बाबरी मस्जिद मॉडल की नींव पर सियासत का तूफ़ान: HC की राहत के बाद हुमायूं कबीर ने किया तारीख का ऐलान, TMC–BJP आमने–सामने

बी के झा

NSK

नई दिल्ली, 5 दिसंबर पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद ज़िले के बेलडांगा में प्रस्तावित ‘बाबरी मस्जिद मॉडल’ की आधारशिला को लेकर राजनीति अपने चरम पर पहुंच गई है। कलकत्ता हाई कोर्ट द्वारा दखल से इनकार करने के बाद, निलंबित TMC विधायक हुमायूं कबीर ने शुक्रवार को घोषणा की कि 6 दिसंबर, यानी बाबरी विध्वंस की बरसी के दिन, दोपहर 12 से 2 बजे के बीच मस्जिद मॉडल की नींव रखी जाएगी।साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि इस दौरान कोई राजनीतिक भाषण नहीं होगा, केवल मौलवी पवित्र कुरान का पाठ करेंगे। उन्होंने दावा किया कि “इस कार्यक्रम में हजारों लोग शामिल होंगे” और वह व्यक्तिगत रूप से तैयारी की निगरानी कर रहे हैं।

सियासी भूकंप: तृणमूल ने तोड़ा रिश्ता, कबीर ने दिया इस्तीफे का ऐलान TMC मंत्री और कोलकाता के मेयर फिरहाद हाकिम ने गुरुवार को ही घोषणा कर दी थी कि हुमायूं कबीर को पार्टी से निष्कासित कर दिया गया है।उनका आरोप स्पष्ट था:अचानक बाबरी मस्जिद बनाने की घोषणा?

यह कदम राज्य में तनाव बढ़ा सकता है और 2026 के चुनाव से पहले BJP को फायदा पहुंचा सकता है।”कबीर पिछले समय में BJP में भी रह चुके हैं और 2019 के लोकसभा चुनावों में हार के बाद TMC में वापस आए थे। अब उन्होंने साफ कहा है कि 17 दिसंबर को वे MLA पद से इस्तीफा देंगे।

हाई कोर्ट ने क्यों किया दखल से इनकार?

वरिष्ठ अधिवक्ता सब्यसाची चट्टोपाध्याय की याचिका में मांग की गई थी कि• 6 दिसंबर को आधारशिला रखना,• और इस मुद्दे पर कबीर के बयान,राज्य में सांप्रदायिक तनाव फैला सकते हैं।लेकिन कोर्ट ने कहा कि—किसी आशंका के आधार पर न्यायालय अब तत्काल हस्तक्षेप नहीं करेगा।”

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि कोर्ट का यह फैसला संतुलित है, क्योंकि अभी तक हिंसा या अव्यवस्था की कोई ठोस संभावना सिद्ध नहीं हुई है।कानूनविद प्रो. श्रेयसी बनर्जी कहती हैं:HC ने साफ संदेश दिया है कि न्यायालय प्रशासनिक और राजनीतिक भावनाओं का विकल्प नहीं बन सकता। जब तक वास्तविक खतरा न हो, कोर्ट नहीं रुकेगा।”

इस पूरे घटनाक्रम पर राजनीतिक विश्लेषकों की राय

1. मुस्लिम वोट बैंक की दौड़?राजनीतिक विश्लेषक डॉ. इरफान रहमान कहते हैं:यह कदम मुस्लिम वोटरों को साधने की आक्रामक कोशिश है।लेकिन TMC को डर है कि इससे ध्रुवीकरण होगा और BJP को अप्रत्यक्ष फायदा मिलेगा।”

2. BJP–TMC की खींचतान का नया मैदान राजनीति विशेषज्ञ अनूप घोष कहते हैं:मस्जिद और मंदिर जैसे मुद्दे हमेशा बंगाल में भावनात्मक असर डालते हैं।TMC इसे नियंत्रित करना चाहती है, BJP इसे अवसर के रूप में देख रही है।”

3. कबीर का राजनीतिक जुआकबीर पहले भी पार्टी बदलते रहे हैं। उनके इस कदम को विशेषज्ञ ‘राजनीतिक पुनर्स्थापन’ की कोशिश मान रहे हैं।

BJP की प्रतिक्रिया: “यह TMC का दोहरा खेल”BJP नेताओं ने इस पूरे घटनाक्रम को TMC की रणनीति करार दिया है।पार्टी के प्रदेश नेता का बयान:पहले विधायक को टिकट देते हैं, फिर निलंबित कर देते हैं।यह सब मुस्लिम वोटों की राजनीति है।TMC खुद भ्रम फैला रही है और हमें दोष दे रही है।”कुछ BJP नेता यह भी कहते दिखे कि— “6 दिसंबर की तारीख चुनना भावनात्मक खेल है।

”TMC की सफाई: “हमारा कोई रोल नहीं, यह व्यक्तिगत निर्णय”TMC का आधिकारिक रुख बेहद सख्त है:• यह विधायक का निजी कदम• पार्टी का इससे कोई लेना–देना नहीं• और राज्य सरकार क़ानून व्यवस्था पर पूरी नज़र रखेगीफिरहाद हाकिम ने चेतावनी देते हुए कहा—ऐसे कदम बंगाल की साम्प्रदायिक शांति को नुकसान पहुँचा सकते हैं।”

आख़िर यह ‘बाबरी मस्जिद मॉडल’ क्या है?हुमायूं कबीर ने साफ किया है कि—• यह अयोध्या की मूल संरचना का मॉडल है• मस्जिद यहीं बंगाल में, बेलडांगा में प्रस्तावित है• इसमें फिलहाल केवल आधारशिला ही रखी जाएगी• निर्माण समय और आगे की योजना बाद में घोषित होगीयह कदम भावनात्मक और प्रतीकात्मक दोनों माना जा रहा है।

6 दिसंबर — एक संवेदनशील तारीख

राजनीतिक हलकों में सबसे बड़ा सवाल यही है कि—कबीर ने आधारशिला के लिए 6 दिसंबर की तारीख ही क्यों चुनी?”

विशेषज्ञों का कहना है कि यह तारीख—• भावनात्मक है• प्रतीकात्मक है• और राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील इसीलिए इस पर सभी दलों की निगाहें टिक गई हैं।

निष्कर्ष:

धार्मिक प्रतीकवाद, अदालत की सीमाएँ और बंगाल की राजनीतिक गर्मीयह मामला केवल मस्जिद मॉडल का नहीं, बल्कि—• राजनीतिक पहचान• मुस्लिम वोट बैंक• ध्रुवीकरण• 2026 के चुनाव• और धार्मिक प्रतीकवादका संगम है।हुमायूं कबीर अब इस मुद्दे को अपने राजनीतिक पुनर्जन्म के आधार के रूप में देख रहे हैं।

TMC इससे दूरी बनाकर नुकसान नियंत्रण में लगी है।BJP इसे बंगाल की राजनीति में नया मोर्चा मान रही है।और हाई कोर्ट ने फिलहाल गेंद प्रशासन के पाले में डाल दी है।6 दिसंबर को क्या होता है—यह अब राज्य की राजनीति की सबसे बड़ी परीक्षा बनने जा रहा है।

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