बी के झा
रामपुर/लखनऊ / नई दिल्ली, 12 अक्टूबर
समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री आजम खान एक बार फिर सुर्खियों में हैं। करीब 23 महीने बाद जेल से रिहा होने के तुरंत बाद उनकी ‘वाई कैटेगरी सुरक्षा’ दोबारा बहाल कर दी गई है। शुक्रवार शाम को प्रशासन ने आदेश जारी कर दिया, और शनिवार सुबह से ही गार्ड व गनर उनके आवास पर तैनात कर दिए गए।हालांकि, रिहाई के दिन खुद आजम खान ने सुरक्षा लेने से इनकार कर दिया था और पुलिसकर्मियों को वापस भेज दिया था, लेकिन बाद में पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा को औपचारिक रूप से बहाल कर दिया। बताया जा रहा है कि जेल से आने के बाद से उनके घर पर समर्थकों और शुभ चिंतकों का लगातार तांता लगा हुआ है, जिससे प्रशासन ने सुरक्षा बढ़ाने का फैसला लिया।सुरक्षा बहाली का फैसला क्यों?रामपुर के आरआई विनोद कुमार के मुताबिक,आजम खान को वाई श्रेणी की सुरक्षा दोबारा प्रदान की गई है। शुक्रवार शाम को ही आदेश जारी हुआ और शनिवार सुबह से गार्ड तैनात कर दिए गए हैं।”दरअसल, आजम खान को पहले भी वाई कैटेगरी सुरक्षा मिली थी, लेकिन कोर्ट द्वारा दोषी ठहराए जाने और विधानसभा सदस्यता समाप्त होने के बाद सुरक्षा वापस ले ली गई थी। बाद में कुछ समय के लिए सुरक्षा फिर बहाल की गई, मगर सीतापुर जेल जाने के बाद सुरक्षा हटाई गई थी। अब रिहाई के साथ प्रशासन ने स्थिति का पुनर्मूल्यांकन करते हुए सुरक्षा लौटाने का निर्णय लिया।
आजम खान के घर पर जुटे समर्थकआजम खान की रिहाई के बाद से ही रामपुर में राजनीतिक हलचल तेज है। उनके समर्थक लगातार घर पर मुलाकात के लिए पहुंच रहे हैं।लोगों की बढ़ती भीड़ और राजनीतिक गतिविधियों को देखते हुए प्रशासन को सुरक्षा व्यवस्था सख्त करनी पड़ी।
स्वामी प्रसाद मौर्य पहुंचे आजम खान से मिलने
शनिवार को पूर्व सपा नेता स्वामी प्रसाद मौर्य ने भी आजम खान से मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच लगभग दो घंटे तक बंद कमरे में बातचीत हुई।मौर्य ने मुलाकात के बाद कहा,भाजपा सरकार ने आजम खान पर जो जुल्म किए हैं, वह लोकतंत्र पर धब्बा हैं। उनकी जेल यात्रा राजनीतिक प्रतिशोध का परिणाम थी।उन्होंने साफ किया कि यह मुलाकात राजनीतिक उद्देश्य से नहीं, बल्कि “आदरभाव और सौजन्यवश” थी।साथ ही उन्होंने यह भी जोड़ा कि उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था की स्थिति चिंताजनक है और उनकी जनता पार्टी 2027 के विधानसभा चुनावों में हर सीट पर उम्मीदवार उतारेगी।
विवादों और संघर्षों से घिरे आजम खान
आजम खान पर अतीत में कई आपराधिक मामले दर्ज हुए — जिनमें भूमि कब्जा, बकरी और मुर्गी चोरी, और सरकारी संपत्ति के दुरुपयोग जैसे आरोप शामिल हैं।इन मामलों के चलते उन्हें 23 महीने जेल में रहना पड़ा।अब जमानत पर रिहा होने के बाद वे एक बार फिर राजनीतिक मंच पर वापसी की तैयारी में नजर आ रहे हैं।
राजनीतिक माहौल गरमाया
आजम खान की रिहाई और सुरक्षा बहाली से समाजवादी पार्टी के भीतर नई ऊर्जा दिख रही है।पार्टी के कई वरिष्ठ नेता इसे “राजनीतिक पुनर्जीवन” की शुरुआत मान रहे हैं। वहीं, भाजपा खेमे में इसे लेकर सतर्कता बढ़ी है।रामपुर की सड़कों पर एक बार फिर लाल टोपी और सपा झंडे लहराते दिखने लगे हैं, और स्थानीय राजनीति में आजम खान की वापसी को लेकर चर्चाओं का दौर जारी है।
निष्कर्ष:
23 महीने की जेल यात्रा के बाद आजम खान की वापसी सिर्फ एक नेता की रिहाई नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश की राजनीति में पुराने समीकरणों के फिर से सक्रिय होने का संकेत है।उनकी बहाल हुई वाई कैटेगरी सुरक्षा दर्शाती है कि आजम खान भले ही चुप हों, लेकिन राजनीतिक मैदान में उनकी मौजूदगी अब भी उतनी ही प्रभावशाली है।
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