बी के झा
NSK

झंझारपुर/ दरभंगा/ पटना/ नई दिल्ली, 13 अक्टूबर
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-Kisan) योजना देश के करोड़ों किसानों के लिए राहत की योजना है, लेकिन अब इसमें बड़े पैमाने पर गड़बड़ी का खुलासा हुआ है।केंद्र सरकार की जांच में सामने आया है कि देशभर में करीब 31 लाख ऐसे मामले हैं, जिनमें पति और पत्नी दोनों ही इस योजना का लाभ ले रहे हैं — यानी एक ही परिवार को दोहरी किस्तें मिल रही हैं।
क्या है योजना — हर किसान परिवार को सालाना 6,000 रुपये की मददमोदी सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत पात्र किसान परिवारों को हर साल ₹6,000 की राशि दी जाती है।यह रकम तीन किस्तों में — ₹2,000-₹2,000 — सीधे किसानों के बैंक खातों में भेजी जाती है।योजना का उद्देश्य किसानों की छोटी जरूरतें पूरी करना और खेती की लागत में सहायता देना है।लेकिन अब सवाल उठ रहा है कि क्या यह राशि वाकई उन किसानों तक पहुंच रही है, जिनके लिए यह बनाई गई थी?
31 लाख ‘डुप्लिकेट लाभार्थी’ — पति-पत्नी दोनों निकाल रहे पैसेकेंद्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा कराई गई जांच में यह खुलासा हुआ कि 31.01 लाख लाभार्थियों को संदिग्ध पाया गया है।इनमें ऐसे किसान परिवार शामिल हैं, जहां पति और पत्नी दोनों अलग-अलग नाम से PM-Kisan का पैसा प्राप्त कर रहे थे।सरकारी सूत्रों के अनुसार, इन मामलों में से 19.02 लाख का सत्यापन पूरा कर लिया गया है, जिसमें 17.87 लाख लाभार्थियों के पति-पत्नी होने की पुष्टि हो चुकी है।केंद्र ने सभी राज्य सरकारों को निर्देश दिया है कि 15 अक्टूबर तक शेष मामलों का वेरिफिकेशन पूरा करें।
कानून क्या कहता है — एक परिवार को सिर्फ एक सदस्य का अधिकार PM-Kisan योजना के दिशा-निर्देशों के अनुसार, “एक किसान परिवार” में पति, पत्नी और नाबालिग बच्चे शामिल होते हैं।ऐसे में एक ही परिवार का केवल एक सदस्य इस योजना का लाभ प्राप्त कर सकता है।फिर भी कई जगहों पर, एक ही परिवार के कई सदस्य, यहां तक कि नाबालिग बच्चे तक इस योजना का लाभ ले रहे हैं।सरकार ने अब ऐसे 1.76 लाख मामलों की भी पहचान की है, जहां एक ही घर के कई लोगों को यह पैसा मिल रहा है।
केंद्र का आदेश — राज्य करें सख्त वेरिफिकेशन कृषि मंत्रालय ने हाल ही में सभी राज्यों को पत्र भेजा है कि वे डुप्लिकेट लाभार्थियों की सूची की जांच कर यह तय करें कि किन लोगों ने योजना का दुरुपयोग किया है।ऐसे लोगों से वसूली की प्रक्रिया भी शुरू की जा सकती है।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीते 2 अगस्त को वाराणसी से योजना की 20वीं किस्त जारी की थी, जिसके तहत 9.7 करोड़ किसानों के खातों में धन ट्रांसफर किया गया।लेकिन इस बीच यह खुलासा सरकार के लिए बड़ी चुनौती बन गया है — क्योंकि एक तरफ योजनाओं में डुप्लिकेसी है, तो दूसरी ओर कई असली किसान अब भी इससे वंचित हैं।
जमीन पर हकीकत — बिहार के कई असली किसान अब भी वंचित जहां एक ओर कुछ परिवार एक ही छत के नीचे दो-दो लाभ ले रहे हैं, वहीं बिहार जैसे राज्यों में ऐसे हजारों परिवार हैं जिन्हें अब तक एक भी सरकारी योजना का लाभ नहीं मिला।यहां तक कि सरकार द्वारा दिए जा रहे मुफ्त अनाज भी आज तक उस परिवारों को नहीं दी गई है। लेकिन प्रधानमंत्री हर चुनावी मंच से बार बार बोलते हैं कि हमने 80 लाख से अधिक परिवारों को मुफ्त राशन दे रहा हूं ।
लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है।इनमें से कई किसान ऐसे हैं जो स्थानीय नेताओं या अधिकारियों की पैरवी नहीं करते, और न ही राजनीतिक चापलूसी या रिश्वतखोरी का रास्ता अपनाते हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि —अगर आप भाजपा गठबंधन के कार्यकर्ताओं या अधिकारियों को खुश नहीं करते, तो चाहे आप पात्र हों या नहीं, योजना का लाभ नहीं मिलेगा।”यह स्थिति बताती है कि जहां ऊपर से “डबल इंजन सरकार” ईमानदारी और पारदर्शिता का ढिंढोरा पीटती है, वहीं जमीनी स्तर पर भ्रष्टाचार और भेदभाव अब भी जड़ें जमाए हुए हैं।🧾 सरकार की जवाबदेही पर सवाल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार तक, मंचों से बार-बार “ईमानदारी और सुशासन” की बात करते हैं।
लेकिन वास्तविकता यह है कि बिहार समेत कई राज्यों में योग्य किसानों को योजना से बाहर रखकर, राजनीतिक नज़दीकी वालों को लाभ दिया जा रहा है।एक ओर सरकार डुप्लिकेट लाभार्थियों की पहचान कर रही है, वहीं दूसरी ओर वास्तविक जरूरतमंद किसान अब भी बैंक पासबुक लेकर चक्कर काट रहे हैं।यह विडंबना ही है कि एक ही व्यवस्था के भीतर कुछ लोग दोहरी रकम ले रहे हैं और कुछ को एक बार भी नहीं।
अब आगे क्या
वसूली, सुधार और पारदर्शिता की चुनौती केंद्र सरकार ने संकेत दिए हैं कि सत्यापन के बाद गलत लाभार्थियों से राशि की रिकवरी की जा सकती है।साथ ही, भविष्य में डुप्लिकेसी रोकने के लिए आधार-लिंक्ड फैमिली वेरिफिकेशन सिस्टम को और मज़बूत किया जाएगा।विशेषज्ञों का कहना है कि यह केवल तकनीकी नहीं, बल्कि राजनीतिक ईमानदारी की भी परीक्षा है।अगर सरकार वाकई किसानों के हित में है, तो उसे सिर्फ गड़बड़ियों की पहचान नहीं, बल्कि जमीनी न्याय की बहाली भी सुनिश्चित करनी होगी।
अंतिम पंक्ति
ईमानदारी की कसौटी पर खड़ी ‘ईमानदार सरकार’PM-Kisan योजना देश के किसानों के सम्मान और स्वाभिमान की प्रतीक है।
लेकिन जब पति-पत्नी दोनों पैसा लें और असली किसान खाली हाथ रह जाएं — तो यह सिर्फ अनियमितता नहीं, बल्कि व्यवस्था की असफलता है।अब सवाल यह नहीं कि 31 लाख लोगों ने दोहरा लाभ लिया, सवाल यह है कि —कितने सच्चे किसान अब भी उस सूची से बाहर हैं, जिनके लिए यह योजना बनी थी?
