गाजा शांति सम्मेलन के लिए पीएम मोदी को आमंत्रण, ट्रंप और मिस्र के राष्ट्रपति सीसी करेंगे संयुक्त अध्यक्षता

बी के झा

NSK

नई दिल्ली / काहिरा , 12 अक्टूबर

मध्य-पूर्व में युद्ध की आग से झुलसते गाजा में अब शांति की एक नई उम्मीद जगने लगी है। लंबे समय से चले आ रहे हमास-इजरायल संघर्ष के बीच अमेरिका और मिस्र ने मिलकर एक ऐतिहासिक शांति सम्मेलन बुलाया है। इस सम्मेलन के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी आमंत्रण भेजा गया है।हालांकि, भारत सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस सम्मेलन में भारत का प्रतिनिधित्व विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह करेंगे।ट्रंप और सीसी की संयुक्त पहलअमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतेह अल-सीसी की संयुक्त अध्यक्षता में यह सम्मेलन सोमवार, 13 अक्टूबर को मिस्र के शर्म अल शेख में आयोजित होगा।मिस्र के राष्ट्रपति कार्यालय ने कहा है कि इसमें 20 से अधिक देशों के शीर्ष नेता और प्रतिनिधि शामिल होंगे, जिनमें भारत, जापान, स्पेन, कनाडा, बहरीन, अज़रबैजान, कुवैत, हंगरी, साइप्रस, ग्रीस, अल सल्वाडोर और ईरान जैसे देश शामिल हैं।हालांकि, इजरायल ने इस बैठक में भाग न लेने का फैसला किया है।भारत की भूमिका और वैश्विक अपेक्षाएँभारत ने हमेशा से ही दो-राष्ट्र समाधान और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व का समर्थन किया है। पीएम मोदी को भेजे गए इस निमंत्रण को भारत की बढ़ती वैश्विक कूटनीतिक साख के रूप में देखा जा रहा है।विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत का उद्देश्य “मध्य-पूर्व में स्थायी शांति और स्थिरता स्थापित करने के हर प्रयास का समर्थन करना” है।विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह सम्मेलन में भारत की स्थिति और मानवीय सहायता के रुख को रखेंगे।सम्मेलन का उद्देश्य: युद्धविराम से स्थायी शांति की ओरयह सम्मेलन गाजा पट्टी में हाल ही में लागू सीजफायर (युद्धविराम) को स्थायी रूप देने के लिए बुलाया गया है।मिस्र के राष्ट्रपति कार्यालय ने बयान जारी कर कहा —इस शिखर सम्मेलन का उद्देश्य गाजा पट्टी में युद्ध को समाप्त करना, क्षेत्र में शांति और स्थिरता के प्रयासों को मजबूत करना और सुरक्षा के एक नए अध्याय की शुरुआत करना है।संयुक्त राष्ट्र और कई पश्चिमी देशों का मानना है कि यदि यह पहल सफल होती है, तो मध्य-पूर्व में दशकों से जारी तनाव कम हो सकता है।ईरान भी शामिल, पाकिस्तान की दिलचस्पी भी बढ़ीएक्सियोस की रिपोर्ट के मुताबिक इस सम्मेलन में ईरान को भी आमंत्रित किया गया है, जो हमास के प्रमुख सहयोगियों में से एक माना जाता है।वहीं, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भी इसमें भाग लेने की पुष्टि की है। पाकिस्तान इस वक्त तालिबान के साथ जारी सीमा विवादों के बावजूद गाजा में शांति बहाली के समर्थन में सक्रिय भूमिका निभाना चाहता है।गाजा संघर्ष का पृष्ठभूमिगाजा में दो वर्षों से जारी हिंसक टकराव ने अब तक हजारों लोगों की जान ली है।हमास और इजरायल के बीच बार-बार भड़कते संघर्ष के चलते क्षेत्र में मानवीय संकट गहरा गया है।अमेरिका, मिस्र और कतर की मध्यस्थता से हाल ही में हुआ युद्धविराम समझौता अब एक स्थायी समाधान की दिशा में पहला कदम माना जा रहा है।

अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें सम्मेलन परइस सम्मेलन को लेकर वैश्विक समुदाय में काफी उत्सुकता है। ट्रंप प्रशासन के करीबी सूत्रों के अनुसार, यह पहल केवल गाजा तक सीमित नहीं होगी बल्कि पूरे मध्य-पूर्व में दीर्घकालिक शांति व्यवस्था का खाका तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।भारत सहित कई देशों के राजनयिकों का मानना है कि यदि यह पहल सफल होती है तो यह क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिए भी बड़ा कदम होगा।

निष्कर्ष

गाजा शांति सम्मेलन न केवल मध्य-पूर्व के लिए बल्कि विश्व राजनीति के लिए भी एक टर्निंग पॉइंट साबित हो सकता है।जहां एक ओर ट्रंप और सीसी की यह पहल कूटनीतिक दृष्टि से एक साहसिक प्रयोग है, वहीं भारत की भागीदारी इस बात का संकेत है कि नई दिल्ली अब केवल दर्शक नहीं, बल्कि वैश्विक शांति के सूत्रधारों में से एक के रूप में अपनी पहचान बना रहा है।

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