बिहार में सियासी भूचाल: भाजपा से मिश्री लाल का इस्तीफा, राजद में सूरजभान की एंट्री, अरुण लौटे नीतीश के पाले में, एनडीए और महागठबंधन में सीट बंटवारे पर खींचतान जारी, दिल्ली से पटना तक राजनीतिक हलचल तेज

बी के झा

NSK

पटना/दिल्ली , 11 अक्टूबर

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के पहले चरण के नामांकन की प्रक्रिया के बीच सूबे की सियासत में भूचाल मच गया है। एक तरफ जहां अलीनगर के भाजपा विधायक मिश्रीलाल यादव ने पार्टी से इस्तीफा देकर सबको चौंका दिया, वहीं दूसरी ओर मोकामा के बाहुबली सूरजभान सिंह आज अपने पूरे परिवार के साथ राजद में शामिल हो गए।उधर, पूर्व सांसद डॉ. अरुण कुमार की जेडीयू में वापसी से नीतीश कुमार ने भूमिहार वोटबैंक को साधने की नई चाल चली है।इसी बीच दिल्ली में भाजपा के शीर्ष नेताओं की बैठक में सीट बंटवारे पर चर्चा जारी है, जबकि पटना में तेजस्वी यादव ने आरजेडी की आपात बैठक बुलाई है।

दिल्ली में एनडीए की मैराथन बैठक

सीट शेयरिंग पर पेंच बरकरारशनिवार सुबह भाजपा के कोर ग्रुप के तमाम नेता दिल्ली पहुंच गए। भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, और बिहार प्रभारी भूपेंद्र यादव की मौजूदगी में बिहार भाजपा कोर कमेटी की बैठक चल रही है।इस बैठक में उम्मीदवारों की सूची को अंतिम रूप देने पर चर्चा हो रही है।हालांकि, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष दिलीप जायसवाल ने शुक्रवार रात कहा था कि “शनिवार शाम तक एनडीए में सीट शेयरिंग का ऐलान हो जाएगा”, लेकिन शनिवार सुबह उपेंद्र कुशवाहा के ट्वीट ने तस्वीर धुंधली कर दी।कुशवाहा ने कहा एनडीए में सीटों पर वार्ता अभी चल रही है, जल्द समाधान निकलने की उम्मीद है।उनके इस बयान के बाद यह स्पष्ट हो गया कि अंदरखाने मतभेद अब भी बने हुए हैं।

भाजपा को झटका

विधायक मिश्रीलाल यादव ने छोड़ी पार्टीअलीनगर से भाजपा विधायक मिश्रीलाल यादव ने शनिवार सुबह पार्टी से इस्तीफे की घोषणा कर दी।

उन्होंने कहा —मैंने भाजपा की सदस्यता से त्यागपत्र दे दिया है और इसे प्रदेश अध्यक्ष को भेज रहा हूं।”सियासी गलियारों में चर्चा है कि मिश्रीलाल अब राष्ट्रीय जनता दल (RJD) में शामिल हो सकते हैं।उनके इस्तीफे को भाजपा के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि वे मिथिलांचल में यादव और ओबीसी समुदाय के बीच प्रभाव रखते हैं।राजनीतिक सूत्रों का कहना है कि मिश्रीलाल की नाराजगी टिकट वितरण और स्थानीय नेतृत्व की अनदेखी से जुड़ी हुई है।

मोकामा के सूरजभान ने तेजस्वी का दामन थामा

राजद को मिला बाहुबली सहारामोकामा क्षेत्र के प्रभावशाली बाहुबली नेता सूरजभान सिंह, जो अब तक रालोजपा (रामविलास) से जुड़े थे, शनिवार को अपने परिवार सहित तेजस्वी यादव की मौजूदगी में राजद में शामिल हो गए।तेजस्वी यादव ने कहा राजद में हर उस व्यक्ति का स्वागत है, जो बिहार के विकास के लिए ईमानदारी से काम करना चाहता है।सूरजभान की एंट्री से राजद को मगध और दक्षिण बिहार में भूमिहार वोटबैंक को साधने में मदद मिल सकती है।राजद ने हाल के दिनों में लगातार ऐसे चेहरों को पार्टी में शामिल किया है जो सामाजिक समीकरणों में नए संतुलन बना सकें।

