बी के झा
NSK

नई दिल्ली, 13 दिसंबर
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली एक बार फिर प्रदूषण के गंभीर संकट की गिरफ्त में है। राजधानी की हवा इस साल के अब तक के सबसे खराब स्तर पर पहुंच चुकी है। रविवार को दिल्ली का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 431 दर्ज किया गया, जो ‘गंभीर’ श्रेणी से भी एक कदम आगे की चेतावनी है। यह पूरे साल में पहली बार नहीं, लेकिन सबसे खतरनाक स्थिति जरूर मानी जा रही है।साल का चौथा ‘गंभीर’ दिन इससे पहले नवंबर महीने में तीन दिन ऐसे रहे थे, जब दिल्ली का AQI 400 के पार पहुंचा था। अब दिसंबर में यह चौथा दिन है, जब राजधानी की हवा ‘गंभीर’ श्रेणी में दर्ज की गई है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह स्थिति महज आंकड़ों की कहानी नहीं है, बल्कि सीधे तौर पर लोगों के स्वास्थ्य पर असर डालने वाली आपात स्थिति है।
क्यों बिगड़ी हवा इतनी ज्यादा?
पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि प्रदूषण में इस अचानक उछाल के पीछे कई कारण एक साथ काम कर रहे हैं।हवा की रफ्तार बेहद कम हो गई है, जिससे प्रदूषक कण वातावरण में ही फंसे हुए हैं।निर्माण कार्यों से उठने वाली धूल और वाहनों से निकलने वाला धुआं हालात को और बिगाड़ रहा है।सर्द मौसम में तापमान के उलटाव (टेम्परेचर इनवर्ज़न) के कारण प्रदूषित हवा ऊपर नहीं उठ पा रही है।इन सभी वजहों ने मिलकर दिल्ली को एक तरह से ‘गैस चैंबर’ में तब्दील कर दिया है।सांस लेना भी खतरे से खाली नहीं चिकित्सकों के मुताबिक, AQI 430 के आसपास पहुंचने पर स्वस्थ व्यक्ति को भी आंखों में जलन, सांस लेने में तकलीफ, सिरदर्द और गले में खराश जैसी समस्याएं हो सकती हैं। अस्थमा, हृदय रोग और फेफड़ों की बीमारी से जूझ रहे लोगों के लिए यह स्थिति बेहद खतरनाक है।
बुजुर्गों और बच्चों को खासतौर पर सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है।राहत की उम्मीद कब?मौसम विभाग और प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े विशेषज्ञ फिलहाल किसी तात्कालिक राहत की संभावना नहीं जता रहे हैं। हवा की गति बढ़ने या बारिश होने तक प्रदूषण के स्तर में बड़ी गिरावट की उम्मीद कम है। ऐसे में आने वाले कुछ दिन दिल्ली-वासियों के लिए और कठिन हो सकते हैं।प्रशासन और जनता के सामने चुनौती दिल्ली में प्रदूषण अब केवल पर्यावरण का मुद्दा नहीं रहा, बल्कि यह सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट का रूप ले चुका है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अस्थायी उपायों के साथ-साथ दीर्घकालिक और सख्त नीतियों की जरूरत है, ताकि हर साल सर्दियों में दिल्ली को इस जहरीली हवा से न गुजरना पड़े।फिलहाल राजधानी के लोग एक ही सवाल पूछ रहे हैं—
क्या दिल्ली की हवा कभी फिर से सांस लेने लायक बन पाएगी?
