बी के झा
NSK

पटना , 16 दिसंबर
बिहार की राजनीति में मंगलवार, 16 दिसंबर 2025, को घटनाओं की ऐसी शृंखला देखने को मिली जिसने राज्य की सत्ता, संगठन और सड़कों—तीनों स्तरों पर हलचल पैदा कर दी। एक ओर भाजपा के नव नियुक्त राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नवीन ने नीतीश कैबिनेट से इस्तीफ़ा देकर दिल्ली की राजनीति की ओर निर्णायक कदम बढ़ाया, तो दूसरी ओर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कैबिनेट बैठक में अपनी महत्वाकांक्षी योजना ‘सात निश्चय–3’ को मंज़ूरी देकर यह संदेश दिया कि विवादों और हमलों के बीच भी सरकार अपने एजेंडे पर आगे बढ़ रही है।इसी बीच, भ्रष्टाचार, अपराध और कानून-व्यवस्था से जुड़ी घटनाओं ने विपक्ष को सरकार पर चौतरफ़ा हमला करने का नया अवसर दे दिया है।नितिन नवीन का इस्तीफ़ा: दिल्ली की ओर बिहार से विदाई
भाजपा के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनाए जाने के बाद नितिन नवीन का मंत्री पद से इस्तीफ़ा औपचारिक कदम माना जा रहा है, लेकिन इसके राजनीतिक संकेत कहीं गहरे हैं। पथ निर्माण तथा नगर विकास एवं आवास जैसे अहम विभाग संभाल चुके नितिन नवीन अब पूरी तरह राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय होंगे।इस्तीफ़े से पहले ही वे दिल्ली में गृह मंत्री अमित शाह और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी से मुलाक़ात कर चुके हैं, जिसे राजनीतिक गलियारों में “भविष्य की भूमिका तय करने वाली बैठक” के रूप में देखा जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषक क्या कहते हैं?
वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि—नितिन नवीन का इस्तीफ़ा केवल पद छोड़ना नहीं, बल्कि भाजपा की उस रणनीति का हिस्सा है, जिसमें संगठन को सरकार से ऊपर रखा जा रहा है। बिहार से उभरे एक युवा नेता को राष्ट्रीय स्तर पर आगे बढ़ाकर पार्टी भविष्य का नेतृत्व गढ़ रही है।कुछ जानकार इसे बिहार में नेतृत्व संतुलन के रूप में भी देख रहे हैं—
जहां भाजपा संगठन मज़बूत कर रही है, वहीं सरकार की ज़िम्मेदारी फिलहाल नीतीश कुमार पर छोड़ी गई है।
नीतीश कैबिनेट का जवाब: ‘सात निश्चय–3’राजनीतिक घमासान के बीच नीतीश कैबिनेट ने ‘सात निश्चय–3’ को मंज़ूरी देकर विकास की राजनीति को केंद्र में रखने की कोशिश की।इस तीसरे चरण में सरकार ने जिन सात स्तंभों पर काम करने का दावा किया है, वे हैं—
दोगुना रोजगार–दोगुनी आय
समृद्ध उद्योग–सशक्त बिहार
कृषि में प्रगति–प्रदेश की समृद्धि उन्नत
शिक्षा–उज्ज्वल भविष्य सुलभ
स्वास्थ्य–सुरक्षित जीवन
मजबूत आधार–आधुनिक विस्तार सबका
सम्मान–जीवन आसान मुख्यमंत्री ने इसे “आने वाले वर्षों की रोडमैप” बताया।
विश्लेषण
राजनीतिक विशेषज्ञों के मुताबिक—सात निश्चय–
3, विपक्ष के हमलों के बीच नीतीश कुमार की ‘डेवलपमेंट ओवर डिफेंस’ रणनीति है। वे आलोचनाओं का जवाब आरोपों से नहीं, योजनाओं से देना चाहते हैं।”
भ्रष्टाचार पर चोट: SVU की छापेमारीइसी दिन विशेष निगरानी इकाई (SVU) ने भवन निर्माण विभाग के गुणवत्ता निदेशक गजाधर मंडल के पटना और भागलपुर स्थित ठिकानों पर छापेमारी कर सरकार के ‘भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस’ दावे को मज़बूती देने की कोशिश की।उन पर 2.82 करोड़ रुपये से अधिक आय अर्जित करने का आरोप है।इसके साथ ही सहरसा में एक राजस्व कर्मचारी का रिश्वत लेते पकड़ा जाना भी प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है।
विपक्ष का हमला
: ‘सरकार दिशाहीन’इन घटनाओं को लेकर विपक्ष, खासकर आरजेडी, ने सरकार पर तीखा हमला बोला है।RJD का आरोप
आरजेडी प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी ने कहा—एक तरफ मंत्री इस्तीफ़ा दे रहे हैं, दूसरी ओर मुख्यमंत्री की मानसिक स्थिति पर सवाल उठ रहे हैं। सरकार पूरी तरह भ्रम और दबाव में है।विपक्ष का कहना है कि—भ्रष्टाचार के मामले लगातार सामने आ रहे हैं
अपराध की घटनाएं (पटना, बक्सर) बढ़ रही हैंऔर मुख्यमंत्री विवादों से बाहर नहीं निकल पा रहेअपराध और अशांति: सड़कों पर सवाल पटना के आलमगंज में युवक की हत्या, बक्सर में ताबड़तोड़ फायरिंग, और सासाराम के डेहरी में अतिक्रमण हटाने के विरोध में हिंसक प्रदर्शन—
इन घटनाओं ने कानून-व्यवस्था को लेकर सरकार की चुनौती बढ़ा दी है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है—सरकार विकास की योजनाएं बना रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर कानून-व्यवस्था उसकी सबसे बड़ी परीक्षा बनी हुई है।”भाजपा संगठन में फेरबदल
इसी बीच भाजपा ने विनोद नारायण झा को विधानसभा में मुख्य सचेतक बनाकर यह संकेत दिया है कि पार्टी सदन के भीतर अपनी रणनीति और धारदार करेगी।
यह कदम भी आने वाले चुनावी समीकरणों से जोड़कर देखा जा रहा है।—
निष्कर्ष
: स्थिरता बनाम संघर्षएक ही दिन में—नितिन नवीन का इस्तीफ़ा बात निश्चय–3 की मंजूरी भ्रष्टाचार और अपराध की खबरें विपक्ष के तीखे हमले यह सब मिलकर बिहार की राजनीति की दो समानांतर धाराएं दिखाते हैं—
एक ओर सरकार विकास और योजनाओं की बात कर रही है,दूसरी ओर विपक्ष अव्यवस्था, अपराध और नेतृत्व संकट का नैरेटिव गढ़ रहा है।
आने वाले दिनों में यह साफ़ होगा कि नितिन नवीन का दिल्ली जाना, नीतीश कुमार का विकास एजेंडा और विपक्ष का आक्रामक रुख—
इनमें से कौन बिहार की राजनीति की दिशा तय करता है। फिलहाल, बिहार की सियासत में शांति कम और हलचल ज़्यादा है।
