मोकामा में 25 साल बाद महा-मुकाबला! अनंत सिंह बनाम सूरजभान परिवार — कौन पड़ेगा भारी?

बी के झा

NSK

पटना / नई दिल्ली, 11 अक्टूबर

बिहार की सियासत में इस बार सबसे रोमांचक और “धमाकेदार” मुकाबला मोकामा विधानसभा सीट पर होने जा रहा है।

25 साल बाद फिर वही दो नाम आमने-सामने हैं

अनंत सिंह और सूरजभान सिंह।एक ओर हैं बाढ़ इलाके के दबंग बाहुबली अनंत सिंह, जो लगातार पांच बार मोकामा जीत चुके हैं।और दूसरी ओर हैं पूर्व केंद्रीय मंत्री पशुपति पारस के करीबी, आरएलजेपी के संसदीय बोर्ड अध्यक्ष और कभी “अंडरवर्ल्ड के सम्राट” कहे जाने वाले सूरजभान सिंह, जिनके परिवार ने तीन-तीन सांसद दिए हैं।1999 की यादें ताज़ा, 2025 में फिर वही टक्करमोकामा का यह संघर्ष 2000 के चुनाव की याद दिला रहा है, जब सूरजभान सिंह ने अनंत सिंह के बड़े भाई दिलीप सिंह को हराकर राजनीति में बड़ा धमाका किया था।

अब दो दशक बाद सूरजभान अपने पुराने “सियासी अखाड़े” में फिर उतरने की तैयारी में हैं

इस बार अपनी पत्नी और पूर्व सांसद वीणा देवी को मैदान में उतारकर।उधर, अनंत सिंह भी जेल से छूटने के बाद जेडीयू टिकट पर 14 अक्टूबर को नामांकन करने जा रहे हैं।

यानी मुकाबला लगभग तय है

अनंत बनाम वीणा (सूरजभान परिवार)।दोनों घराने: अपराध, राजनीति और सत्ता का संगममोकामा की राजनीति हमेशा से बाहुबल, धनबल और जनबल का संगम रही है।सूरजभान सिंह का नाम अंडरवर्ल्ड से लेकर संसद तक गूंजा।2004 में बलिया से सांसद बने, फिर पत्नी वीणा देवी को 2014 में मुंगेर से सांसद बनवाया,और 2019 में भाई चंदन सिंह नवादा – से संसद पहुंचे।तीनों सीटें -बलिया, मुंगेर और नवादा सात जिलों में फैले उनके प्रभाव की गवाही देती हैं।वहीं, अनंत सिंह मोकामा की राजनीति के स्थायी प्रतीक बन चुके हैं।2005 से अब तक लगातार पांच बार विधायक रहे — पहले जेडीयू से, फिर निर्दलीय, और 2020 में राजद से।उनकी पत्नी नीलम देवी ने 2022 के उपचुनाव में राजद के टिकट पर जीत हासिल कर परिवार का दबदबा कायम रखा।मोकामा में “छोटे सरकार” नाम से मशहूर अनंत सिंह ने अपने क्षेत्र में कई साल तक कानून से ऊपर माने जाने वाली सत्ता कायम रखी।एक बयान से शुरू हुआ नया संग्राम सूरजभान परिवार का मोकामा लौटना एक पुराने घाव से जुड़ा है।रिहाई के बाद अनंत सिंह ने एक इंटरव्यू में सूरजभान को लेकर अपमानजनक टिप्पणी कर दी थी।बस, यहीं से आग भड़क उठी।सूरजभान ने चुप्पी तोड़ते हुए मोकामा की जमीन से “राजनीतिक बदला” लेने का फैसला किया।अब वो खुद मैदान में उतरेंगे या अपनी पत्नी वीणा को आगे करेंगे, यह दो-तीन दिनों में साफ हो जाएगा।पर इतना तय है — मुकाबला अब निजी प्रतिष्ठा बनाम राजनीतिक अस्तित्व का हो चुका है।लालू कैंप में एंट्री, तेजस्वी का नया कार्ड सूरजभान सिंह, पत्नी वीणा देवी और भाई चंदन सिंह शनिवार को तेजस्वी यादव की आरजेडी में शामिल होने वाले थे,लेकिन सीट बंटवारे को लेकर चल रही खींचतान के चलते कार्यक्रम अब रविवार को होगा।तेजस्वी यादव फिलहाल कांग्रेस, सीपीआई-माले और मुकेश सहनी के साथ सीट बंटवारे की उलझन में हैं।सूरजभान परिवार की एंट्री अगर तय होती है, तो तेजस्वी मोकामा में भूमिहार कार्ड भी खेल सकेंगे — जिससे एनडीए की नींव हिल सकती है।नीतीश-ललन का समीकरण और अनंत की वापसीअनंत सिंह अब नीतीश कुमार और जेडीयू के साथ हैं।कभी ललन सिंह से उनके रिश्ते बेहद खराब हुए थे, लेकिन अब वो फिर से जेडीयू लाइन में लौट आए हैं।ललन सिंह ने 2019 में अनंत की पत्नी नीलम देवी को कांग्रेस टिकट पर 1.75 लाख वोटों से हराया था,पर अब दोनों एक ही खेमे में हैं — यह खुद में बिहार की राजनीति का “महान ट्विस्ट” है।मोकामा: जहां बंदूक की नाल तय करती है सियासी किस्मतमोकामा विधानसभा पटना जिले में आती है, पर लोकसभा में मुंगेर का हिस्सा है।यह वही इलाका है जहां कभी गोली चलती थी तो पूरा बाजार बंद हो जाता था।अनंत सिंह के दौर में “सरकार” का मतलब कई बार प्रशासन नहीं, बल्कि अनंत का आदेश होता था।

इसी पृष्ठभूमि में अब 2025 का यह चुनाव “सत्ता बनाम असर” का युद्ध बन गया है।

मुकाबला सिर्फ दो बाहुबली नहीं — दो युगों काइस चुनाव में सिर्फ दो नेताओं की टक्कर नहीं है —यह दो दौरों का संघर्ष है: एक तरफ अनंत सिंह का पुराना बाहुबली युग, दूसरी तरफ सूरजभान परिवार की “राजनीतिक विरासत और वापसी” की जिद।अगर तेजस्वी यादव ने वीणा देवी को टिकट दिया तो यह सीट न सिर्फ बिहार बल्कि पूरे देश की सुर्खियों में रहेगी।क्योंकि मोकामा का यह चुनाव तय करेगा — कौन रहेगा ‘छोटे सरकार’, और कौन होगा सत्ता से बाहर।

फैसला मैदान पर होगा

अनंत सिंह 14 अक्टूबर को नामांकन करेंगे।सूरजभान परिवार रविवार को राजद में शामिल हो सकता है।उसके बाद मोकामा में बाढ़ के किनारे सियासी जंग छिड़ेगी —जहां 25 साल बाद फिर इतिहास खुद को दोहराने की तैयारी में है।

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