बी के झा
NSK

इस्लामाबाद/नई दिल्ली, 11 अक्टूबर
भारत और पाकिस्तान के बीच एक बार फिर तनाव चरम पर है। पहलगाम आतंकी हमले (22 अप्रैल) के बाद से दोनों देशों के रिश्तों में बढ़ती तल्खी अब युद्ध जैसी आशंका में बदलती दिख रही है।बीते मई महीने में जब दोनों देशों की सेनाओं के बीच 7 से 10 मई तक चार दिनों तक भीषण झड़पें हुई थीं, तब पूरा दक्षिण एशिया मानो युद्ध के मुहाने पर पहुंच गया था।10 मई को सीजफायर समझौते के बाद हालात भले ही कुछ सामान्य हुए हों, लेकिन ज़मीन पर तनाव अब भी बरकरार है।इस बीच पाकिस्तान ने सितंबर में सऊदी अरब के साथ एक अहम रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए, जिसके बाद इस सवाल ने जन्म लिया ,अगर भारत पाकिस्तान पर हमला करता है, तो क्या सऊदी अरब उसकी ओर से लड़ने आएगा?रक्षा समझौते ने बढ़ाया सस्पेंसपाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच हुआ यह समझौता कहता है किकिसी भी देश पर बाहरी हमला दोनों देशों पर हमला माना जाएगा।यानी सैद्धांतिक रूप से यदि भारत पाकिस्तान पर हमला करता है तो सऊदी अरब को भी उस हमले का ‘साझा शिकार’ माना जाएगा।लेकिन क्या इसका मतलब यह है कि सऊदी अरब अपनी सेना पाकिस्तान भेजेगा?इस प्रश्न का उत्तर खुद पाकिस्तान के सबसे चर्चित राजनीतिक विश्लेषक नजम सेठी ने दिया है — और उनका बयान इस्लामाबाद की सत्ता के गलियारों में खलबली मचा रहा है।नजम सेठी का बयान — “सऊदी मदद करेगा, लेकिन हथियार नहीं देगा”समा टीवी पर प्रसारित एक इंटरव्यू में नजम सेठी ने कहा —अगर भारत-पाकिस्तान के बीच फिर से युद्ध हुआ, तो सऊदी अरब पाकिस्तान को सैन्य मदद नहीं देगा। वह केवल आर्थिक सहायता या अंतरराष्ट्रीय मंचों पर समर्थन तक सीमित रहेगा।”सेठी के मुताबिक,सऊदी अरब पाकिस्तान को पैसे दे सकता है, तेल की आपूर्ति बढ़ा सकता है या भारत के हमले की निंदा कर सकता है, लेकिन वह अपनी सेना या हथियार पाकिस्तान नहीं भेजेगा।”सेठी का यह बयान इसलिए भी अहम है क्योंकि उन्हें पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ का बेहद करीबी और पाक सत्ता का विश्वसनीय विश्लेषक माना जाता है।उनकी बातों से यह साफ झलकता है कि इस्लामाबाद में सऊदी समर्थन को लेकर जो उम्मीदें थीं, वे अब भ्रम साबित हो रही हैं।ऑपरेशन ‘सिंदूर 2.0’ का खौफभारत की ओर से रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और सेना प्रमुख जनरल उपेन्द्र द्विवेदी के हालिया बयानों ने पाकिस्तान की चिंता और बढ़ा दी है।राजनाथ सिंह ने खुला चेतावनी भरे लहजे में कहा था —अगर पाकिस्तान अपनी हरकतों से बाज नहीं आया तो इस बार जवाब पहले से कहीं ज़्यादा कड़ा होगा।”याद रहे, इसी साल 7 मई को भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत पीओके और पाकिस्तान के अंदर नौ आतंकी ठिकानों को ध्वस्त किया था।अब खुफिया एजेंसियों में चर्चा है कि भारत एक “सिंदूर 2.0” जैसी कार्रवाई की तैयारी में है, जिससे पाकिस्तान की सैन्य प्रतिष्ठा को गहरा झटका लग सकता है। पाकिस्तान में डर, सरकार और सेना में मतभेदपाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने खुद माना है किभारत के साथ युद्ध का खतरा वास्तविक है। हम तनाव नहीं बढ़ाना चाहते, लेकिन भारत की आक्रामकता को नजरअंदाज नहीं कर सकते।”पाकिस्तान की सेना के भीतर भी चिंता है कि अगर भारत एक और सर्जिकल स्ट्राइक या सीमित हमला करता है, तो इस बार जनसमर्थन जुटाना आसान नहीं होगा।क्योंकि सऊदी अरब या अमेरिका से सीधी सैन्य मदद की कोई उम्मीद नहीं है, और चीन भी फिलहाल अपनी घरेलू आर्थिक मंदी और दक्षिण चीन सागर विवादों में उलझा हुआ है।सऊदी का रुख — “कूटनीतिक समर्थन, पर दूरी बनाए रखेगा”सऊदी अरब का पाकिस्तान से रिश्ता पुराना जरूर है, पर बदलते भू-राजनीतिक समीकरणों में रियाद अब बहुत सावधानी से कदम रख रहा है।कई बार सऊदी अरब ने पाकिस्तान को तेल क्रेडिट और फाइनेंशियल बेलआउट दिए हैं, लेकिन सैन्य मोर्चे पर वह हमेशा तटस्थ नीति अपनाता रहा है।
एक वरिष्ठ पश्चिम एशियाई विशेषज्ञ के मुताबिक —सऊदी अरब भारत के साथ अपने आर्थिक और रणनीतिक रिश्ते को दांव पर नहीं लगाएगा। अरब निवेश अब भारत में तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में युद्ध की स्थिति में सऊदी केवल बयानबाजी तक सीमित रहेगा।” भारत की रणनीति — ‘तेज, सीमित और सटीक’भारतीय रक्षा सूत्रों के अनुसार, भारत अब तेज, सीमित और सटीक सैन्य कार्रवाई (Swift and Decisive Response) की नीति पर काम कर रहा है।“ऑपरेशन सिंदूर” इसका उदाहरण था, जिसमें भारत ने बिना लंबा युद्ध लड़े आतंकियों के ठिकाने ध्वस्त किए और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर नैतिक बढ़त भी बनाए रखी।
सेना के एक सेवानिवृत्त अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया —
भारत अब भावनाओं से नहीं, रणनीति से जवाब देगा। पाकिस्तान की कमजोर अर्थव्यवस्था और वैश्विक अलगाव को देखते हुए सऊदी, चीन या कोई तीसरा देश उसकी मदद को नहीं आएगा।”
पाकिस्तान का भविष्य — न सऊदी भरोसे, न सेना के सहारे नजम सेठी का बयान दरअसल उस कटु सच्चाई को सामने लाता है जिसे पाकिस्तान की सत्ता मानने से डरती है।एक तरफ महंगाई, IMF कर्ज और राजनीतिक अस्थिरता,दूसरी तरफ भारत के खिलाफ सैन्य मोर्चे पर तैयारी की कमी —इन दोनों के बीच पाकिस्तान आज भी अंतरराष्ट्रीय मंच पर अकेला है।“ऑपरेशन सिंदूर 2.0” के नाम से पाक मीडिया में जो डर फैलाया जा रहा है, वह केवल भारत की ताकत नहीं बल्कि पाकिस्तान की कमजोर हकीकत को उजागर करता है।
निष्कर्ष
भारत और पाकिस्तान के बीच मौजूदा हालात कूटनीतिक तनाव से ज्यादा सामरिक संतुलन की परीक्षा हैं।सऊदी अरब का समर्थन अब “प्रतीकात्मक” रह गया है, और चीन का भरोसा “शर्तों पर आधारित।”ऐसे में अगर हालात बिगड़े, तो पाकिस्तान को न सऊदी की सेना मिलेगी, न चीन का कवच —सिर्फ संयुक्त राष्ट्र की औपचारिक चिंता और दुनिया की खामोश निगाहें।
