बी के झा
NSK

नई दिल्ली/ मास्को, 12 दिसंबर
कैरिबियन सागर एक बार फिर महाशक्ति-प्रतिस्पर्धा के युद्धक्षेत्र में बदलता दिख रहा है। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को “अटूट समर्थन” का आश्वासन दिया है, वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वेनेजुएला तट से एक बड़े तेल टैंकर की जब्ती का आदेश देकर तनाव को विस्फोटक स्थिति में ला दिया है।यह भू-राजनीतिक टकराव केवल अमेरिका–वेनेजुएला का विवाद नहीं, बल्कि रूस–अमेरिका शक्ति संतुलन की नई कड़ी बन गया है। क्षेत्र में बढ़ती अमेरिकी सैन्य मौजूदगी ने युद्ध की आशंकाओं को हवा दे दी है।
रूस का सीधा संदेश:
“मादुरो—तुम अकेले नहीं”क्रेमलिन द्वारा जारी बयान के अनुसार, पुतिन ने मादुरो को फोन पर आश्वस्त किया कि—“रूस वेनेजुएला की संप्रभुता, राष्ट्रीय हितों और बाहरी दबाव का सामना करने की उसकी नीति का दृढ़ समर्थन करता है।”घटनाक्रम ऐसे समय हुआ जब ट्रंप प्रशासन मादुरो को सत्ता से हटाने के प्रयास तेज कर चुका है। पुतिन का यह समर्थन न सिर्फ कूटनीतिक संदेश है, बल्कि अमेरिकी प्रभाव क्षेत्र में रूस की दखल का मजबूत संकेत भी है।ट्रंप की आक्रामक चाल: तेल टैंकर की जब्ती से बढ़ी हलचलअमेरिका ने वेनेजुएला तट के पास एक बड़ा तेल टैंकर अपने कब्ज़े में ले लिया।अमेरिकी होमलैंड सिक्योरिटी मंत्री क्रिस्टी नोएम ने इसे “मादक पदार्थ निरोधक ऑपरेशन” से जोड़कर पेश किया, लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि यह मादुरो पर दबाव का नया हथियार है।
वेनेजुएला ने इसे सीधे शब्दों में “अंतरराष्ट्रीय समुद्री डकैती” बताया।क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य जमावड़ा: दशक में सबसे बड़ा विस्तार
रक्षा सूत्रों के अनुसार—• अमेरिकी नौसेना के युद्धपोतों की संख्या कैरिबियन में दोगुनी की गई है• कई जहाजों को “घातक कार्रवाई की अनुमति” मिली है• खुफिया विमानों की उड़ानें बढ़ी हैं• नौकाओं पर लक्षित हमले के कई ऑपरेशन चल रहे हैं स्पष्ट है कि वॉशिंगटन यह संदेश देना चाहता है कि वह मादुरो सरकार को घुटनों पर लाने के लिए सैन्य दबाव तक बढ़ा सकता है।
रक्षा विशेषज्ञों की नजर: “क्षेत्र युद्ध की दहलीज पर खड़ा”वरिष्ठ रक्षा विशेषज्ञ एयर मार्शल (रि.) राकेश शर्मा चेतावनी देते हैं—”अमेरिका की यह सैन्य तैनाती सिर्फ नशा-विरोधी अभियान नहीं है। यह रणनीतिक दबाव है जो किसी भी क्षण सैन्य संघर्ष में बदल सकता है।”
नेवी स्ट्रैटेजिस्ट कैप्टन अनीश कुमार कहते हैं—”कैरिबियन में अमेरिकी ताकत का बढ़ना रूस के लिए ‘रेड लाइन’ जैसा है। मॉस्को मादुरो को सिर्फ बचाना नहीं, बल्कि वाशिंगटन की दादागिरी को चुनौती देना चाहता है।”
राजनीतिक विश्लेषकों की दृष्टि: अमेरिका–रूस की नई शीतयुद्ध लकीर अंतरराष्ट्रीय मामलों के विशेषज्ञ डॉ. मनीषा राय का विश्लेषण—”टैंकर की जब्ती केवल इकोनॉमिक वॉर नहीं—
यह तीसरी दुनिया के देशों में शासन परिवर्तन की अमेरिकी नीति का पुनरुत्थान है। पुतिन इसे रोकने के लिए हर कूटनीतिक दांव खेलेंगे।”
वरिष्ठ विश्लेषक प्रो. ह्यूगो सल्वाडोर कहते हैं—”वेनेजुएला अमेरिका के पिछवाड़े में रूस की पकड़ मजबूत कर रहा है। यह 1962 के क्यूबा मिसाइल संकट जैसा प्रतिद्वंद्व बना सकता है—हालाकि नए रूप में।”
मादुरो की तीखी प्रतिक्रिया: “हम पर हमला सत्ता कब्जाने की साजिश”वेनेजुएला सरकार ने अमेरिकी कार्रवाई को“खुली लूट, आक्रामकता की रणनीति और अवैध कब्ज़ा” बताया है।
मादुरो का दावा है—“
अमेरिका की कोशिश मुझे सत्ता से हटाना है। रूस ही ऐसा मित्र है जो हमें बाहरी आक्रमण से बचा सकता है।”रूस–वेनेजुएला साझेदारी और मजबूत• ऊर्जा, रक्षा और खनन क्षेत्र में 20 से अधिक दीर्घकालिक समझौते• वेनेजुएला की अस्थिर अर्थव्यवस्था को टिकाए रखने के लिए रूसी वित्तीय सहायता• सैन्य सलाहकारों और तकनीकी विशेषज्ञों की तैनाती• हथियारों की सप्लाई पर अमेरिका की चिंता
पुतिन का समर्थन मादुरो के लिए केवल कूटनीति नहीं, बल्कि सत्ता-सुरक्षा की लाइन है।क्या कैरिबियन युद्ध के कगार पर?
तेल, भू-रणनीति और शक्ति-प्रतिस्पर्धा से भरा यह संकट तेजी से खतरनाक रूप ले रहा है।•
अमेरिका—
मादुरो को गिराने पर अडिग• रूस—वेनेजुएला में अपनी पकड़ छोड़ने को तैयार नहीं• वेनेजुएला—दो महाशक्तियों की शतरंज पर खड़ा• पूरा क्षेत्र—
तनाव की दहलीज पर रक्षा और राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले महीनों में यह संघर्ष वैश्विक कूटनीति की सबसे बड़ी परीक्षा बन सकता है।