जेडीयू ने खोला ‘अरुण कार्ड’

भूमिहार समीकरण साधने की कवायदमुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी मौके की नजाकत को भांपते हुए अपनी पार्टी जेडीयू में पूर्व सांसद अरुण कुमार की वापसी कराई है।अरुण कुमार कभी राष्ट्रीय समता पार्टी (सेक्युलर) के प्रमुख रहे और नीतीश के करीबी माने जाते थे।उनकी वापसी को एनडीए में “भूमिहार संतुलन” के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।विशेष रूप से, राजद में सूरजभान के शामिल होने के बाद नीतीश का यह कदम राजनीतिक रूप से “काउंटर स्ट्राइक” माना जा रहा है।

महागठबंधन में भी मंथन

लालू और तेजस्वी ने बुलाई आपात बैठकपटना में शनिवार को लालू यादव और तेजस्वी यादव की अध्यक्षता में राजद की अहम बैठक हुई, जिसमें उम्मीदवारों के चयन और सीट शेयरिंग पर चर्चा की गई।बैठक में कांग्रेस, वीआईपी और लेफ्ट पार्टियों के प्रतिनिधि भी शामिल हुए।सूत्रों के मुताबिक, महागठबंधन में 8-10 सीटों पर फाइनल सहमति नहीं बन सकी है, खासकर उन क्षेत्रों में जहां लेफ्ट पार्टियों और राजद के बीच सीधा टकराव है।

प्रशांत किशोर की नई चाल

राघोपुर से जन सुराज की शुरुआतइस पूरे सियासी घमासान के बीच जन सुराज पार्टी के प्रमुख प्रशांत किशोर (PK) ने भी शनिवार को तेजस्वी यादव के गढ़ राघोपुर से अपने चुनाव अभियान की शुरुआत की है।उनकी यह यात्रा पूरी तरह “एंटी-एस्टेब्लिशमेंट” नैरेटिव पर केंद्रित है।

PK ने कहा —

बिहार को जाति और अपराध की राजनीति से निकालकर जनभागीदारी की राजनीति की ओर ले जाना होगा।राघोपुर से शुरुआत कर उन्होंने सीधे तेजस्वी को चुनौती दी है। राजनीतिक समीकरण: हर पार्टी में बदलाव का दौरविश्लेषकों का मानना है कि बिहार की मौजूदा राजनीति “पलायन और पुनर्गठन” के दौर से गुजर रही है।भाजपा से नाराज नेताओं का झुकाव आरजेडी की ओर, जबकि जेडीयू अपने पुराने चेहरों को वापस बुलाकर नई जमीन तैयार कर रही है।राजद जातीय आधार पर विस्तार चाहती है, जबकि भाजपा केंद्र के करिश्मे पर भरोसा कर रही है।

राजनीतिक टिप्पणीकार प्रो. संजीव मिश्र का कहना है —2025 का बिहार चुनाव विचारधारा से ज़्यादा अस्तित्व की लड़ाई बन चुका है। हर दल अपने पुराने चेहरों की जगह नए समीकरण गढ़ रहा है।”

निष्कर्ष

मिश्रीलाल का इस्तीफा, सूरजभान का राजद में आना, अरुण कुमार की वापसी — ये तीनों घटनाएं दर्शाती हैं कि हर पार्टी इस बार वोटर माइक्रो-मैनेजमेंट पर फोकस कर रही है।अब निगाहें एनडीए और महागठबंधन दोनों के सीट बंटवारे के ऐलान पर हैं, जो तय करेगा कि किसकी रणनीति ने इस बार बिहार की राजनीति की दिशा बदल दी।बिहार में चुनावी बिसात अब पूरी तरह सज चुकी है।

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