संसद में निशिकांत दुबे का प्रहार: “कांग्रेस ने संस्थानों को कमजोर किया, RSS होने पर गर्व है”

बी के झा

NSK

नई दिल्ली, 9 दिसंबर

लोकसभा के शीतकालीन सत्र में सोमवार को कांग्रेस सांसद राहुल गांधी द्वारा आरएसएस और केंद्र सरकार पर लगाए गए आरोपों ने सदन का माहौल गरमा दिया। इसके जवाब में बीजेपी सांसद डॉ. निशिकांत दुबे ने पुरज़ोर पलटवार करते हुए कांग्रेस पर संवैधानिक संस्थाओं को “वर्षों तक अपंग करने” का आरोप लगाया। दुबे ने सशक्त ऐतिहासिक संदर्भों के साथ संसद में भाषण दिया, जिसे सदन में कई बार तालियों से समर्थन मिला।“कांग्रेस ने संविधान को कहावत की तरह इस्तेमाल किया” —

निशिकांत दुबे

दुबे ने आपातकाल और उसके बाद हुए संवैधानिक संशोधनों का ज़िक्र करते हुए कहा—1976 के संशोधन ने संविधान की आत्मा को चोट पहुंचाई। कांग्रेस ने राष्ट्रपति की शक्तियों को लगभग समाप्त कर दिया। जो संस्था देश का सर्वोच्च संवैधानिक पद है, उसे रबर स्टांप बना दिया गया। ऐसा किसी लोकतांत्रिक देश में सोचा भी नहीं जा सकता।”उन्होंने कहा कि इंदिरा गांधी के कार्यकाल में न्यायपालिका और प्रेस पर “अभूतपूर्व दबाव” बनाया गया, जिसकी चर्चा आज भी लोकतांत्रिक इतिहास में होती है।“संस्थानों का दुरुपयोग कांग्रेस की पहचान रही है”बीजेपी सांसद ने पूर्व सरकारों में हुए शीर्ष पदों पर नियुक्तियों पर कई गंभीर आरोप भी लगाए।

UPSC पर निशाना उन्होंने कहा—IAS-IPS जैसे सर्वोच्च प्रशासनिक ढांचे को चुनने वाली UPSC को कांग्रेस ने राजनीतिक भट्‌ठी बना दिया। उसका एक कार्यकर्ता बटुक सिंह दस साल तक चेयरमैन रहा। इससे संस्थागत निष्पक्षता पर कितना असर पड़ा होगा, ये समझना मुश्किल नहीं।”चुनाव आयोग की नियुक्तियाँ

निशिकांत दुबे ने बताया कि कांग्रेस शासन में कई चुनाव आयुक्तों और CEC की नियुक्तियों के बाद उन्हें राज्यपाल या मंत्री बनाया गया, जिससे “पद की निष्पक्षता संदिग्ध” हो गई।CBI पर भी गंभीर आरोप दुबे ने कहा—एक ऐसा अधिकारी, जो सोनिया गांधी और राहुल गांधी की सुरक्षा में तैनात था, उसे CBI का निदेशक बना दिया गया। यह कौन-सी स्वतंत्र जांच एजेंसी थी, जिसे कांग्रेस चला रही थी या फिर संस्थान?”्RSS पर गर्व जतायाराहुल गांधी द्वारा आरएसएस की आलोचना के जवाब में दुबे ने भावुक अंदाज़ में कहा—हाँ, हम RSS के हैं और हमें गर्व है।ऋण है शहीदों का, कैसे चुकाएँगे?लहू की बूंद जब तक रहेगी, तिरंगा लहराएँगे।”राजनीतिक विश्लेषकों ने क्या कहा?

1• चुनावी रणनीतिकारों की राय

दिल्ली स्थित राजनीतिक विश्लेषक डॉ. अशुतोष भटनागर के अनुसार—दुबे का भाषण आने वाले कुछ महीनों में होने वाले चुनावों को ध्यान में रखकर दिया गया लगता है। भाजपा कांग्रेस को ‘संस्थानों के दुरुपयोग’ वाले पुराने मुद्दे पर घेरकर नैरेटिव खड़ा करना चाहती है। राहुल गांधी की बातों का जवाब भावनात्मक और ऐतिहासिक संदर्भों में देना एक सटीक रणनीति प्रतीत होती है।”

2. संसदीय अध्ययन के विशेषज्ञजवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के शिक्षाविद प्रो. मीरा उपाध्याय का कहना है—लोकतांत्रिक संस्थानों का सवाल अत्यंत महत्वपूर्ण है। दोनों पक्षों के आरोप गंभीर हैं। कांग्रेस पर आपातकाल और संस्थागत दमन के आरोप ऐतिहासिक रूप से दर्ज हैं, जबकि वर्तमान सरकार पर केन्द्रीयकरण के आरोप विपक्ष लगाता है। संसद में इस प्रकार की बहस लोकतंत्र के लिए स्वास्थ्यकर है बशर्ते तथ्य और मर्यादा बनी रहे।

3. सामाजिक विज्ञान के शोधकर्ताशोधकर्ता डॉ. रंजन पंडा कहते हैं—RSS का मुद्दा बार-बार उठना दर्शाता है कि भारत की राजनीति वैचारिक ध्रुवीकरण के माहौल में है। दुबे का भाषण भाजपा के मूल समर्थक वर्ग को उत्साहित करने वाला है और कांग्रेस की संस्थागत राजनीति को कठघरे में खड़ा करता है।”

कांग्रेस की प्रतिक्रिया

कांग्रेस की ओर से कहा गया कि बीजेपी “मुद्दों से भटकाने” और राहुल गांधी की बातों को “तोड़-मरोड़कर पेश करने” की कोशिश कर रही है।पार्टी प्रवक्ता ने कहा—हमने संस्थानों पर कब्ज़े का आरोप आज की हकीकत के आधार पर लगाया है। भाजपा पिछली सदी के उदाहरण देकर वर्तमान सवालों से बचना चाहती है।”

संसद में टकराव और लोकतंत्र की परीक्षा सत्र के दौरान दोनों पक्षों के बयान न सिर्फ़ सदन को गर्माते रहे, बल्कि यह भी दर्शाते हैं कि आने वाले चुनावों में “संस्थागत स्वतंत्रता”,

“आरएसएस की भूमिका”, और “ऐतिहासिक बनाम वर्तमान जवाबदेही” बड़े मुद्दे बन सकते हैं।संसद के इतिहास में यह बहस उन दुर्लभ पलों में गिनी जाएगी जहाँ राजनीति, इतिहास और वैचारिकता—तीनों एक ही मंच पर टकराते दिखे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *