मिल गया अरबों साल से समंदर के पेट में दफन बेशुमार ‘खजाना’, वैज्ञानिकों की खुशी का नहीं रहा ठिकाना

बी के झा

NSK

नई दिल्ली, 12 अक्टूबर

अंतरराष्ट्रीय डेस्क,समुद्र की अथाह गहराइयों में वैज्ञानिकों को हाल ही में ऐसा “जंगल” मिला है जिसने पूरी वैज्ञानिक दुनिया को हैरान कर दिया है। यह कोई साधारण खोज नहीं, बल्कि अरबों साल से महासागर की गोद में छिपा एक जीवित खजाना है — जिसे वैज्ञानिकों ने नाम दिया है “समुद्र का अमेजन” (The Amazon of the Ocean)।यह विशाल कोरल ट्रायंगल (Coral Triangle) क्षेत्र है, जो दक्षिण पूर्व एशिया में फिलीपींस, इंडोनेशिया, मलेशिया, पापुआ न्यू गिनी, सोलोमन द्वीप और तिमोर-लेस्ते तक फैला हुआ है। इसकी सीमा प्रशांत महासागर से लेकर हिंद महासागर तक जाती है। यह इलाका इतना बड़ा है कि इसे पृथ्वी की सबसे समृद्ध समुद्री जैव विविधता का केंद्र कहा जाता है।समुद्र के अंदर छिपा ‘अमेजन जैसा जंगल’धरती पर मौजूद अमेजन वर्षावन दुनिया का सबसे बड़ा हरा-भरा जंगल है, लेकिन वैज्ञानिकों की इस खोज ने यह साबित कर दिया कि समुद्र की गहराइयों में भी एक “जंगल” मौजूद है, जो उतना ही विशाल और रहस्यमय है।यह “कोरल ट्रायंगल” कोरल रीफ्स, समुद्री घास, शैवाल और सैकड़ों प्रजातियों वाले जीवों से भरा हुआ है। यहां के कोरल रीफ्स (प्रवाल भित्तियाँ) समुद्र की पारिस्थितिकी का आधार हैं — जो ऑक्सीजन, आश्रय और भोजन प्रदान करते हैं।जैव विविधता का अनमोल खजानावैज्ञानिकों के अनुसार, इस कोरल ट्रायंगल में—76% समुद्री जीव प्रजातियाँ ऐसी हैं जिनका उल्लेख पृथ्वी पर ज्ञात जैव विविधता में मिलता है।यहां समुद्री कछुओं की सभी 7 प्रमुख प्रजातियाँ पाई जाती हैं।37% रीफ मछलियों की प्रजातियाँ,और अनेक समुद्री स्तनधारी जैसे डॉल्फ़िन, डूगोंग और ब्लू व्हेल भी यहीं पाई जाती हैं।यह क्षेत्र समुद्र के पारिस्थितिक तंत्र का “दिल” माना जाता है। इसे देखकर वैज्ञानिकों ने कहा कि यह जगह “महासागर का जीवनदायिनी केंद्र” है।क्यों कहा गया ‘समुद्र का अमेजन’?इस जगह की जैव विविधता और जीवन का घनत्व इतना ज्यादा है कि वैज्ञानिकों ने इसकी तुलना धरती के अमेजन वर्षावन से की।धरती पर अमेजन जितना महत्वपूर्ण है, वैसा ही समुद्र के लिए यह कोरल ट्रायंगल है।यह न केवल अनगिनत जीवों का घर है बल्कि यह समुद्र के तापमान और जलवायु को संतुलित रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। खतरे में ‘समुद्र का अमेजन’हालांकि यह क्षेत्र जितना समृद्ध है, उतना ही संवेदनशील भी है।यह ओवरफिशिंग (अत्यधिक मछली पकड़ने), तटीय विकास, प्रदूषण, और महासागरीय अम्लीकरण जैसी समस्याओं से जूझ रहा है।समुद्र का तापमान बढ़ने से कोरल रीफ्स के “ब्लीचिंग” (रंग उड़ जाना और मर जाना) का खतरा बढ़ गया है।वैज्ञानिकों का कहना है कि इस क्षेत्र में पानी की थोड़ी धुंधलाहट (turbidity) और तलछटी परतों के कारण सूर्य का प्रकाश पूरी तरह नीचे तक नहीं पहुंच पाता।इस वजह से यहां के कोरल्स तापीय तनाव से बच जाते हैं — यानी यह प्राकृतिक रूप से खुद को गर्मी और ब्लीचिंग से बचाने की क्षमता रखता है।

भविष्य के लिए उम्मीद की किरण

विशेषज्ञों का मानना है कि कोरल ट्रायंगल केवल समुद्री जीवन का खजाना नहीं, बल्कि मानव सभ्यता के भविष्य की सुरक्षा का कवच भी है।यह क्षेत्र समुद्री पारिस्थितिकी को संतुलित रखता है, जो वैश्विक जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने में मदद कर सकता है।यदि इसका संरक्षण किया जाए, तो आने वाले वर्षों में यह जलवायु संकट से जूझती धरती के लिए आशा का केंद्र बन सकता है।

निष्कर्ष

समुद्र के भीतर फैला यह “अमेजन जंगल” हमें यह याद दिलाता है कि प्रकृति के रहस्य अनंत हैं।धरती के नीचे, पानी के भीतर और समय के पार — हर जगह जीवन ने अपनी छाप छोड़ी है।यह खोज न सिर्फ विज्ञान की उपलब्धि है, बल्कि यह संदेश भी देती है कि अगर हम महासागरों को बचाएंगे, तो प्रकृति हमें अपनी सबसे खूबसूरत कहानियाँ सुनाएगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *