बी के झा
NSK

नई दिल्ली,20 दिसंबर
राजद सुप्रीमो और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव की सेहत को लेकर शनिवार को राहत भरी खबर सामने आई। दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में शनिवार सुबह उनकी बाईं आंख के मोतियाबिंद (कैटरेक्ट) का सफल ऑपरेशन किया गया। चिकित्सकों के अनुसार, सर्जरी पूरी तरह सफल रही और फिलहाल उनकी स्थिति स्थिर है। ऑपरेशन के दौरान उनकी बेटी और राज्यसभा सांसद मीसा भारती अस्पताल में मौजूद रहीं।लालू यादव लंबे समय से विभिन्न गंभीर बीमारियों से जूझते रहे हैं। इसके बावजूद उनका राजनीतिक प्रभाव और समर्थकों से जुड़ाव कम नहीं हुआ है। ऑपरेशन की खबर सामने आते ही बिहार समेत देशभर में उनके समर्थकों ने दुआ, प्रार्थना और शुभकामनाओं का सिलसिला शुरू कर दिया।
समर्थकों की भावनाएं:
‘लालू जी सिर्फ नेता नहीं, एक युग हैं’राजद कार्यकर्ताओं और लालू समर्थकों ने सर्जरी की सफलता पर राहत जताई। पटना, दरभंगा, छपरा और गया समेत कई जिलों में पार्टी कार्यकर्ताओं ने मंदिरों और दरगाहों में प्रार्थना की।राजद के एक वरिष्ठ नेता ने कहा,लालू प्रसाद यादव केवल एक राजनीतिक नेता नहीं, सामाजिक न्याय की आवाज़ और एक पूरा युग हैं। उनकी सेहत हमारे लिए भावनात्मक विषय है।”
सोशल मीडिया पर भी ‘Get Well Soon Lalu Ji’ और ‘Social Justice Warrior’ जैसे हैशटैग ट्रेंड करते दिखे।इंडी गठबंधन की प्रतिक्रिया: ‘लालू यादव की भूमिका आज भी अहम’
इंडी गठबंधन से जुड़े कई नेताओं ने लालू यादव के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की। गठबंधन के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि लालू यादव की राजनीतिक सक्रियता भले सीमित हो, लेकिन उनकी सलाह और अनुभव आज भी विपक्षी राजनीति की धुरी हैं।”
राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा रही कि बिहार की राजनीति ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय विपक्षी एकजुटता में भी लालू यादव की भूमिका ऐतिहासिक रही हैं
राजनीतिक विश्लेषण:
बीमारी के बावजूद असर बरकरार राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि लालू यादव की सेहत और उनकी राजनीति एक-दूसरे से अलग नहीं देखी जा सकती। एक वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक के अनुसार,लालू यादव की शारीरिक सक्रियता भले कम हुई हो, लेकिन उनका राजनीतिक प्रतीकात्मक प्रभाव आज भी कायम है। बिहार की राजनीति में राजद की दिशा काफी हद तक उन्हीं के विचार और विरासत से तय होती है।”
विश्लेषकों का कहना है कि ऐसे समय में जब बिहार की राजनीति लगातार नए समीकरणों से गुजर रही है, लालू यादव का नाम अब भी वोट बैंक और सामाजिक समीकरणों को प्रभावित करता है ।
स्वास्थ्य संघर्ष का लंबा इतिहास लालू प्रसाद यादव अब तक कई बड़ी सर्जरी से गुजर चुके हैं—2014: मुंबई के एशियन हार्ट इंस्टीट्यूट में ओपन हार्ट सर्जरी, जिसमें ऑर्टिक वाल्व रिप्लेसमेंट किया गया (करीब 6 घंटे लंबी सर्जरी)दिसंबर 2022: सिंगापुर में किडनी ट्रांसप्लांट, बेटी डॉ. रोहिणी आचार्य ने किडनी दान की1
2 सितंबर 2024: मुंबई में एंजियोप्लास्टीअप्रैल 2025: दिल्ली एम्स में पीठ और हाथ के घावों का ऑपरेशनदिसंबर 2025: सफदरजंग अस्पताल में बाईं आंख के मोतियाबिंद का ऑपरेशनपिता के लिए बेटी द्वारा किडनी दान किए जाने को लेकर डॉ. रोहिणी आचार्य की देशभर में सराहना हुई थी, जिसे सामाजिक और मानवीय दृष्टि से एक मिसाल माना गया।
आगे की राह डॉक्टरों के मुताबिक, मौजूदा सर्जरी के बाद लालू यादव की आंखों की रोशनी में सुधार होगा और कुछ दिनों में उन्हें अस्पताल से छुट्टी दी जा सकती है।
फिलहाल वे चिकित्सकीय निगरानी में हैं।
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि चाहे सक्रिय राजनीति हो या पर्दे के पीछे की भूमिका—लालू प्रसाद यादव का नाम बिहार और राष्ट्रीय राजनीति में लंबे समय तक प्रासंगिक बना रहेगा।
