महाराष्ट्र की सियासत में भूचाल? आदित्य ठाकरे का दावा—शिंदे गुट के 22 विधायक ‘पाला बदलने’ को तैयार; फडणवीस ने बताया बेबुनियाद, कहा—“केवल बातें करने से तथ्य नहीं बन जाते

”बी के झा

मुंबई / नई दिल्ली, 9 दिसंबर

NSK

महाराष्ट्र की राजनीति एक बार फिर हलचल से भरी हुई है। शिवसेना (UBT) विधायक आदित्य ठाकरे ने सोमवार को ऐसा दावा किया जिसने सत्ता गलियारों में नई सरगर्मी पैदा कर दी। ठाकरे ने आरोप लगाया कि महायुति सरकार के एक सहयोगी दल के 22 विधायक मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के ‘करीबी’ हो चुके हैं और जल्द ही पाला बदलने की तैयारी में हैं।

हालाँकि, मुख्यमंत्री फडणवीस ने इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया और कहा कि “किसी के कह देने भर से राजनीतिक समीकरण नहीं बदल जाते।”

शिंदे गुट पर अप्रत्यक्ष निशाना

आदित्य ठाकरे ने किसी दल का नाम नहीं लिया, लेकिन राजनीतिक संकेत साफ थे—उनका इशारा मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना की ओर था।उन्होंने कहा—सत्ता पक्ष में एक पार्टी है जिसमें दो गुट हैं… इनमें से एक गुट के 22 विधायक मुख्यमंत्री के इशारों पर नाच रहे हैं। इनके पास अच्छा धनबल है और ये पाला बदलने को तैयार बैठे हैं।”ठाकरे ने यह भी दावा किया कि इन विधायकों में से एक नेता अपने आपको ‘उप-कप्तान’ कहने लगा है—

यह संकेत स्पष्ट रूप से उद्योग मंत्री उदय सामंत की ओर था, जिनके बारे में UBT पहले भी तीसरे मुख्यमंत्री बनने की चर्चा उठा चुकी है।

फडणवीस ने पलटवार किया

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने आदित्य ठाकरे के दावे को राजनीतिक हवा करार देते हुए कहा—अगर कोई ऐसा कह देता है तो क्या वह सच हो जाएगा? कल कोई कह सकता है कि आदित्य ठाकरे के 20 विधायक हमारे साथ हैं।भाजपा को किसी के विधायक लेने की जरूरत नहीं है।फडणवीस ने साथ ही शिंदे गुट को “विश्वसनीय सहयोगी” बताया और कहा कि महायुति सरकार स्थिर और मजबूत है।विपक्ष के नेता की नियुक्ति पर भी सियासी पेच

आदित्य ठाकरे ने विधान परिषद और विधानसभा में विपक्ष के नेता (LoP) की नियुक्ति को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने पूछा कि—सरकार विपक्ष के नेताओं से इतना क्यों डरती है? दोनों सदनों में विपक्ष के नेता की नियुक्ति लंबित रखना लोकतांत्रिक परंपराओं का अपमान है।”शिवसेना (UBT) द्वारा भास्कर जाधव को विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष के लिए नामित किया गया है, लेकिन स्पीकर राहुल नार्वेकर की ओर से अभी तक औपचारिक निर्णय नहीं लिया गया।10% सीट नियम पर नई बहस

शिवसेना (UBT) के नेता भास्कर जाधव ने यह सवाल उठाया है कि क्या विपक्ष के नेता के पद के लिए कुल सीटों का 10% होना अनिवार्य है?यह बहस इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि 2024 विधानसभा चुनाव में कोई भी विपक्षी दल 10% यानी 29 सीटें नहीं जीत सका।विधान परिषद में भी जंग जारी विधानसभा परिषद के पूर्व LoP अंबादास दानवे का कार्यकाल अगस्त में समाप्त हो चुका है। कांग्रेस ने अब अपने MLC सतेज पाटिल का नाम आगे बढ़ाया है।

वहीं, सभापति राम शिंदे ने कहा है—विपक्ष के नेता की नियुक्ति पर प्रस्ताव मिल चुका है। हित धारकों से चर्चा के बाद निर्णय लिया जाएगा।

”राजनीति की नई करवट?

आदित्य ठाकरे का दावा जितना सनसनीखेज है, उतना ही यह महाराष्ट्र की मौजूदा सियासी संरचना पर बड़ा सवाल भी खड़ा करता है।क्या वास्तव में शिंदे गुट के विधायक असंतुष्ट हैं?

क्या महायुति में आंतरिक दबाव बढ़ रहा है?या फिर यह विपक्ष की ओर से आगामी चुनावी रणनीति का हिस्सा है?

इन सवालों के जवाब आने वाले दिनों में स्पष्ट होंगे, लेकिन इतना तय है कि महाराष्ट्र की राजनीति एक बार फिर दिलचस्प मोड़ पर खड़ी है।

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