।अमेरिका को डर है कि चीन की यह औद्योगिक ताकत भविष्य में उसकी नौसैनिक बढ़त को भी चुनौती दे सकती है।ट्रेड वॉर का नया अध्यायअर्थशास्त्रियों के अनुसार, अमेरिका और चीन के बीच यह नया पोर्ट फीस विवाद महज आर्थिक लड़ाई नहीं, बल्कि रणनीतिक प्रतिस्पर्धा का संकेत है।जहाज निर्माण और समुद्री व्यापार दोनों ही देशों की वैश्विक ताकत और सुरक्षा रणनीति से सीधे जुड़े हैं।यदि आने वाले महीनों में कोई समझौता नहीं हुआ, तो यह विवाद वैश्विक शिपिंग बाजार को भी प्रभावित कर सकता है।विशेषज्ञों की राययह सिर्फ टैक्स या फीस का मामला नहीं है, बल्कि यह तय करेगा कि आने वाले दशकों में समुद्री व्यापार पर किसका नियंत्रण रहेगा।”— प्रोफेसर झाओ यिंग, इंटरनेशनल ट्रेड एनालिस्ट, बीजिंग यूनिवर्सिटी

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