बी के झा
NSK

वॉशिंगटन / नई दिल्ली , 8 दिसंबर
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस एक बार फिर अपनी तीखी और विवादित टिप्पणियों के चलते सुर्खियों में हैं। इस बार उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर बड़े पैमाने पर प्रवासन (Mass Immigration) को “अमेरिकन ड्रीम की चोरी” बताया—और यह कथन पल भर में राजनीतिक झंझावात में बदल गया। लेकिन इस बार विवाद केवल उनकी नीति या पार्टी लाइन का नहीं, बल्कि उनके निजी जीवन, परिवार और भारतीय मूल की पत्नी उषा वेंस तक पहुंच गया है।
अमेरिकन ड्रीम की चोरी”: वेंस का बयान और उठे सवाल जेडीयू वेंस ने लिखा:“Mass immigration is theft of the American dream… और इसके ख़िलाफ़ जो भी अध्ययन आते हैं, वे सब पुरानी व्यवस्था से लाभ उठाने वालों द्वारा फंडेड होते हैं।”वेंस का कहना है कि बड़ी संख्या में आए अप्रवासी अमेरिकी मजदूरों की नौकरियां छीन लेते हैं। उनका तर्क लुइसियाना के एक निर्माण कंपनी मालिक के वीडियो पर आधारित था, जिसमें दावा किया गया था कि ICE (इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एन्फोर्समेंट) की कार्रवाई के बाद स्थानीय लोगों ने काम के लिए अधिक कॉल करने शुरू कर दिए हैं।
सोशल मीडिया का पलटवार: “आपकी पत्नी और बच्चे पहले वापस भेजिए!”वेंस के बयान के बाद सोशल मीडिया लगभग विस्फोट की तरह फट पड़ा।लोगों ने उनके परिवार की पृष्ठभूमि को सीधे निशाने पर लिया, खासकर उनकी पत्नी उषा वेंस, जो भारतीय अप्रवासी माता–पिता की अमेरिका में जन्मी बेटी हैं।कुछ प्रतिक्रियाएँ इस प्रकार थीं—“रुको… आपकी पत्नी भारतीय अप्रवासी परिवार से नहीं आतीं?”“तो क्या आप उन्हें और अपने ‘मिक्स्ड रेस’ बच्चों को वापस भेजेंगे? टिकट कब खरीद रहे हैं?”“अगर इमिग्रेशन अमेरिकन ड्रीम की चोरी है, तो आपके परिवार ने भी वही किया है।”ट्विटर पर कई यूज़र्स ने पूछा कि क्या वेंस को अपने बयान के हिसाब से अपने परिवार को भी ‘पुरानी व्यवस्था का हिस्सा’ मानकर देश से बाहर भेज देना चाहिए। यह बहस इतनी तेज हुई कि “Usha Vance” पूरे अमेरिका में ट्रेंड करने लगा।
पुराना विवाद: पत्नी के धर्म पर भी दे चुके हैं बयानयह पहली बार नहीं है जब जेडी वेंस पर अपनी हिंदू पत्नी को लेकर सवाल उठे हों।कुछ हफ्ते पहले, एक पॉडकास्ट में वेंस ने कहा था—“मुझे उम्मीद है कि एक दिन मेरी पत्नी ईसाई धर्म अपना लेंगी।”धार्मिक स्वतंत्रता वाले देश अमेरिका में यह बयान भी काफी आलोचना का कारण बना था।वहीं, न्यूयॉर्क पोस्ट के एक पॉडकास्ट में उन्होंने कहा था कि—“लोग उन पड़ोसियों को पसंद कर सकते हैं जिनकी भाषा, रंग या जाति उनसे मेल खाती हो।”इस बयान को नस्लीय भेदभाव का समर्थन माना गया।
इमिग्रेशन पर कठोर रुख: ट्रंप की लाइन पर वेंसवेंस कई बार डोनाल्ड ट्रंप की तरह ही तल्ख भाषा में बोलते रहे हैं।जब उनसे पूछा गया कि क्या ट्रंप प्रशासन बिना दस्तावेज वाले सभी प्रवासियों को निर्वासित करेगा, तो उनका जवाब था—“हम जितना हो सके उतने लोगों को निकालने की कोशिश करेंगे।”यह बयान संकेत देता है कि वेंस इमिग्रेशन पर ट्रंप जैसी कठोर और ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के समर्थक हैं।
विशेषज्ञों की राय: “यह केवल नीति नहीं, बल्कि राजनीतिक ध्रुवीकरण का हथियार”अमेरिकी राजनीतिक विश्लेषक जोनाथन मिलर कहते हैं—“वेंस जानते हैं कि इमिग्रेशन चुनावी हथियार है। यह बयान नीतिगत कम और राजनीतिक अधिक है। लेकिन परिवार को इसमें घसीटना सोशल मीडिया की नई आक्रामक संस्कृति को दर्शाता है।”प्रवासन अनुसंधान विशेषज्ञ लिंडा रोज़ का कहना है—“वेंस का तर्क शोध पर आधारित नहीं, बल्कि चुनावी माहौल में बनाया गया एक भावनात्मक नैरेटिव है। लेकिन लोगों का गुस्सा इसलिए है कि उनका अपना परिवार भी इसी व्यवस्था से लाभान्वित हुआ है।
निष्कर्ष:
क्या वेंस अपनी ही राजनीति के शिकार हो रहे हैं?जेडी वेंस ने ‘अमेरिकन ड्रीम की चोरी’ की जो बात कही, वह अमेरिका में पहले से ही मौजूद कट्टरपंथी एंटी-इमिग्रेशन भावना को हवा देती है।
लेकिन सोशल मीडिया का सवाल बहुत सीधा है—“जब आपकी पत्नी भारतीय मूल की हैं, तो क्या आप खुद इस ‘इमिग्रेशन सिस्टम’ का हिस्सा नहीं?”यह विवाद अमेरिका की राजनीति में दो स्पष्ट विभाजनों को उजागर करता है—
1. इमिग्रेशन का राजनीतिक उपयोग,
2. और निजी जीवन को राजनीतिक हथियार बनाने की नई क्रूर प्रवृत्ति।वेंस इस बहस को कितनी दूर ले जाते हैं, यह देखना दिलचस्प होगा—लेकिन इतना तय है कि इस बार तीर कहीं और से चलाकर उनके अपने घर के दरवाजे पर आकर लगा है।
