बी के झा
NSK

पटना / नई दिल्ली, 11 अक्टूबर
बिहार की सियासत में फिर एक बार हलचल तेज है। विधानसभा चुनाव की तारीखों के ऐलान के बीच तेजस्वी यादव के नेतृत्व वाले महागठबंधन में बिखराव के संकेत साफ नजर आने लगे हैं।विकासशील इंसान पार्टी (VIP) के प्रमुख मुकेश सहनी ने शनिवार को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर नया पोस्टर जारी किया, जिसमें “महागठबंधन सरकार” शब्द गायब है। इस एक बदलाव ने राजनीतिक गलियारों में तरह-तरह की अटकलों को हवा दे दी है।‘महागठबंधन सरकार’ से ‘हम सरकार’ तक का सफरसिर्फ दो दिन पहले तक सहनी के पोस्टर पर लिखा था — “14 नवंबर, आ रही है महागठबंधन सरकार।”लेकिन अब नया पोस्टर कहता है — “14 नवंबर को हम बिहार में ऐसी सरकार बनाएंगे, जहां हर वर्ग को उसका हक और सम्मान मिलेगा।”यह “हम” शब्द सियासी भाषा में बहुत कुछ कह जाता है। यानी अब मुकेश सहनी खुद को गठबंधन का हिस्सा नहीं, बल्कि एक स्वतंत्र राजनीतिक शक्ति के रूप में प्रोजेक्ट कर रहे हैं।राजनीतिक पर्यवेक्षक मान रहे हैं कि यह बदलाव महागठबंधन के भीतर बढ़ते मतभेदों और सीट बंटवारे पर जारी खींचतान का सीधा नतीजा है।तेजस्वी कैंप में बेचैनी, VIP के अलग सुरसहनी के इस कदम से तेजस्वी यादव के खेमे में बेचैनी बढ़ गई है।सूत्रों के मुताबिक, महागठबंधन की सीट शेयरिंग बातचीत में सहनी लगातार 40-60 सीटों की मांग पर अड़े थे, जबकि आरजेडी उन्हें अधिकतम 15-16 सीट देने को तैयार थी।डिप्टी सीएम पद की मांग ने भी मामला और उलझा दिया।सहनी ने यहां तक कहा था कि “सीट 14 मिले या 44, डिप्टी सीएम वही बनेंगे।”महागठबंधन के बाकी घटक — कांग्रेस और लेफ्ट पार्टियां — इस मांग को लेकर पहले ही असहज थीं।‘सन ऑफ मल्लाह’ फिर अकेले रास्ते पर?2020 के विधानसभा चुनाव से पहले भी मुकेश सहनी ने ठीक इसी तरह की नाराजगी दिखाते हुए तेजस्वी यादव पर “पीठ में छुरा घोंपने” का आरोप लगाते हुए महागठबंधन छोड़ दिया था।तब बीजेपी ने उन्हें अपने कोटे से 11 सीटें देकर एनडीए में शामिल किया, हालांकि बाद में वह वहां भी उपेक्षित महसूस करने लगे।अब एक बार फिर सहनी उसी दोराहे पर खड़े हैं — महागठबंधन छोड़ें या फिर समझौता करें।क्या एनडीए बनेगा नया ठिकाना?राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि सहनी का अगला पड़ाव एनडीए हो सकता है।लेकिन यह राह भी फिलहाल आसान नहीं है।बीजेपी ने जेडीयू और चिराग पासवान की एलजेपी (रामविलास) से तालमेल तो बना लिया है, पर जीतनराम मांझी की हम और उपेंद्र कुशवाहा की आरएलएम को लेकर अभी बातचीत अधर में है।ऐसे में मुकेश सहनी के आने से सीटों के नए समीकरण फिर बिगड़ सकते हैं।महागठबंधन की मुश्किलें बढ़ींपहले चरण के नामांकन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, लेकिन दोनों गठबंधनों में सीट बंटवारे को लेकर स्थिति साफ नहीं है।महागठबंधन के भीतर कांग्रेस और आरजेडी के बीच सीएम फेस और सीट संख्या पर मतभेद पहले से हैं।अब मुकेश सहनी की नाराजगी से यह गठबंधन और कमजोर दिखने लगा है।अगर सहनी अलग राह पकड़ते हैं तो यह विपक्षी एकता के लिए बड़ा झटका साबित हो सकता है।
अगला पोस्ट तय करेगा सियासी दिशा
अब सबकी नजर मुकेश सहनी के अगले पोस्ट या प्रेस कॉन्फ्रेंस पर है।वहीं तेजस्वी यादव खेमे में भी अंदरखाने मंथन जारी है —
क्या सहनी को मनाया जाए या फिर “थैंक्यू बोलकर” उन्हें रास्ता दिखाया जाए?
जो भी हो, यह तय है कि बिहार की सियासत एक बार फिर “मल्लाह राजनीति” के इर्द-गिर्द घूम रही है।और मुकेश सहनी अपने नए पोस्टर के ज़रिए बता चुके हैं — अब वो किसी के सहायक नहीं, खुद कप्तान बनने की राह पर है।
