बी के झा
NSK

इस्लामाबाद/ नई दिल्ली, 17 दिसंबर
पाकिस्तान की राजनीति एक बार फिर उबाल पर है। सेना प्रमुख असीम मुनीर के सत्ता-संतुलन में और मजबूत होते ही पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान और उनके परिवार पर शिकंजा कसता जा रहा है। ताजा घटनाक्रम में इमरान खान की बहन अलीमा खान समेत पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के करीब 400 नेताओं और कार्यकर्ताओं पर आतंकवाद निरोधक कानून के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।
इस कार्रवाई के बाद रावलपिंडी से लेकर इस्लामाबाद तक सियासी तनाव और सड़क पर गुस्सा साफ नजर आने लगा है।अडियाला जेल से शुरू हुआ टकराव मंगलवार रात रावलपिंडी की कुख्यात अडियाला जेल के बाहर हालात उस वक्त बिगड़ गए, जब इमरान खान की बहनों और पीटीआई समर्थकों को पूर्व प्रधानमंत्री से मिलने से रोक दिया गया। इसी के विरोध में जेल के बाहर धरना शुरू हुआ, जो देखते ही देखते उग्र हो गया।पुलिस के अनुसार, प्रदर्शनकारियों ने सड़क जाम की, सरकारी और सैन्य प्रतिष्ठानों के खिलाफ नारे लगाए और कानून-व्यवस्था में बाधा डाली। हालात बिगड़ने पर पुलिस पर पत्थर और कांच की बोतलें फेंकी गईं, जिससे कई सुरक्षाकर्मी घायल होने की खबर है।आतंकवाद की धाराएं और ‘राज्य के खिलाफ साजिश’ का आरोप इस मामले में पुलिस स्टेशन सदर बेरोनी में दर्ज एफआईआर ने सियासी आग में घी डालने का काम किया है।
एफआईआर में अलीमा खान, नूरीन नियाजी, कासिम खान, आलिया हमजा, सलमान अकरम राजा, नईम पंजोथा, अल्लामा राजा नासिर अब्बास समेत कई वरिष्ठ पीटीआई नेताओं के नाम दर्ज हैं।इन परएंटी टेररिज्म एक्ट,पाकिस्तान पीनल कोड की धारा 120 (राज्य के खिलाफ आपराधिक साजिश),पुलिस पर हमला,और धारा 144 के उल्लंघन जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं।पुलिस का दावा है कि मौके से 14 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिन्हें रावलपिंडी की आतंकवाद निरोधी अदालत में पेश किया जाएगा।सेना बनाम सियासत: असली जंग क्या है?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला केवल कानून-व्यवस्था का नहीं, बल्कि पाकिस्तान की सत्ता संरचना की गहरी लड़ाई का हिस्सा है।
एक वरिष्ठ विश्लेषक के अनुसार,“असीम मुनीर के मजबूत होते ही इमरान खान के लिए राजनीतिक स्पेस लगातार सिकुड़ रहा है। उनकी गिरफ्तारी, पार्टी पर दबाव और अब परिवार को निशाना बनाना—
यह सब संकेत देता है कि सेना किसी भी स्तर पर चुनौती नहीं चाहती।”पीटीआई समर्थक इसे राजनीतिक प्रतिशोध बता रहे हैं। उनका आरोप है कि आतंकवाद जैसे कठोर कानूनों का इस्तेमाल असहमति की आवाज दबाने के लिए किया जा रहा है।सड़कों पर गुस्सा, सोशल मीडिया पर आक्रोश मुकदमे की खबर फैलते ही पीटीआई समर्थकों में आक्रोश फूट पड़ा। कई शहरों में पुलिस और समर्थकों के बीच झड़प की खबरें आईं।
सोशल मीडिया पर #ReleaseImranKhan और #AlimaKhan ट्रेंड करने लगे।समर्थकों का कहना है कि “जो लोग सिर्फ अपने नेता से मिलने गए थे, उन्हें आतंकवादी बना दिया गया।”
निष्कर्ष:
पाकिस्तान की राजनीति एक खतरनाक मोड़ परअलीमा खान समेत 400 से अधिक पीटीआई नेताओं पर आतंकवाद का मुकदमा पाकिस्तान की राजनीति को और अस्थिर करने वाला कदम माना जा रहा है।
एक ओर सेना और सरकार सख्ती को कानून का पालन बता रही है, तो दूसरी ओर विपक्ष इसे लोकतंत्र की हत्या करार दे रहा है।
इमरान खान पहले ही जेल में हैं, अब उनका परिवार भी कानूनी घेरे में है।
ऐसे में सवाल उठता है—
क्या पाकिस्तान में राजनीतिक असहमति को आतंकवाद के तराजू पर तौला जा रहा है?और क्या यह टकराव आने वाले दिनों में सड़कों से अदालतों तक और उग्र रूप लेगा?
फिलहाल इतना तय है कि पाकिस्तान की राजनीति एक बार फिर संघर्ष, डर और अनिश्चितता के दौर में प्रवेश कर चुकी है।
